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  • Kim Sharma, Leander Paes Among Those Who Took The Class, Once Wanted To Become A Doctor, Today I Am A Yoga Coach

मुंबई में सेलिब्रेटीज को योग सिखाती हूं:क्लास लेने वालों में किम शर्मा, लिएंडर पेस भी, कभी डॉक्टर बनना चाहती थी, आज हूं योग कोच

2 महीने पहलेलेखक: संजय सिन्हा
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इंस्टाग्राम पर प्रोफाइल सेलिब्रेटी योग ट्रेनर। समुद्र का किनारा हो या पहाड़, स्टूडियो हो या ऑनलाइन क्लास, अलग-अलग योगासनों में सिद्धहस्त। आप इन्हें योग कोच कहें या सेलिब्रेटी योग प्रशिक्षक, वह अपनी भूमिका में सहज दिखती हैं। छोटी उम्र लेकिन योग के कठिन आसनों में महारथ। जिसने कभी डॉक्टर बनने का सपना देखा था, उसने योग से कई मुकाम हासिल किए। वह योग कोच हैं और योग जर्नलिस्ट भी। योग के बूते न केवल अपना करिअर संवारा बल्कि हजारों लोगों को बीमारियों से मुक्त भी किया। हम बात कर रहे हैं सेलिब्रेटी योग कोच स्नेहा शर्मा की।

सेलिब्रेटीज को योग सिखाया

स्नेहा शर्मा भास्कर वुमन से कहती हैं कभी नहीं सोचा था कि योग को अपना करिअर बनाऊंगी। लेकिन आज योग ही मेरे लिए सब कुछ है। कई सेलिब्रेटीज हैं जिन्हें मैं योग सिखाती हूं। मुंबई में सर्वा योग-दिवा योग से मैं जुड़ी हूं। सर्वा योग सर्वेश शशि चलाते हैं जबकि दिवा योग फिल्म अभिनेत्री मलाइका अरोड़ा का है। मैंने कई सेलिब्रेटीज को योग सिखाया है। किम शर्मा, तमन्ना भाटिया, श्रद्धा दास, ईशा रिखी आदि सेलिब्रेटीज ने मेरे योग क्लास को अटेंड किया है।

हिमेश रेशमिया, रोहित शेट्‌टी के परिवार के सदस्य भी सर्वा योग में योग क्लास करते हैं। टेनिस प्लेयर लिएंडर पेस ने भी मेरे योग क्लास को ज्वाइन किया है। ऐसे और भी कई सेलिब्रेटीज को मैंने योग सिखाया है।

अमेरिका के लोग भी जुड़ते हैं मेरी क्लास से

कोविड की वजह से पिछले ढाई साल से ऑनलाइन योग क्लास ले रही हूं। फिलहाल बड़ोदरा में हूं। नेशनल ही नहीं इंटरनेशनल लेवल पर भी मेरी योग क्लासेज चलती हैं। सिंगापुर, मलेशिया, जर्मनी, अमेरिका से लोग योग क्लास से जुड़ते हैं।

बनारसी हूं, स्वभाव में भी झलकता है

मैं बनारस की रहनेवाली हूं। इस शहर से गहरा जुड़ाव रहा है। हालांकि योग और करिअर को लेकर मैं इतना रम गई कि 10 साल बाद अपने शहर बनारस आ पाई थी।

घर पर थी कई बंदिशें

हम दो बहनें हैं। मैं छोटी हूं। हमारे घर में लड़कियों को बहुत आजादी नहीं थी। बाहर न निकलो, घूमो-फिरो नहीं। घर से बाहर अकेले नहीं जाना है, छत पर नहीं जा सकती थी। ऐसी कई बंदिशें मुझे झेलनी पड़ी। दरअसल, लड़कियों को लेकर जो समझ पहले से चली आ रही है वो सब कुछ ऐसा ही था।

पढ़ने के लिए हरिद्वार पहुंची

पापा ने मेरा हमेशा सपोर्ट किया। उनकी इच्छा थी कि 12वीं की पढ़ाई के बाद हरिद्वार के देव संस्कृति विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन करूं। मेरा परिवार गायत्री परिवार से जुड़ा है और आध्यात्मिक विचारों पर चलनेवाला है। तो मुझे वहां पढ़ने के लिए भेजा गया। उससे पहले मुझे साइंस अच्छा लगता था। मैं डॉक्टर बनना चाहती थी। लेकिन ईश्वर ने मुझे देव-संस्कृति विश्वविद्यालय भेज दिया।

पहले योग के प्रति लगाव नहीं था

यहां योग के सिवा मुझे कोई दूसरा विकल्प नहीं दिखा। वहां मेडिकल की पढ़ाई तो होती नहीं थी। यहां पहली बार में मेरा योग में सेलेक्शन नहीं हुआ। इस बीच 2010 में मैंने सर्टिफिकेट कोर्स कर लिया। लेकिन दूसरी बार मेरा रिटेन और इंटरव्यू दोनों क्लियर हुआ। 2014 में मैंने ग्रेजुएशन पूरा किया। तब भी मेरा योग के प्रति बहुत लगाव नहीं था।

योग जर्नलिज्म करना शुरू किया

इसी ओर करिअर बनाऊंगी, ये भी तब नहीं सोचा था। तब मेरी बहन श्वेता ने कहा कि तुम योग और जर्नलिज्म एक साथ लेकर क्यों नहीं चलती। इस तरह मैं आगे बढ़ी। फिर मैंने जर्नलिज्म एंड मास कम्यूनिकेशन में मास्टर्स किया। देहरादून में मैंने रेडियो में काम किया, लेकिन मुझे लगा कि नहीं वैसी नौकरी करनी है जिसमें फाइनेंशियल रूप से आप मजबूत बन जाएं।

…और बिहार चली आई

तभी एक योग कोच की नौकरी मुझे मिल गई। नीदरलैंड का एक कपल बिहार के औरंगाबाद के ओबरा में एक स्कूल चला रहा था। वहां मुझे नौकरी ऑफर हुई। मैंने बिना समय गंवाए हां कर दिया। तब पापा ने कहा कि तुम गांव जा रही हो, क्या यह काम कर लोगी। मैंने कहा कि मैं बिल्कुल जाऊंगी चाहे कुछ भी हो जाए। आठ महीने मैंने वहां काम किया। बच्चों को योग सिखाने में मुझे अच्छा लग रहा था।

सर्वा योग के लिए चुन ली गई

इस बीच मेरे दोस्त ने कहा कि करिअर यहां से ही नहीं संवरेगा। तुम्हे आगे की ओर देखना चाहिए। उसने मुझे मुंबई के सर्वा योग के बारे में बताया। मैंने वहां अप्लाई किया। तो मुझे वहां से इंटरव्यू के लिए बुलाया गया। मैं तब खुद कॉम्फिडेंट नहीं थी, लेकिन आसानी से सेलेक्शन हो गया। वहां से मुझे एक महीने के लिए बेंगलुरु ट्रेनिंग के लिए भेजा गया। वहां से मुझे चेन्नई सेंटर भेजा गया।

चेन्नई में करिअर को शक्ल दिया

चेन्नई मेरे करिअर में टर्निंग प्वाइंट रहा। यहां मैं डेढ़ साल रही। क्लास लेने के साथ योग पर लिखने का भी मौका मिला। यहां मेरा अनुभव काफी अच्छा रहा। एक बार एक महिला आई। मैंने पूछा आप कैसी हैं। उन्होंने कहा कि बस आपको देख लिया और अच्छे हो गए। तब मुझे लगा कि मेरा काम वाकई शानदार है। मुझे अपनी लाइफ को चेंज करना है। मैं लोगों को खुशी दूंगी। मुझे अच्छा लगता है जब लोगों के चेहरे पर स्माइल देखती हूं। तब लगता है कि अब सक्सेसफुल हूं। यहां क्लास लेने के साथ हॉट स्टार पर योग वीडियोज में मैंने वॉयस ओवर किया।

सपनों के शहर मुंबई पहुंची

चेन्नई से मेरा ट्रांसफर मुंबई हो गया। वहां मेरे काम की बहुत तारीफ हुई। मुझे टैलेंट टाइकून का अवार्ड मिला। इस तरह प्रमोशन पाते हुए मुंबई के दिवा योग आ गई। मैं अपनी ड्रीम सिटी में थी।

मुंबई में सब कुछ खुद से सेटल किया

मैं वर्षों घर से दूर रही। मुंबई में घर खोजना, सेटल होना, ये संघर्ष की अलग कहानी है। मम्मी-पापा को पता भी नहीं होता था कि मैं कैसे ये सारा चीज कर रही हूं। मम्मी-पापा और सिस्टर ने गाइड जरूर किया लेकिन मैंने अपने करिअर को पूरी तरह मुंबई में खुद से सेटल किया।

लाइफ पार्टनर वैसा हो जो मेरे टैलेंट की कद्र करे

मुझे लगता है कि मेरा जीवन साथी वैसा हो जो मेरे टैलेंट, मेरे स्किल को समझे। मेरा यही मानना है कि अमीर पति खोजने की जगह अमीर पत्नी बनो, यह ज्यादा अच्छा है।

अपने परिवार के साथ स्नेहा शर्मा
अपने परिवार के साथ स्नेहा शर्मा

कभी गिव अप न करें

मुझे लगता है कि जो आप देते हैं न, वही आपको मिलता है। जीवन में कभी गिव अप नहीं करना चाहिए। ज्यादा से ज्यादा क्या होगा, हर सिचुएशन के लिए रेडी रहें। फेस करना चाहिए। लड़कियां खुद पर भरोसा रखें। जो हासिल करना चाहते हैं उसके बारे में सोचना शुरू कर दें। अपनी सारी एनर्जी को निगेटिविटी से हटाकर पॉजिटिविटी की ओर लगाएं।

प्राथमिकताएं तय करें

मुझे लगता है कि जीवन में अपनी प्रायरिटी तय करनी चाहिए। आपको पता होना चाहिए कि गोल क्या है। करना क्या है। फिर जो सोच लिया, उसे पूरा करके दम लो। मेरे गुरु जी कहते हैं जो जैसा सोचता है करता है वैसा बन जाता है। ये वास्तव में होता है मेरा अनुभव है।

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