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एनर्जी कोच उर्मी कोठारी का ‘अनबॉक्स’ करिअर:‘मेरे लिए फिटनेस सिर्फ वजन कम करना नहीं, जीवन का जश्न है’

2 महीने पहलेलेखक: मीना
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कई बार बच्चे ग्रेजुएशन तक पास कर लेते हैं, लेकिन करिअर किसमें बनाना हैं, ये तय नहीं कर पाते। ऐसे में सोसायटी का दबाव भी रहता है कि उनके बनाए सांचों में फिट होकर नौकरी करें, लेकिन मैंने ऐसा कभी नहीं किया। जिस काम में मन लगा वो किया। ये शब्द हैं मुंबई की रहने वाली एनर्जी कोच, फिटनेस एक्सपर्ट और लेखक उर्मी कोठारी के। भास्कर वुमन से बातचीत में बताती हैं, ‘मैं 12 साल की थी तब स्पोर्ट्स में इंटरेस्ट था। बास्केट बॉल बहुत खेलती थी। जब तक इस खेल को खेलती दुनिया भूल जाती और इसे अपना ‘मी टाइम’ बना लेती। पढ़ाई-लिखाई में एवरेज थी, लेकिन क्योंकि मुझे खेलने के लिए समय निकालना पड़ता था, इसलिए पढ़ाई के लिए टाइम पहले ही निकाल लेती। ये सोचकर पढ़ती कि जल्दी-जल्दी पढ़ लूं फिर खेलने जाऊंगी। मेरी इस आदत ने पढ़ाई में भी स्कोर बढ़ाया और 10वीं में स्कूल की टॉपर बन गई।

मां चाइल्ड साइकॉलोजिस्ट और पिता बिजनेसमैन हैं। मां को अच्छे से मालूम है कि बच्चों के साथ कैसे डील करना है? 12वीं जब सब बच्चे अच्छे नंबर लाने के लिए किताबों में घुसे रहते थे, तब मैं खेलती भी थी और पढ़ती भी थी। मैंने करिअर को लेकर कुछ नहीं सोचा था बस ये सोचा था कि मुझे कॉमर्स नहीं साइंस पढ़नी है, ताकि सभी तरह के ऑप्शन्स खुले रहें।

डांस और स्पोर्ट्स में रहा शौक
खेल के अलावा मुझे डांस का भी शौक था। आठ साल की उम्र से भरत नाट्यम सीखा। जब कॉलेज में पहुंची तो एडवरटाइजिंग की पढ़ाई की। यहां स्पोर्ट्स कीड़ा और विकसित हुआ। किक बॉक्सिंग, जिम करने लगी ये सब करने लगी। कॉलेज फेस्टिवल्स में भी पार्टिसिपेट किया। सामक डावर के साथ काम किया। मेरे शरीर में मूवमेंट हमेशा से थी। इसके बाद मैंने एक साल एडरवरटाइजिंग में काम किया। फिर एमबीए किया। यहां भी बास्केट बॉल खेलना शुरू था। इस वक्त मैं सिंगापुर में थी तो वहां रनिंग भी शुरू कर दी। 2009 में एमबीए करने के बाद मुझे जॉब मिल गई। जो काम मैं कर रही थी, उसमें मुझे मजा नहीं आ रहा था। तब डांस को कंटीन्यु किया।

डांस की लीं क्लासिस
‘दक्षा सेठ’ डांस गुरु से जाकर केरल में मिली। ऑडिशन दिया। इस वक्त तक मैं 24 साल की थी। इस दौरान मैंने कुछ नहीं सोचा कि मैं गलत कर रही हूं या सही। बस डांस का शौक था तो उसे आगे बढ़ाया। मेरे दोस्त बोलने लगे कि तुमने एमबीए किया है, अब डांस की तरफ क्यों जा रही हो? मैंने बोला कि मुझे करना है, उसके लिए मुझे किसी को एक्सप्लेनेशन देने की जरूरत नहीं है। यहां मैंने 2009 से 2012 तक कलारिपायाट्टू, आयंगर योग और मलखंब सीखा। तीन साल तक मैं केरल में रही। सिर्फ डांस किया और कुछ नहीं।

फिटनेस की भी ली प्रोफेशनल ट्रेनिंग
2012 में मैं वापस मुंबई आ गई। यहां आकर दोस्तों से मिली तो उन्होंने फिटनेस की ट्रेनिंग देने के लिए कहा। दोस्तों को सिखाना शुरू किया तो दो महीने में 10 क्लाइंट्स हो गए। इस समय तक मुझे समझ आया कि मैं एक अच्छी टीचर भी बन सकती हूं। इस काम को करते समय अहसास हुआ कि यहां से अच्छा पैसा कमाया जा सकता है। फिर मैंने काइनेटिक लिविंग शुरू किया और खुद को और टेक्नीकली साउंड कराने के लिए प्रोफेशनल कोर्सेस किए। पिलाटीज से ह्यूमन बॉडी का अनाटोमी कैसे होता है, ये सीखा। केटलबॉल, एनीमल फ्लो, कोर ऐंड मेटाबॉलिक कंडीशनिंग सीखी।
मैं एक बार जो एक्सरसाइज सीख लेती हूं तो उसे भूलती नहीं हूं। काइनेटिक लिविंग ट्रेनिंग फिलोसफी है। माइंड को ट्रांसफॉर्म करने के लिए बॉडी का इस्तेमाल किया जाता है। ये केवल वेट लॉस नहीं है। यह शरीर के साथ जुड़ने की नई कला है। ये ऐसे मूवमेंट्स हैं, जो बॉडी को एक यूनिट की तरह इस्तेमाल करते हैं।

खोला अपना स्टूडियो
2015 में नाइकी ट्रेनर बनी। जिसमें महिलाओं के साथ लाइव ट्रेनिंग करने का मौका मिला। यहां से मेरे करिअर की उड़ान बढ़ी। मेरे पास फिटनेस के इतने आइडियाज थे जो मुझे किसी को बताने थे, इसलिए 2017 में स्टूडियो खोला। इस तरह मेरी एक फिटनेस की कम्युनिटी बन गई। कोविड और पेंडेमिक की वजह से मैंने स्टूडियो का काम 2020 में ऑनलाइन किया। अब मेरे पास चार ट्रेनर्स की टीम है, जो लाइव क्लासिस देती, पर्सनल ट्रेनिंग, ऑन डिमांड वीडियोज करती है। अभी बस पिछले महीने ही स्टूडियो बंद किया है और पूरी तरह से उसे ऑनलाइन कर दिया है।

किसी एक सांचे का इंसान नहीं हूं
मैंने खुद को कभी किसी एक सांचे में फिट नहीं किया और न ही किसी को करने दिया। वही किया जिसमें मुझे अच्छा लगा। जो भी किया उसमें अपना सौ फीसद दिया। फिटनेस मेरे लिए सिर्फ वजन कम करना या एब्स बनाना नहीं है, ये शरीर से प्यार है, सेलिब्रेशन है। जब आप अपने काम से प्यार करते हैं, तब दुनिया उसकी अहमियत भी समझने लगती है। मुझे टाइम्स शी का अनलिमिटेड एंटरप्रेन्योर का अवॉर्ड, आइकॉनिक वुमेन लीडरशिप अवॉर्ड और वुमन सुपर एचीवर अवॉर्ड्स जैसे मिल चुके हैं। इसके अलावा टेड टॉक भी दे चुकी हूं।

‘जिसमें खुशी मिले वो करें’
काइनेटिक लिविंग मैंने क्रिएट किया, लेकिन इसके इतर भी मेरी बहुत पहचान है। मैं एनर्जी कोच, फिटनेस एक्सपर्ट, लेखक और मोटिवेशनल स्पीकर हूं। मैं आज भी मौकों की तलाश में रहती हूं और नया सीखने से घबराती नहीं। सोसायटी आपको अपने बनाएं खांचो में फिट करने की कोशिश करती है, लेकिन तय आपको करना है कि आपको क्या करना अच्छा लगता है। किसी काम के बारे में सिर्फ सोचें नहीं उस पर एक्शन भी लें। क्योंकि जब तक नदी में कूदेंगे नहीं तब तक तैरना सीखेंगे कैसे।

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