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स्पेसिफिक लर्निंग डिसऑर्डर:क्या आपका बच्चा क्लास का कमजोर स्टूडेंट है? ये शरारत नहीं, हो सकती है उसकी परेशानी

2 महीने पहलेलेखक: श्वेता कुमारी
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तारे जमीन पर फिल्म याद है आपको? हां वही, जिसमें 8-9 साल के बच्चे ईशान अवस्थी की कहानी दिखाई गई थी। कैसे वो पढ़ने-लिखने की चीजें समझ नहीं पाता, जिसकी वजह से उसके घर वाले उससे बेतहाशा परेशान रहते। मार-पीटकर, बोर्डिंग स्कूल भेजकर हर तरह से उस बच्चे को पढ़ाने की कोशिश की गई, बावजूद इसके बच्चा वैसा का वैसा रहा। सवाल ये उठता है कि बच्चा वैसा क्यों रहा? क्योंकि पैरेंट्स बच्चे को समझ पाने में नाकामयाब रहे।

जब आपका बच्चा पढ़ने में कमजोर हो, एक ही चीज कई दफा समझाने के बावजूद वो उसे पढ़ने, लिखने और समझने में परेशानी महसूस हो, तो हो सकता है वो स्पेसिफिक लर्निंग डिसऑर्डर से पीड़ित हो। इसे लेकर परेशान होने कि जरूरत नहीं, क्योंकि परिवार के सपोर्ट और समय रहते दिखाई गई समझदारी से बच्चे को बिल्कुल ठीक किया जा सकता है। ये कहना है सीनियर कन्सल्टेंट साइकेट्रिस्ट डॉ. धर्मेन्द्र सिंह का।

क्या है स्पेसिफिक लर्निंग डिसऑर्डर, जिसकी वजह से बच्चे कुछ याद नहीं रख पाते?

ये एक ऐसी स्थिति है, जिसमें पढ़ा-लिखा कुछ भी याद नहीं रहता। लाख कोशिशों के बावजूद उन्हें Z और N का अंतर समझ नहीं आता। इससे जूझने वाले बच्चे कभी उल्टा A लिख देते हैं, तो कभी b की जगह d लिखते हैं। ये एक न्यूरो बायोलॉजिकल कंडीशन है। हालांकि ऐसा भी नहीं है कि जो बच्चे सीखने में समय लेते हैं, वो इसी डिसऑर्डर से पीड़ित हों। इसका पता किस उम्र में चलता है, इसकी कोई तय सीमा नहीं है, लेकिन माना जाता है कि इसका असर स्कूल की शुरुआत के साथ ही दिखने लगता है, क्योंकि बच्चों की असल लर्निंग तब ही शुरू होती है।

कैसे पता चले कि बच्चे में है स्पेसिफिक लर्निंग डिसऑर्डर?

ये डिसऑर्डर होने की वजह जेनेटिक या आसपास का माहौल हो सकता है। अगर आपका बच्चा सीखने में स्लो है या उसे पढ़ने-लिखने में परेशानी होती है, तो सबसे पहले ये पता लगाएं कि कहीं उसे स्पेसिफिक लर्निंग डिसऑर्डर की दिक्कत तो नहीं है। ये पता करने के लिए आप बच्चे का IQ लेवल चेक करवाएं। अगर लेवल 90 से 109 के बीच है, तो वो नॉर्मल है, और अगर इससे ज्यादा है तो वो नॉर्मल से ज्यादा है। इन दोनों ही स्थिति में बच्चा लर्निंग डिसऑर्डर से ग्रसित माना जाएगा। वहीं अगर बच्चे का IQ लेवल 90 से कम हो, तो उसे मेंटल रिटार्डेशन यानी मंदबुद्धि की दिक्कत मानी होती है।

कितने तरह के होते हैं ये डिसआर्डर?

साल 2019 की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 10% बच्चे लर्निंग डिसआर्डर से जूझते हैं। लर्निंग डिसऑर्डर तीन तरह के होते हैं। पहला डिस्लेक्सिया, जिसमें बच्चों को शब्द पढ़ने में दिक्कत होती है। दूसरा डिस्ग्राफिया, जिसमें बच्चों को लिखने की दिक्कत होती है। तीसरा और आखिर है डिसकैलकुलिया, जिसमें बच्चों को मैथ्स समझने में दिक्कत होती है। इस बारे में डॉ. सिंह कहते हैं कि अगर आप इस बात को लेकर चिंता में हैं कि बच्चा डिसऑर्डर से उबर पाएगा या नहीं, तो उसके लिए आप निश्चिन्त रहें और डॉक्टर से मिलें। समय रहते अगर सही ट्रीटमेंट मिले, तो बच्चा अच्छी जिंदगी जी सकेगा। इसका जीता जागता उदाहरण बॉलीवुड के दो कलालर अभिषेक बच्चन और ऋतिक रौशन हैं। ये दोनों बचपन में लर्निंग डिसऑर्डर से जूझ रहे थे, लेकिन आज सक्सेसफुल करियर बना चुके हैं। इसलिए पढ़ाई-लिखाई के लिए अपने बच्चों को डांटने और पीटने से अच्छा है कि उनकी परेशानी समझें और डॉक्टर से कंसल्ट करें।

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