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बच्चा रहेगा हेल्दी और खुश:पहले, दूसरे और उसके बाद की उम्र में बच्चे को खिलाएं ये फायदेमंद चीजें

4 महीने पहले
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बच्चे को क्या खिलाएं, क्या न खिलाएं ये बड़ा सवाल हर मां के दिमाग में अक्सर घर किए रहता है। बच्चा किसी भी उम्र का हो उसे संपूर्ण आहार कैसे मिले, जिससे उसका शारीरिक और बौद्धिक विकास हो सके। आपको बताएं कि बच्चे के विकास का एक हिस्सा उसकी नींद से भी जुड़ा है। बच्चे को अच्छी नींद तभी आ सकती है जब उसकी डाइट में पौष्टिक आहारों को जोड़ा जाए। इस बारे में श्री वैद्य आयुर्वेदिक हॉस्पिटल की पीडियाट्रिशियन डॉ. प्रगति वालिया ने कई इस अहम मुद्दे पर बात करते हुए बताया है कि बच्चों की डाइट कैसी होनी चाहिए।

किस उम्र के बच्चे को क्या खिलाएं?

डॉ. वालिया बताती हैं कि आयुर्वेद में हर उम्र के बच्चों के लिए अलग तरह के पोषक तत्वों का उल्लेख किया गया है। इससे न सिर्फ बच्चे की ग्रोथ बेहतर होती है, बल्कि उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है। किस उम्र में बच्चे को क्या खिलाना है, अगर मां इस बात को जानते हुए गंभीरता से लेती है, तो बच्चे कम से कम बीमार पड़ते हैं।

6 महीने से एक साल तक - इस उम्र के बच्चों को मां का दूध अगर मिल रहा है, तो उसे कई पोषक तत्व उसी दूध में मिल जाते हैं। बावजूद इसके चूंकि बच्चा बड़ा हो रहा है और उसके दांत आने लगते हैं, तो उसे उबले हुए सेब, फलों का रस, मूंग दाल का पानी, उबली हुई मिक्स सब्जियों (केला, गाजर और पपीता) में थोड़ा नमक डालकर बच्चे को दे सकते हैं। इस उम्र के बच्चे बेहद छोटे होते हैं, इसलिए उन्हें एक बार में ज्यादा खिलाने की कोशिश न करें, बल्कि हर डॉन से तीन घंटे पर अलग-अलग चीजें खिलाएं। इससे बच्चा खाने में नखरे कम करेगा।

दो साल से तीन साल तक - इस उम्र में बच्चे के सोचने-समझने की क्षमता तेजी से बढ़ती है। बतौर पेरेंट इस बात का ध्यान देना जरूरी है कि बच्चे की डाइट में ज्यादा से ज्यादा ग्रीन्स, प्रोटीन और कैल्शियम युक्त आहार शामिल किए जाएं। इसके लिए बच्चे को फलों के अलावा भीगे बादाम और मुनक्का, दलिया, हलवा, मूंग दाल का चीला, पनीर, दाल, खिचड़ी, ओट्स खिलाए जा सकते हैं। इन सभी में मौजूद प्रोटीन्स और विटामिन्स बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में कारगार साबित होंगे।

चार से पांच साल तक - इस उम्र के बच्चे समझदार होने लगते हैं उन्हें अपने आसपास चल रही हर बात की समझ होने लगती है। घरवालों से आगे बढ़कर इस उम्र में बच्चे सोसाइटी और कॉलोनी में नए दोस्त बनाने लगते हैं। साथ ही वो सारी चीजें खाने लायक हो जाते हैं, जो कि घर के बड़े सदस्य खा रहे होते हैं, ऐसे में बतौर पेरेंट जिम्मेदारी अधिक हो जाती है, क्योंकि बच्चे वही खाने की जिद करते हैं, जो वे बड़ों को खाते या दूसरे बच्चों को टिफिन में लाते हुए देखते हैं। इसलिए अपनी डाइट का भी खासा ध्यान रखें और बच्चे को समझाने से पहले खुद की डाइट में हेल्दी खाने को शामिल करें। इस उम्र में पोहा, इडली, उपमा, कॉर्नफ्लेक्स, पराठे, सैंडविच, शेक, जूस, ऑमलेट, टोस्ट और ज्यादा से ज्यादा हरी खिलाएं।

डॉ. वालिया के मुताबिक, बच्चों को उम्र के हिसाब से न्यूट्रिशन दिया जाए और बाहर के चटपटे चिप्स, कोल्डड्रिंक्स, नूडल्स से हटकर उनकी उम्र के हिसाब से ऊपर बताए गए डाइट टिप्स फॉलो किए जाएं, तो उनकी नींद बेहतर होती है। जब बच्चों की डाइट, नीद और हेल्थ अच्छी रहती है, तो वो बेहतर महसूस करते हैं और खुश रहते हैं।