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कोरोना की तीसरी लहर में फीवर में है बेबी:बुखार से पहले बच्चों में आते हैं कुछ बदलाव, आप भी तुरंत कस लें कमर

4 महीने पहले
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कोविड खतरे की तीसरी लहर के बीच बच्चा अगर बीमार हो जाए, तो पेरेंट्स की चिंता बढ़ जाती है। बेशक लोगों का एक-दूसरे के घर आना और मिलना कम हो गया है, लेकिन कई पेरेंट्स अब भी ऐसे हैं, जिन्हें बाहर निकलना पड़ता है। चाहे, ऑफिस जाना हो या बिजनेस के लिए या फिर जरूरी सामान लाने की बात हो, इन सबके बीच छोटे बच्चे, जो सालभर या दो-तीन साल की उम्र के हों, उनके लिए पेरेंट्स का परेशान होना आम है। इतने छोटे बच्चों को अगर फीवर आ जाए, तो माता-पिता को क्या करना चाहिए, बता रहे हैं पीडियाट्रिशियन डॉ. अर्पित गुप्ता।

बच्चे के बुखार में कब है चिंता की जरूरत?

डॉ. गुप्ता कहते हैं कि बुखार कोई रोग नहीं है, बल्कि शरीर के अंदर हो रही परेशानी के संकेत होते हैं, इसलिए इसमें डरने की जरूरत नहीं है। बच्चों में बुखार के लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं। उनमें कंपकपी, पेट दर्द, सिर दर्द, भूख न लगना, नींद न आना जैसे सिम्पटम दिखे तो मुमकिन है कि उन्हें बुखार आने वाला हो। ऐसे किसी भी लक्षण के दिखने पर सबसे पहले बच्चे का बॉडी टेम्परेचर नापें। अगर बच्चे का बॉडी टेम्परेचर 99.5 फॉरेन्हाइट से ऊपर या 37.5 डिग्री सेल्सियस से ऊपर है, तो समझिये बच्चे को बुखार है, जो कि चिंता की बात है।

अगर बच्चे को बुखार है तो क्या करें?

  • ऊपर बताए गए टेम्परेचर से ज्यादा बुखार हो तो बच्चे को डॉक्टर की सलाह लेकर पैरासिटामोल ड्राप दें।
  • बच्चे को अगर 102 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बुखार हो, तो पानी की पट्टी करें।
  • बच्चे के हाइड्रेशन का ध्यान रखें। पानी, सूप जैसी चीजें उसे लगातार देती रहें।
  • रूम टेम्परेचर नॉर्मल रहने दें। रूम में हीटर चलाकर कमरे को गर्म न करें।
  • अगर बच्चा ब्रेस्ट फीडिंग करता है और मां कोविड संक्रमित है, तब भी फीडिंग कराना न छोड़ें।

खुद कोई फैसला लेने से पहले डॉक्टर की सलाह लें

डॉ. गुप्ता कहते हैं कि अगर घर के किसी सदस्य को वायरल फीवर भी है, तो भी बच्चे से दूर रहें और हो सके, तो नॉर्मल फ्लू में भी मास्क लगाए रहें। बच्चे को संतुलित आहार दें और उनकी डाइट में प्रोटीन, विटामिन और मिनरल्स का खास ध्यान रखें। बच्चे को दवा देने में छह घंटे का गैप रखें। साथ ही हर उम्र के बच्चे को उसकी उम्र और वजन के हिसाब से एक्सपर्ट्स पैरासिटामोल ड्रॉप्स लेने की सलाह देते हैं, इसलिए खुद से कोई फैसला न लें। बच्चे को दवा देने से पहले डॉक्टर की सलाह लेकर ही आगे बढ़ें। डॉ. कहते हैं कि कई बच्चों की बॉडी थोड़ी गर्म होती ही है, जिसे पेरेंट्स बुखार समझ लेते हैं, इसलिए जरूरी है कि डॉक्टर के पास जाने से पहले बच्चे का टेम्परेचर थर्मामीटर से नाप लिया जाए।