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हॉलिडे टाइम:छुट्टी पर निकलने से पहले खुद से पूछें ये सवाल, क्या आपने बच्चे को ट्रैवल मैनर्स सिखाए?

2 महीने पहलेलेखक: श्वेता कुमारी
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छुट्टियों से पीछा कौन छुड़ाता है? वो भी तब, जब इसमें घूमने-फिरने का प्लान हो। जैसे घर में रहने के लिए बच्चों को मैनर्स सिखाए जाते हैं, वैसे ही कुछ आउटिंग/हॉलिडे मैनर्स भी होते हैं, जिनका पता आपके बच्चे को होना जरूरी है। मस्ती-मजाक से इतर अगर आप अपने बच्चों को ऐसी बातें बताते-समझाते हैं, तो वो और आप, अपनी ट्रिप का भरपूर मजा ले सकते हैं।

हर देश, राज्य और शहर के अपने नियम-कानून होते हैं, जिन्हें फॉलो करना वहां के लोगों के लिए बेहद जरूरी होता है। यही बात उन लोगों पर भी लागू होती है, जो उन जगहों पर घूमने आते हैं। उनसे उम्मीद की जाती है कि वे भी एक सभ्य, जिम्मेदार इंसान की तरह बर्ताव करें, ताकि जगह की खासियत और खूबसूरती बनी रहे।

बतौर पैरेंट, बच्चों को बाहर की दुनिया से कैसे रूबरू होना है, ये समझाना एक अहम जिम्मेदारी है। उन्हें हॉलिडे हैबिट्स के बारे में कैसे समझाएं और उनका ये जानना क्यों जरूरी है ये बता रही हैं फैमिली एक्सपर्ट शिवानी मिसरी साधू

यहां-वहां कचरा फेंकने और थूकने से रोकें

कई लोगों को आपने जहां-तहां थूकते देखा होगा। इसे लेकर उन्हें न कभी चेताया जाया है, न ही उन्हें आसपास के लोग ही टोकते हैं। शिवानी कहती हैं कि बच्चों को सफर में कूड़ा इधर-उधर न फेंककर सीधे डस्टबिन में डालना या किसी बैग में इक्कठा करना सिखाएं। बच्चे ये बातें सुनकर कम और अपने पैरेंट्स को ऐसा करते हुए देखकर ज्यादा सीखते हैं, इसलिए इस मामले में बच्चों को समझाने के साथ-साथ अपनी आदतों से भी उनके दिमाग में ऐसे गुड हैबिट्स डालें।

सुरक्षा से न करें खिलवाड़

कहीं भी जाने से पहले बच्चों को ये जरूर बता दें कि वो नई जगह देखकर इतने उत्साहित न हो जाएं कि बिना फैमिली मेम्बर को साथ लिए इधर-उधर घूमने निकल जाएं। उनमें ये समझ विकसित करना जरूरी है कि वो अकेले निकले तो कभी भी किसी बड़ी मुसीबत में फंस सकते हैं। चाहे वो हिल स्टेशन, स्विमिंग पूल, भीड़-भाड़ वाली जगह, एलिवेटर्स या फिर समुद्र का किनारा ही क्यों न हो।

को-ट्रैवलर्स को न हो परेशानी

टूर में अगर बच्चे इलेक्ट्रॉनिक गैजेट या फोन लेकर जा रहे हैं, तो घर पर उन्हें ये समझा लें कि उनका एंटरटेनमेंट को-पैसेंजर के लिए समस्या की वजह न बने। साथ ही बच्चों को ये भी समझाएं कि ट्रैवलिंग के दौरान वो अपनी एक्टिविटी ऐसी रखें, जो किसी की डिस्टर्बेंस की वजह न बनें। उन्हें पब्लिक प्लेस में उठने-बैठने के तौर तरीके, जिद न करने की आदत और अपनी वजह से दूसरों को परेशानी में न डालने की बात बचपन से ही समझानी चाहिए। बच्चों को ये समझाएं कि पब्लिक प्लेस में बैठकर शोर मचाना, गंदगी फैलाना, नाक-कान में उंगली डालना या फिर अपने खेल से दूसरों को परेशान करना किसी भी तरह से उनकी आदत का हिस्सा न बने।

सवाल पूछें मगर प्यार से

बच्चे बहुत जिज्ञासु होते हैं। हर बात के लिए या हर नजारे के लिए उनके पास सवाल होते हैं। नयी बातों को जानने के लिए सवाल-जवाब करना यकीनन अच्छा है, लेकिन किसी से भी कुछ बात करते या पूछते समय बच्चे पूरा सम्मान दिखाएं ये बेहद जरूरी है। बच्चों को हमेशा बताएं कि होटल के स्टाफ से लेकर बस कन्डक्टर तक, सब उनसे बड़े हैं और सबकी इज्जत करना उनकी जिम्मेदारी है। किसी के पेशे की वजह से उससे बुरा बर्ताव न करना बच्चों को बाहर की दुनिया में भी प्यारा बनाता है।

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