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महिलाओं का मोर्चा:MP में उमा भारती बोलीं- शराबबंदी के लिए लाएंगे कानून, जानिए देश के किन राज्यों में नहीं पी सकते शराब

नई दिल्ली2 महीने पहलेलेखक: दिनेश मिश्र
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  • शराब बेचने से होने वाली कमाई के चलते पाबंदी नहीं लगाती हैं सरकारें
  • 40 दिन के सख्त लॉकडाउन में 30 हजार करोड़ के राजस्व का नुकसान
  • 2019 में देश में जहरीली शराब पीने से 1,296 लोगों ने गंवाई जान

पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा की वरिष्ठ नेता उमा भारती ने एक बार फिर शराबबंदी को लेकर हुंकार भरी है। उन्होंने कहा, अगर अगले साल 15 जनवरी तक मध्य प्रदेश में शराबबंदी कानून लागू नहीं किया गया तो वह सड़कों पर आंदोलन करेंगी। दरअसल, शराब भले ही पुरुष पिए, मगर उससे सबसे ज्यादा प्रभावित महिलाएं ही होती हैं। यही वजह है कि देश में आजादी के आंदोलन से लेकर अब तक कई अवसरों पर महिलाओं ने ही शराब के खिलाफ मोर्चा खोला। आइए जानते हैं कि देश के किन-किन राज्यों में शराब पर पूरी तरह पाबंदी है।

वे राज्य जहां शराब बेचने और पीने दोनों पर है पूरी तरह पाबंदी
शराब के बेचने और उसे पीने पर पूरी तरह पाबंदी लगाने वाले राज्य बिहार, गुजरात, त्रिपुरा, मिजोरम, नगालैंड और मणिपुर के कुछ जिले हैं। वहीं केंद्रशासित प्रदेश लक्षद्वीप में भी शराबबंदी लागू है। झारखंड, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान, केरल और आंध्र प्रदेश से भी आए दिन शराब पर पूरी तरह पाबंदी की मांग को लेकर महिलाओं के धरने-प्रदर्शन की खबरें आती रहती हैं। आंध्र प्रदेश, केरल, तमिलनाडु और हरियाणा में पहले शराबबंदी लागू थी, मगर बाद में हटा दी गई।

चुनावों में भी उठता रहा है शराबबंदी का मुद्दा।
चुनावों में भी उठता रहा है शराबबंदी का मुद्दा।

शराबबंदी लागू करने में हिचकिचाते हैं राज्य, बड़ी कमाई है वजह
शराब की बिक्री राज्य का विषय है। ऐसे में राज्यों को ही इसके लिए कानून बनाना होगा। मगर, चूंकि शराब बेचने से होने वाली इनकम किसी भी राज्य की कमाई का बड़ा जरिया है, ऐसे में राज्य सरकारें शराबबंदी से कतराती हैं। बीते साल 24 मार्च को कोरोना वायरस के चलते लगे सख्त लॉकडाउन में जब शराब बेचने पर पाबंदी थी, उस वक्त महज 40 दिन में ही 30 हजार करोड़ के राजस्व का नुकसान हुआ था। इससे सरकार को हर दिन करीब 700 करोड़ रुपए की चपत लगी थी। वित्त वर्ष 2019-20 में कई राज्यों ने अपने बजट में शराब बिक्री से 1.70 लाख करोड़ रुपए राजस्व जुटाया था। यूपी, कनार्टक और उत्तराखंड जैसे राज्यों ने शराब की बिक्री से इतना टैक्स जुटाया जो उनके कुल जुटाए गए टैक्स रेवेन्यू का 20 फीसदी बैठता है।

जहरीली शराब से मौतोंं में कर्नाटक, एमपी, राजस्थान आगे
इस साल जनवरी में मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में जहरीली शराब पीने से 25 लोगों की मौत हो गई थी। वहीं, उत्तर प्रदेश में नवंबर 2020 से लेकर अभी तक पिछले 10 महीने में जहरीली शराब के 13 बड़े मामले सामने आए हैं। इनमें करीब 200 लोगों की जान जा चुकी है। इसमें हाल ही में अलीगढ़ शराबकांड भी शामिल है। नेशनल क्राइम रिकॉर्डस ब्यूरो की रिपोर्ट के मुताबिक, 2019 में देश में जहरीली शराब पीने के 1,141 मामले सामने आए, जिसमें 1,296 लोगों की जहरीली शराब पीने से मौत हुई थी। सबसे ज्यादा मौतें कर्नाटक (296), पंजाब (191), मध्य प्रदेश (190), छत्तीसगढ़ (115), झारखंड (115), असम (98) और राजस्थान (88) में हुईं।

16 करोड़ आबादी पीती है शराब, 5.7 करोड़ को लत
ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एम्स) दिल्ली की एक रिसर्च के मुताबिक, देश में 10 साल से लेकर 75 साल की उम्र तक की करीब 16 करोड़ आबादी शराब पीती है। इनमें से 5.7 करोड़ लोगों को शराब की लत है। वहीं, ज्यादातर राज्यों में शराब की लत छुड़ाने वाले सरकारी नशामुक्ति केंद्र एक या दो ही हैं।

घरेलू हिंसा और किसानों की खुदकुशी के पीछे भी शराब
महाराष्ट्र सरकार ने 2015 में किसानों की खुदकुशी के बारे में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को 2015 में पत्र लिखा था, जिसमें शराब की लत को इन आत्महत्याओं की एक वजह बताया गया था। शराब से तंग-तबाह होते परिवारों की इन राज्यों में बड़ी तादाद है। वहीं, हिंसा और झगड़े-फसाद की जड़ भी यही है। महिलाओं पर घर में होने वाले ज्यादातर अत्याचार की वजह भी शराब ही बताई गई।

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