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भविष्य पर भारी सिंगल यूज प्लास्टिक:सरकार की सख्ती और महिलाओं की जागरुकता का वार, खत्म करेगा प्लास्टिक के कचरे का अंबार

नई दिल्लीएक महीने पहलेलेखक: दीप्ति मिश्रा
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''ना जलेगा, ना पिघलेगा''...ये शब्द कहते हुए प्लास्टिक की खोज करने वाले बेल्जियम मूल के अमेरिकी वैज्ञानिक लियो बैकलैंड ने सोचा भी नहीं होगा कि भविष्य में उनका यह आविष्कार इतना घातक साबित हो सकता है, जिसके लिए दुनिया भर की सरकारों को अलग से कानून बनाने पड़ जाएंगे। प्लास्टिक जहां पर्यावरण को प्रदूषित और भूजल को दूषित कर रही है। वहीं जलीय जीवों की जान ले रही है। प्लास्टिक कचरे के पहाड़ बन गए हैं, जिनके आसपास रहने वालों का जीना मुहाल हो गया है। इस संकट से निपटने के लिए सरकार ने चरणबद्ध तरीके से प्लास्टिक से बने उत्पादों को प्रतिबंधित करने की योजना बनाई है। यहां जानें प्लास्टिक के विकल्प, इस संकट से निपटने में सरकार और महिलाओं की भूमिका...

दुनियाभर की सरकारें प्लास्टिक से परेशान है। भारत में हर साल 94.6 लाख टन प्लास्टिक का कचरा इकट्ठा हो जाता है। इसमें से 43 फीसदी सिंगल यूज प्लास्टिक (Single use plastic) होती है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर में हर साल 5 ट्रिलियन सिंगल यूज प्लास्टिक बैग की खपत होती है। अगर 5 ट्रिलियन प्लास्टिक बैग एक साथ बांधकर रख दिए जाएं, तो ये फ्रांस के आकार के दोगुने क्षेत्र को कवर कर लेंगे।

जानें कैसे हो गई प्लास्टिक से बेपनाह मोहब्बत?
प्लास्टिक पर हम इस कदर निर्भर हैं कि पीने के पानी की बोलत से लेकर लंच बॉक्स, दूध के पैकेट से लेकर सब्जी, फल, चाय-कॉफी, चिप्स, नमकीन और बिस्कुट तक के लिए यह हमारी दिनचर्या का हिस्सा बन गई है। प्लास्टिक पर हमारी निर्भरता इसलिए भी है कि इसे आसानी कहीं भी लाया-ले जाया जा सकता है। यह बाजार में मौजूद अन्य विकल्पों की तुलना में सस्ती, सुंदर और टिकाऊ है, जबकि इसके विकल्प जैसे कांच अथवा कागज के उत्पाद अब भी बेहद महंगे हैं और इन्हें लाने-ले जाने के लिए भी भारी मशक्कत करनी पड़ती है।

कोरोना में लगा प्लास्टिक कचरे का अंबार
कोरोना महामारी में फेस शील्ड, ग्लव्स और पीपीई किट समेत व अन्य प्लास्टिक उत्पादों का इस्तेमाल बेहद तेजी से बढ़ गया। अगर प्लास्टिक का इस्तेमाल इसी तरह जारी रहा, तो आगामी वक्त में प्लास्टिक ही अगली महामारी साबित हो सकती है। एनवायरमेंटल साइंस एंड टेक्नोलॉजी जनरल में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक, कोरोना महामारी में दुनिया में इतने प्लास्टिक मास्क और ग्लव्स बने, जिनसे पूरा स्विट्जरलैंड ढक सकता है। अगर हम पीपीई किट को छोड़ भी दें, तब भी हर महीने दुनिया भर में 129 अरब फेस मास्क और 65 अरब ग्लव्स इस्तेमाल हो रहे हैं।

मानव जीवन पर प्लास्टिक के दुष्प्रभाव
विशेषज्ञों के मुताबिक, हम सभी धड़ल्ले से प्लास्टिक का इस्तेमाल तो कर रहे हैं, लेकिन इसके दुष्प्रभावों से अनजान बने हुए हैं। प्लास्टिक के निर्माण में उपयोग होने वाले रसायन शरीर के लिए विषाक्त और हानिकारक हैं। प्लास्टिक के इस्तेमाल से सीसा, कैडमियम, बीपीए और पारा जैसे रसायन सीधे मानव शरीर के संपर्क में आते हैं। ये जहरीले पदार्थों से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी, जन्मजात विकलांगता, इम्यून सिस्टम और बच्चों का विकास प्रभावित करने के कारक बन सकते हैं।

एक्शन में सरकार, स्टॉ से लेकर इन उत्पादों पर लगेगी पाबंदी
केंद्र सरकार की एक समिति ने सिंगल यूज प्लास्टिक के उत्पादों की पहचान कर इन पर पाबंदी लगाने का प्रस्ताव तैयार किया है। पर्यावरण मंत्रालय (Ministry of Environment) ने अपने प्रस्ताव में कहा है कि जनवरी, 2022 से ईयरबड्स, स्टॉ, गुब्बारे, प्लास्टिक के झंडे, कैंडी स्टिक और पॉलीस्टाइरिन (थर्मोकोल) समेत छह वस्तुओं के निर्माण पर रोक लगाई जाएगी। वहीं जुलाई, 2022 से प्लेट, कप, गिलास और कटलरी समेत 13 उत्पादों के निर्माण और बिक्री पर रोक लगाई जाएगी। सरकार 240 माइक्रोन से कम प्लास्टिक के बैग पर अक्तूबर से पाबंदी लगाने की तैयारी में है। बता दें कि केंद्र सरकार ने 2 अक्तूबर, 2019 को देश को 2022 तक सिंगल यूज प्लास्टिक से मुक्त करने की घोषणा की थी।

पुरुषों से अधिक जागरूक हैं महिलाएं
एक सर्वे के मुताबिक, महिलाओं की तुलना में पुरुष अधिक प्लास्टिक बैग इस्तेमाल करते हैं। 15 फीसदी महिलाएं और 19 फीसदी पुरुष प्लास्टिक बैग का इस्तेमाल करते हैं। सर्वे के मुताबिक, 32 फीसदी लोगों ने माना कि वे ज्यादातर समय प्लास्टिक के बैग इस्तेमाल करते हैं, जबकि 17 फीसदी ने कहा कि वे प्लास्टिक बैग का इस्तेमाल नहीं करते हैं। वहीं 37 फीसदी लोगों ने कहा कि वे प्लास्टिक के बैग का इस्तेमाल कभी-कभी ही करते हैं।

ये हैं प्लास्टिक के विकल्प
सिंगल यूज प्लास्टिक के प्रमुख स्रोत हॉस्पिटल, फूड एंड बेवरेज इंडस्ट्री, यात्रा और पर्यटन, एफएमसीजी, ई-कॉमर्स रिटेल, निकोटिन इंडस्ट्री, अल्कोहल बेवरेज इंडस्ट्री हैं। इनके विकल्प के तौर पर ग्लास, मेटल, जूट, कपड़े, पेपर, बांस और पत्तियां समेत अन्य विकल्पों का इस्तेमाल किया जा सकता है।

कुछ विशेषज्ञों का कहना का सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाने से ज्यादा जरूरी है, इसके विकल्पों को प्रमोट करना। इसके दुष्प्रभावों के प्रति लोगों को जागरूक करना।

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