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पंजाब में मिशन 2022:अब महिला वोटरों के हाथ होगी सत्ता की चाबी, जानिए बीते विधानसभा चुनावों में क्या रहा है ट्रेंड

नई दिल्लीएक महीने पहलेलेखक: दिनेश मिश्र
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  • पंजाब में 93.75 लाख महिला और 1.05 करोड़ पुरुष वोटर, बीते चुनावों में वोटिंग में आगे रही हैं महिलाएं
  • महिला वोटर पार्टियों के लिए बेहद अहम, मुफ्त बस सेवा से लेकर हर महीने 2000 रुपए देने का अभी से वादा
  • महिलाओं को सरकारी नौकरियों में 50 फीसदी आरक्षण देने जैसे बड़े वादे भी किए गए हैं, फ्री बिजली का भी वादा

पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। इसके बाद पंचायत चुनाव भी होना है। इन दोनों ही चुनावों में कांग्रेस, भाजपा, अकाली दल, बसपा और आप समेत सभी पार्टियां अभी से ही वोटरों को लुभाने में लगी हैं। पार्टियों के एजेंडे में महिला वोटरों पर खास ध्यान रखा जा रहा है। दरअसल, बीते विधानसभा चुनावों का ट्रेंड देखें तो पंजाब के चुनावों में महिलाओं की भूमिका बढ़ रही है। महिलाओं के लिए अब हर पार्टियां अपने दरवाजे खोल रही हैं। हालांकि, पार्टियां महिलाओं को उम्मीदवार तो कम बना रही हैं, मगर महिलाओं और उनकी समस्याओं को प्रमुखता से अपने एजेंडे में शामिल कर रही हैं। आज हम पंजाब के चुनाव में महिला वोटरों के बढ़ते दखल को बता रहे हैं।

घर-बाहर दोनों जगहों का कामकाज संभालने में आगे हैं पंजाब की महिलाएं।
घर-बाहर दोनों जगहों का कामकाज संभालने में आगे हैं पंजाब की महिलाएं।

2012 और 2017 के चुनावों में वोटिंग टर्नआउट में महिलाएं आगे
2017 में हुए विधानसभा चुनाव में कुल वोट 77.3 फीसदी पड़े थे। पार्टियों ने भी महज 7 फीसदी यानी 81 महिलाओं को चुनावी मैदान में उतारा था, मगर 1,145 उम्मीदवारों की किस्मत लिखने में महिलाओं की भूमिका अहम रही थी। महिलाओं ने पुरुषों से ज्यादा वोट किया था। चुनावों के दौरान 78.14 फीसदी (93.75 लाख) महिला वोटरों ने अपना दम दिखाया था, जबकि पुरुष वोटर इस मामले में पीछे ही रहे। 76.69 फीसदी (80.54 लाख) पुरुष वोटर वोट देने के लिए घरों से बाहर निकले। जबकि राज्य में 93.75 लाख महिला और 1.05 करोड़ पुरुष वोटर हैं। वहीं, 2012 के विधानसभा चुनाव के दौरान भी 78 फीसदी पुरुषों के मुकाबले 79 फीसदी महिला वोटरों ने वोटिंग की थी।

पंचायत चुनावों में महिलाओं को मिला आरक्षण बड़ी वजह
हाल ही में पंजाब में हुई सियासी उठापटक के दौरान भी कांग्रेस किसी महिला के हाथ में राज्य की कमान सौंपना चाहती थी। पार्टी की वरिष्ठ नेता अंबिका सोनी का नाम आगे आया था। बताया जा रहा है कि अंबिका सोनी राज्य की बागडोर किसी सिख के हाथ में चाहती थीं। यही वजह है कि उन्होंने सीएम पद की रेस से खुद को बाहर कर लिया था। राजधानी कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. राजीव रंजन गिरि बताते हैं कि चुनावों में महिलाओं की बढ़ती भूमिका के पीछे पंचायत चुनाव में उन्हें मिला आरक्षण प्रमुख रूप से है। इसके अलावा, महिलाओं से जुड़े विकास कार्यक्रम, योजनाएं और खुद महिलाओं में अपने अधिकारों को लेकर बढ़ी जागरूकता है।

दिल्ली विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. राजीव रंजन गिरि।
दिल्ली विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. राजीव रंजन गिरि।

एनआरआई दामाद और नशाखोरी के चलते खराब हुई महिलाओं की हालत
राजीव गिरि बताते हैं कि पंजाब में नशाखोरी के चलते महिलाओं की हालत दयनीय हो गई। पुरुष तो नशाखोरी करते हैं और घरेलू हिंसा की शिकार बेचारी महिलाएं हो रही हैं। वे घर से लेकर बाहर तक का कामकाज संभाल रही हैं। वहीं, 1990 के बाद से पंजाब में एनआरआई दामाद का चलन भी तेजी से बढ़ा। कनाडा, ऑस्ट्रिया जाने की आस में पंजाब में बड़ी तादाद में लड़कियों की शादी खूब पैसे खर्च कर एनआरआई लड़कों से की जाने लगी, मगर इनमें से ज्यादातर लड़कियों की हालत बाद में खराब हो गई। क्योंकि ये लड़के या तो उन लड़कियों को छोड़ देते या फिर उनके साथ नौकरानी जैसा बर्ताव करते।

महिला वोटर कितनी अहम: मुफ्त बस सेवा से लेकर हर महीने 2000 देने का वादा
आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव, 2022 में पार्टियों के लिए महिलाएं कितनी अहम हो गई हैं, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कांग्रेस अभी से 18 सूत्रीय एजेंडा लेकर जनता के बीच है। इसमें महिलाओं को मुफ्त बस सेवा भी शामिल है। वहीं, आम आदमी पार्टी 300 यूनिट बिजली फ्री देने का ऐलान किया है। शिरोमणि अकाली दल ने भी 400 यूनिट बिजली फ्री देने का वादा किया है। अकाली दल ने नीले कार्ड धारक महिलाओं को 2000 रुपये प्रति महीना देने का ऐलान किया है। साथ ही महिलाओं को सरकारी नौकरियों में 50 फीसदी आरक्षण देने जैसे बड़े वादे भी किए हैं।