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कोरोना वैक्सीनेशन:एक दिन में 2.5 करोड़ टीके लगाकर बना वर्ल्ड रिकॉर्ड, जानिए कहां खड़ी हैं महिलाएं

नई दिल्लीएक महीने पहले
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वैक्सीनेशन में पीछे - Money Bhaskar
वैक्सीनेशन में पीछे

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर देशभर में कोरोना वैक्सीनेशन का वर्ल्ड रिकॉर्ड बना है। 17 सितंबर को पीएम मोदी के 71वें जन्मदिन पर शुक्रवार को एक दिन में 2.50 करोड़ से ज्यादा लोगों को कोरोना के टीके लगे। CoWIN पोर्टल के आंकड़ों के मुताबिक देर रात 12 बजे तक वैक्सीन की 2 करोड़ 50 लाख 10 हजार 390 डोज लगाई गई। लेकिन इसके बावजूद पुरुषों के मुकाबले महिलाएं वैक्सीनेशन में पीछे हैं।

दुनिया के किसी देश में एक दिन में भले ही सबसे ज्यादा वैक्सीनेशन का रिकॉर्ड भारत के नाम दर्ज हो गया है, लेकिन इसमें पुरुषों का अनुपात ज्यादा है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक अब तक 41.36 करोड़ पुरुषों को कोरोना की वैक्सीन लगी है। मगर महिलाएं इस मामले में पिछड़ गई हैं। अब तक 37.77 करोड़ महिलाओं को कोरोना की डोज लग चुकी हैं।

वैक्सीनेशन अब भी बड़ी चुनौती

केंद्र सरकार के प्रयास के बावजूद भारत में कोविड -19 टीकाकरण में जेंडर को लेकर अंतर बना हुआ है। जून के अंत में सभी वयस्कों के लिए टीकाकरण शुरू होने के लगभग दो महीने बाद कुल वैक्सीनेशन में महिलाओं की हिस्सेदारी 46% थी, यानी उनके टीकाकरण में केवल 1.5% की बढ़ोतरी देखी गई। जाहिर है कि महिलाओं के लिए वैक्सीनेशन अब भी बड़ी चुनौती है।

केंद्र सरकार ने भी जताई चिंता

एक रिपोर्ट के मुताबिक राज्य सरकार के साथ विभिन्न बैठकों में केंद्र महिलाओं में कम टीकाकरण के सवाल को उठा चुका है। राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) ने भी राज्यों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर महिलाओं में वैक्सीनेशन की रफ्तार बढ़ाने की अपील की है।

महिलाओं और पुरुषों में वैक्सीनेशन गैप
महिलाओं और पुरुषों में वैक्सीनेशन गैप

महिलाओं के वैक्सीनेशन बढ़ाने की मांग

एनसीडब्ल्यू महिलाओं और पुरुषों में वैक्सीनेशन के अंतर को चिंताजनक बताया था। महिला आयोग ने पिछले महीने कहा था कि महिलाओं में वैक्सीनेशन अनुपात को फौरी तौर पर बढ़ाने की जरूरत है। सभी राज्यों के स्वास्थ्य सचिवों को लिखे पत्र में कहा गया था कि जागरुकता पैदा करने की आवश्यकता है ताकि अधिक से अधिक महिलाओं को प्राथमिकता के आधार पर टीकाकरण किया जा सके। केंद्र सरकार का कहना था कि वैक्सीनेशन में जेंडर गैप कम उम्र की महिलाओं में ज्यादा देखने को मिल रहा है। सरकार ने माना है कि इसके पीछे सामाजिक रूढ़ियां जिम्मेदार हैं जहां महिलाओं के स्वास्थ्य को कम तरजीह दी जाती है। कई सामाजिक कार्यकर्ता भी इस मुद्दे पर चिंता जता चुके हैं।