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कामकाजी मांओं की दास्तां:बोलीं- 'पति वर्किंग है, तो भला पत्नी को काम करने की क्या जरूरत', अपनों से सुनने को मिलते हैं ताने

नई दिल्ली4 महीने पहले
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अक्सर माना जाता है कि कामकाजी महिलाएं अपना अधिकांश समय बच्चों से दूर ऑफिस में बिताती हैं। इसलिए, वे कभी अच्छी मां नहीं बन सकतीं। लेकिन कामकाजी मांओं के साथ बड़ा होना बच्चों के लिए फायदेमंद हो सकता है। उनकी बेटियां भी बेहतर नौकरी पाती हैं और उनके बेटे बड़े होने पर घर के कामों में ज्यादा हाथ बंटाते हैं। यह बात हॉर्वर्ड विश्वविद्यालय की रिसर्च में सामने आई है। स्टडी में पाया गया कि कामकाजी मांओं की परवरिश में लड़के बड़े होने पर अपने फैमिली मेंबर्स की ज्यादा परवाह करते हैं। ये बच्चे भी घरेलू मांओं संग पलने वाले बच्चों की तरह ही खुश रहते हैं।

शोधकर्ताओं ने यह भी साफ किया है कि रिसर्च केवल वर्किंग वुमन और उनके बच्चों की लाइफ पर ही आधारित थी। ऐसे में इसका मतलब यह नहीं है कि घर पर रहने वाली माओं के बच्चे कमतर हैं। अध्ययन के मुताबिक, पूरी दुनिया में ज्यादा से ज्यादा महिलाएं कामकाजी हो रही हैं, पर अब भी पुरुषों की घरेलू कामों में हाथ बांटने की रफ़्तार धीमी है।

वर्किंग मांओं के लिए उनके बच्चे पहली प्राथमिकता
फेमस ब्रांड फेमिना की 'ऑल अबाउट वीमन' नामक रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय वर्किंग मांओं के लिए उनके बच्चे पहली प्राथमिकता है। बिजी लाइफस्टाइल के बावजूद पेरेंट्स इस बात का ध्यान रखते हैं कि कोई एक अभिभावक बच्चों की निगरानी के लिए हमेशा अवेलेबल रहे। इस रिपोर्ट में यह बात भी सामने आई कि टाइम की कमी, बिजी शेड्यूल और थकान वाले डेली रूटीन के बावजूद वर्किंग महिलाएं अपनी हेल्थ से कोई समझौता नहीं करती हैं। वे खुदके और फैमिली की हेल्थ का बेहद ख्याल रखती हैं।

भारतीय वर्किंग मांओं के लिए उनके बच्चे पहली प्राथमिकता है।
भारतीय वर्किंग मांओं के लिए उनके बच्चे पहली प्राथमिकता है।

कई बार सुनने को मिलते हैं ताने
दिल्ली की आईटी कंपनी में कार्यरत सुमेधा चौहान बताती हैं कि जिस तरह से एक पुरुष अपना करिअर बनाने के लिए मेहनत करता है, उसी तरह एक लड़की भी उतनी ही मेहनत करती है। फिर भी एक महिला से ही जॉब छोड़ने की उम्मीद की जाती है। पति वर्किंग है, तो भला पत्नी को काम करने की क्या जरूरत है? इस तरह के ताने भी दिए जाते हैं। लेकिन यह लोगों को समझाना आज भी काफी कठिन है कि एक महिला के लिए जॉब करना केवल पैसा कमाने की बात नहीं है। यह इंडिपेंडेंट बने रहने और अपनी पहचान बनाने की भी बात है।

राजस्थान की दीपाली जैन बताती हैं कि नौकरी के कारण मुझे अपने बच्चे को संभालने के लिए नैनी का सहारा लेना पड़ा। इससे मुझे अपने काम के साथ बच्चे को संभालने में काफी मदद मिली। लेकिन मेरे ही आसपास के लोग मुझे 'कोल्ड हार्ट पर्सन' समझने लगे। कुछ अपने ही रिश्तेदार कहते थे कि न जाने कैसे अपने बच्चे से दूर रह लेती हो, मुझसे तो ये कभी न होगा'। इस तरह की बातों से काफी गिल्टी भी महसूस हुआ। लेकिन अंदर ही अंदर मुझे मालूम था कि मैं अपनी फैमिली के लिए सब सही कर रही हूं।

वर्किंग वुमन के लिए घर और ऑफिस एक-साथ संभालना हमेशा से एक बहुत बड़ा चैलेंज।
वर्किंग वुमन के लिए घर और ऑफिस एक-साथ संभालना हमेशा से एक बहुत बड़ा चैलेंज।

घर-ऑफिस के काम में ऐसे बैठाएं तालमेल
दिल्ली में साइकोलॉजिस्ट योगिता कादियान बताती हैं कि वर्किंग वुमन के लिए घर और ऑफिस एक-साथ संभालना हमेशा से एक बहुत बड़ा चैलेंज रहा है। ऐसे में सही तालमेल बनाने व घर-ऑफिस को मैनेज करने के लिए इन बातों का ध्यान रखें।

  • पहले से ही अपनी दिनचर्या की प्लानिंग कर लें।
  • घर के काम और जिम्मेदारी को अपने पार्टनर के साथ बांट लें।
  • जो काम बहुत जरूरी हो उसे पहले करें।
  • अगर आपका बच्‍चा बहुत छोटा है तो अपने पार्टनर से मदद लें।
  • मामूली बातों को नजर-अंदाज करें।
  • खुद के लिए समय निकालना न भूलें।
  • बेवजह की चिंता-तनाव से दूर रहने की कोशिश करें।
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