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ईरान में हिजाब पर बवाल:महिला पत्रकार ओरियाना ने ईरानी धर्मगुरु खुमैनी के सामने उतार फेंका था हिजाब, अमेरिका-चीन के नेता भी डरने लगे थे

नई दिल्ली2 महीने पहले
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ईरान में इन दिनों महिलाएं सड़कों पर हिजाब जला रही हैं। यह विरोध तब शुरू हुआ जब 22 साल की एक लड़की को इस्लामिक पुलिस ने ठीक तरीके से हिजाब न पहनने के चलते हिरासत में लिया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक हिरासत में लड़की की पिटाई गई। सिर पर गंभीर चोट लगने के चलते लड़की की मौत हो गई, जिसके बाद ईरान की महिलाओं का गुस्सा भड़क गया।

बता दें कि 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद ईरान में सख्त सरिया कानून लागू किया गया। उससे पहले ईरान में महिलाओं को काफी आजादी थी।

अमेरिकी पत्रकार ने ईरानी राष्ट्रपति के सामने सिर ढंकने से इनकार कर दिया। पूरी दुनिया में उनके इस कदम की तारीफ हो रही है।
अमेरिकी पत्रकार ने ईरानी राष्ट्रपति के सामने सिर ढंकने से इनकार कर दिया। पूरी दुनिया में उनके इस कदम की तारीफ हो रही है।

महिला पत्रकार ने दिखाया साहस, ईरानी राष्ट्रपति के सामने सिर ढकने से किया इंकार

ईरान में मचे इस बवाल के बीच राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी संयुक्त राष्ट्र की बैठक में भाग लेने अमेरिका गए हुए हैं। वहां CNN न्यूज के साथ उनका इंटरव्यू होना था। लेकिन CNN की महिला पत्रकार क्रिस्टियन एमनपॉर को सिर ढंकने को कहा गया। क्रिस्टियन के इनकार करने पर ईरानी अधिकारियों ने इंटरव्यू कैंसिल कर दिया। पूरी दुनिया में क्रिस्टियन एमनपॉर के इस साहस की तारीफ हो रही है।

कभी एक महिला पत्रकार ने अयातोल्ला खुमैनी के सामने ही उतार फेंका था हिजाब

क्रिस्टियन एमनपॉर से पहले भी एक महिला पत्रकार हुई हैं, जिन्होंने ईरानी इस्लामिक क्रांति के अगुआ अयातोल्ला खुमैनी से सामने ही हिजाब उतार फेंका था। दुनिया के तमाम बड़े नेताओं और तानाशाहों से बेधड़क सवाल पूछने वाली ओरियाना फलाची दावा करती थीं कि वो भगवान को भी इंटरव्यू में सवालों से परेशान कर सकती हैं। ओरियाना फलाची का काम उनकी बातों की तस्दीक करती है। पत्रकार के रूप में उन्होंने बड़े नेताओं, तानाशाहों और जनरलों के सामने झुकने से इनकार कर दिया। देश की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से उनके निजी संबंध थे।

ओरियाना फलाची 1960 से लेकर 1980 के दशक की सबसे बड़ी पत्रकारों में गिनी जाती थीं। उन्होंने दुनिया भर में जंग, क्रांति और राजनीतिक घटनाक्रमों की रिपोर्टिंग की। बाद में उन्होंने कई किताबें भी लिखीं।

1979 में इटालियन पत्रकार ओरियाना फलाची ने खुमैनी के साथ इंटरव्यू के दौरान हिजाब उतार फेंका था।
1979 में इटालियन पत्रकार ओरियाना फलाची ने खुमैनी के साथ इंटरव्यू के दौरान हिजाब उतार फेंका था।

इटली में हुआ था जन्म, पिता के साथ मिलकर मुसोलिनी से लड़ीं

ओरियाना फलाची का जन्म इटली के फ्लोरेंस में 1929 को हुआ था। उस दौर में इटली पर फासिस्ट तानाशाह मुसोलिनी का राज था। ओरियाना के पिता पेशे के एक कारपेंटर थे। लेकिन बाद में फासिज्म के विरोध में क्रांतिकारी गतिविधियों मे हिस्सा लेने लगे। काफी कम उम्र में ही ओरियाना अपने पिता का साथ देने लगीं। दूसरे विश्व युद्ध के समय वो मुसोलिनी विरोधी क्रांतिकारियों के गुप्त संदेशों को एक जगह से दूसरे जगह पहुंचाती थीं। कई बार इन संदेशों के साथ हैंड ग्रेनेड जैसे हथियार भी होते थे। यहीं से ओरियाना ने पत्रकारिता में रूचि लेनी शुरू की।

सिनेमा के लोग परेशान हुए तो संपादकों ने नेताओं पर छोड़ा ‘गुरिल्ला जर्नलिस्ट’

2006 में ओरियाना की मौत के बाद ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ ने उन पर एक प्रोफाइल स्टोरी की। इसमें उनको एक ‘गुरिल्ला जर्नलिस्ट’ के तौर पर पोर्ट्रेट किया गया।

ओरियाना फलाची की गिनती दुनिया के सबसे निडर और बेबाक पत्रकारों में होती है। खास बात यह है कि जब उन्होंने पत्रकारिता शुरू की तब यह पूरी तरह से मर्दों का पेशा समझा जाता था। ओरियाना फलाची को भी शुरुआत में फिल्मों पर लिखने को कहा गया। ओरियाना एक बार मशहूर इटैलियन एक्ट्रेस जीना लोलोब्रिगिडा का इंटरव्यू लेने गई थीं। उन्होंने इंटरव्यू की शुरुआत इन शब्दों से की- ‘तुम मुझे उतनी भी बेवकूफ नहीं लगती, जितना लोग तुम्हें समझते हैं।’ ओरियाना अपनी बेबाकी से फिल्मी सेलिब्रिटीज को छकाने लगीं, जिसके बाद संपादकों ने अपनी इस ‘गुरिल्ला जर्नलिस्ट’ को आसानी के काबू में न आने वाले नेताओं के पीछे छोड़ दिया। बाद में ओरियाना फलाची अपने पत्रकारिता करियर को आगे बढ़ाने अमेरिका आ गईं।

ओरियाना फलाची ने दुनिया के तमाम बड़े नेताओं के इंटरव्यू लिए। उनके बेबाक सवालों से नेता डरा करते थे।
ओरियाना फलाची ने दुनिया के तमाम बड़े नेताओं के इंटरव्यू लिए। उनके बेबाक सवालों से नेता डरा करते थे।

ईरान के सबसे बड़े इमाम खुमैनी के सामने उतार फेंका हिजाब

1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद ईरान की सत्ता सर्वोच्च शिया धर्मगुरु अयातोल्ला खुमैनी के हाथ में आ गई। ओरियाना फलाची उनका इंटरव्यू लेने ईरान गईं। इंटरव्यू के पहले उनको अपने पूरे शरीर को ढंकने के लिए कहा गया। इमाम के घर में हो रहा ये इंटरव्यू आगे चलकर एक झगड़े में बदल गया। महिलाओं के प्रति इमाम की सोच से नाराज ओरियाना उनके सामने ही हिजाब को उतार फेंका और बोलीं- ‘मैं इस मध्ययुगीन कपड़े और सोच को बर्दाश्त नहीं कर सकती।’

ओरियाना फलाची ने युद्ध और राजनीतिक रिपोर्टिंग में बड़ा मुकाम हासिल किया था। बाद में उन्होंने कई किताबें भी लिखीं।
ओरियाना फलाची ने युद्ध और राजनीतिक रिपोर्टिंग में बड़ा मुकाम हासिल किया था। बाद में उन्होंने कई किताबें भी लिखीं।

तानाशाह गद्दाफी से बोलीं- पता है, लोग तुम्हें पंसद नहीं करते

ओरियाना फलाची की जीवनी ‘ओरियाना फलासी: द जर्नलिस्ट, द एजिटेटर, द लेजेंड’ में क्रिस्टीना डी स्टेफ़ानो ने कई रोचक घटनाओं का जिक्र किया है। लीबिया के क्रूर तानाशाह कर्नल मुहम्मद गद्दाफी का इंटरव्यू करते हुए उन्होंने बेबाकी से पूछा कि ‘क्या तुम्हें पता है, लोग तुम्हें पंसद नहीं करते और कई तो नफरत भी करते हैं।’ इसी तरह तत्कालीन अमेरिकी विदेश मंत्री हेनरी किसिंजर ने ओरियाना के साथ इंटरव्यू को अपने जीवन का सबसे डरावना इंटरव्यू बताया था।

लिखते वक्त कोई डिस्टर्ब न करे, इसलिए शादी नहीं की

ओरियाना ने शादी नहीं की। उन्हें बिलकुल पसंद नहीं था कि लिखते वक्त कोई उनके आस-पास मंडराए। जीवन के अंतिम दिनों में ओरियाना ने एक इंटरव्यू में बताया कि शादी करने के बाद वो अपने बच्चों और पति को अपने पास आने से नहीं रोक सकती थीं, इसीलिए उन्होंने शादी नहीं की।

इंदिरा गांधी को पंसद करती थीं नेताओं से बैर रखने वाली ओरियाना

ओरियाना ने दुनिया भर के तमाम बड़े नेताओं के साथ देश की पूर्व पीएम इंदिरा गांधी का भी इंटरव्यू लिया था। आमतौर पर नेताओं से सख्त लहजे में सवाल पूछ कर उनको असहज करने वाली ओरियाना इंदिरा गांधी को पंसद करती थीं।