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बिहार पंचायत चुनाव में ट्रेंड:मायके पहुंचकर चुनावी ताल ठोक रहीं महिलाएं, आधी से ज्यादा हैं महिला कैंडिडेट

पटनाएक महीने पहले
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पंचायत चुनाव में जलवा - Money Bhaskar
पंचायत चुनाव में जलवा
  • महिलाओं को उनके पिता की श्रेणी में ही मिलता है रिजर्वेशन
  • महिलाएं मायके आ कर रहीं हैं कास्ट सर्टिफिकेट का आवेदन
  • पंचायत चुनाव में नॉमिनेशन में पुरुषों से आगे निकली महिलाएं

बिहार में होने वाले पंचायत चुनाव में महिला कैंडिडेट में जबर्दस्त क्रेज देखने को मिल रहा है। पंचायत चुनाव में दो चरणों के लिए नामांकन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। तीसरे चरण का नामांकन चल रहा है। इन सभी चरणों में अब तक महिलाएं पुरुषों से आगे हैं। महिला कैंडिडेट में उत्साह इतना ज्यादा है कि महिलाएं मायके के अंचल कार्यालयों में भी पहुंचकर ऑनलाइन आवेदन कर रही हैं।

क्यों पकड़ रहीं मायके की राह?

असल में, बिहार सरकार के नियम के मुताबिक महिलाओं को उनके पिता की श्रेणी में ही रिजर्वेशन मिलता है। इसलिए महिला प्रत्याशी जाति प्रमाण पत्र के लिए अपने मायके पहुंचकर ऑनलाइन आवेदन कर रही हैं। पंचायत चुनाव में महिला उम्मीदवारों को पिता के नाम से जारी कास्ट सर्टिफिकेट ही नॉमिनेशन के समय दाखिल करना होता है। 2016 में भी यही व्यवस्था रही।

महिलाओं को मिलता है 50 फीसदी आरक्षण

बिहार में त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं को 50 फीसदी रिजर्वेशन दिया गया है। पंचायत चुनाव में महिलाओं की पुरुषों के मुकाबले ज्यादा भागीदारी की बड़ी वजह यही मानी जा रही है। हालांकि आरक्षित सीटों के अलावा सामान्य सीटों पर भी महिलाओं की अच्छी भागीदारी देखी जा रही है। ऐसे में केवल रिजर्वेशन को महिलाओं में पंचायत चुनाव को लेकर उत्साह की वजह नहीं माना जा सकता है। 2016 में हुए पंचायत चुनाव में करीब 60 फीसदी सीटों पर महिलाएं चुनकर आई थीं। इस बार भी भागीदारी को देखते हुए ऐसे ही नतीजों की उम्मीद की जा रही है।

नामांकन में महिलाएं पुरुषों से आगे
बिहार में पंचायत चुनाव को लेकर अधिसूचना जारी हो चुकी है। इस बार कुल 11 चरणों में वोटिंग होनी है। पहले चरण का मतदान 24 सितंबर को जबकि 11वें चरण के लिए 12 दिसंबर को वोटिंग होगी। पंचायत चुनाव में दो चरणों के लिए नामांकन प्रक्रिया खत्म हो गई है। तीसरे चरण के नामांकन जारी हैं। इन सभी चरणों में अबतक जो आंकड़े सामने आए हैं उसमें महिलाएं, पुरुषों से आगे हैं। हालांकि इसके पीछे महिलाओं को पंचायत चुनाव में मिला 50 फीसदी आरक्षण भी वजह है, लेकिन आरक्षण से परे महिलाओं में गांव की सरकार बनाने को लेकर जबर्दस्त उत्साह दिख रहा है।

बिहार पंचायत चुनाव में महिलाओं के लिए 50 फीसदी सीटें रिजर्व हैं।
बिहार पंचायत चुनाव में महिलाओं के लिए 50 फीसदी सीटें रिजर्व हैं।

पहले ही चरण से कायम किया दबदबा

बिहार में 2-8 सितंबर तक 10 जिलों की 159 पंचायतों में पहले चरण का नामांकन हुआ। इसमें 858 महिलाओं ने ज्यादा नामांकन किया। दूसरे चरण में 4057 महिलाओं ने ज्यादा नामांकन किया है। तीसरे चरण में नामांकन जारी हैं और अब तक 534 महिलाओं ने ज्यादा नॉमिनेशन किया है।

...तो इसलिए बढ़ी भागीदारी

पंचायत चुनाव में निर्धारित रिजर्वेशन से भी ज्यादा महिलाओं की भागीदारी पर पटना में रहने वाले वरिष्ठ पत्रकार रजनीश ने दिलचस्प तथ्य बताए। उनका कहना है कि बिहार में माइग्रेशन बहुत ज्यादा है। पुरुष रोजी-रोटी की तलाश में दूसरों राज्यों में काम कर रहे हैं। अधिकांश पुरुष पंजाब, महाराष्ट्र, दिल्ली, केरल जैसे राज्यों में काम कर रहे हैं। महिलाएं घर पर अकेली रहती हैं, सारी जिम्मेदारियां संभालती हैं, जिंदगी के फैसले खुद लेती हैं। कई बार उन्हें शरारती तत्वों, आस-पड़ोस के गुंडों से निपटना पड़ता है। कोई जमीन दखल कर रहा है तो उससे लड़ना पड़ता है। सरकारी महकमों में बाबुओं से उलझना पड़ता है। इस प्रक्रिया में उनमें लीडरशिप क्वालिटीज आ जाती हैं। उनमें सेल्फ कॉन्फिडेंस स्टैब्लिस हो जाता है। उनमें राजनीतिक चेतना विकसित होती है। यही वजह है कि पंचायत चुनाव में तयशुदा रिजर्वेशन से भी ज्यादा महिलाओं की भागीदारी हो रही है।

रजनीश कहते हैं, दूसरी वजह यह है कि कई आपराधिक चरित्र और राजनीतिक लोग हैं जो खराब छवि के चलते चुनाव नहीं लड़ सकते हैं। लेकिन ये लोग सियासी हित साधने के लिए परिवार की महिलाओं को मैदान में उतारते हैं।

तीसरा, कई पॉलिटिकल पार्टीज स्थानीय स्तर पर भी राजनीतिक रूप से पकड़ बनाए रखना चाहती हैं, लेकिन वे सैद्धांतिक तौर पर लोकल या पंचायत चुनावों में सामने नहीं आ सकती हैं। रजनीश का कहना है, कोई भी पार्टी महिलाओं के खिलाफ दिखने का जोखिम नहीं उठा सकती है। ऐसे में महिला उम्मीदवारों का सहारा लिया जाता है। कई स्थानीय विधायक हैं जो पंचायत चुनाव में दखल चाहते हैं लेकिन उनके लोगों की छवि अच्छी न होने से वे सीधे चुनाव में सामने नहीं आते। ऐसे में महिला उम्मीदवारों के जरिये पंचायत चुनाव को साधा जाता है।