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कहीं जहर तो नहीं खा रहे आप:त्योहारों पर फूड प्रोडक्ट खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान, इस तरह करें असली-नकली की पहचान

एक महीने पहलेलेखक: राधा तिवारी
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  • ऑनलाइन शॉपिंग के दौरान रहें सतर्क
  • रंग और टेक्सचर का रखें ध्यान
  • सेहत की सुरक्षा करें सुनिश्चित

त्योहारों के मौसम आते ही तेल, घी, मसाले और मावा खरीदने वाले ग्राहकों की संख्या बढ़ जाती है। वहीं, कुछ दुकानदार इसका फायदा उठाते हुए मिलावटी और नकली सामान बेच रहे हैं। हर जगह नकली और मिलावट वाले सामान की बिक्री करने वालों का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है। इस समय मावा, तेल, घी, मसाले आदि खाद्य पदार्थों में बड़े पैमाने पर मिलावट की जा रही है। इसका मतलब है कि अब आपको पैकेज्ड या खुले आइटम खरीदते समय अधिक सतर्क रहने की जरूरत है।

खाने के बाजार में मिलावटी सामान
खाने के बाजार में मिलावटी सामान

क्या कहते हैं अधिकारी ?
ASPA (Authentication Solution Providers Association) के अध्यक्ष नकुल पसरीचा का कहना है कि 2018 के बाद से देश में जालसाजी की घटनाओं में काफी वृद्धि हुई है। अध्ययनों के अनुसार, जालसाजी से भारतीय अर्थव्यवस्था में हर साल एक ट्रिलियन रुपये से अधिक का नुकसान होता है। जालसाजी की भयावहता आर्थिक गतिविधियों से परे है। नकली उत्पाद उपभोक्ताओं की भलाई को खतरे में डालते हैं और एक गंभीर सुरक्षा जोखिम पैदा करते हैं। जालसाज हमेशा फेस्टिवल में डिमांड के बढ़ने का फायदा उठाकर काफी मुनाफा कमाते है, और इसके अलावा भी जब डिमांड ज्यादा बढ़ती है तो नकली प्रोडक्ट की सप्लाई बढ़ जाती है।

ASPA के अध्यक्ष नकुल पसरीचा
ASPA के अध्यक्ष नकुल पसरीचा

नकुल पसरीचा ने बताया कि जालसाजी को कम करने में कंज्यूमर महत्वपूर्ण किरदार निभा सकते हैं। उन्हें विश्वसनीय स्थानों से खरीदना चाहिए और हमेशा बिल मांगना चाहिए। उन्हें हमेशा जांचने की ज़रूरत है कि क्या पैकेजिंग बरकरार है, अगर पैकेजिंग बरकरार नहीं है तो किसी उत्पाद को स्वीकार न करें। सीलबंद या डिब्बाबंद उत्पादों की सील हमेशा चेक करें। हमेशा डेट ऑफ मैन्युफैक्चरिंग, ,एक्सपायरी, प्रमाण चिह्न , एगमार्क ) प्रमाणीकरण समाधान (जैसे की होलोग्राम, टैम्पर सील) देख कर ही सामान खरीदें ।

खरीदने के बाद, उन्हें ब्रांडों द्वारा प्रदान की जाने वाली प्रमाणीकरण प्रक्रिया की तलाश करनी चाहिए और उसका पालन करना चाहिए। यदि कोई उपभोक्ता अनजाने में नकली खरीद लेता है, तो उसे ब्रांड या उपभोक्ता अधिकार फोरम को इसकी सूचना देनी चाहिए । उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं को जागरूक होकर ऐसी घटनाओं की अनुमति नहीं देना चाहिए, क्योंकि यह उन लोगों को प्रोत्साहित कर सकता है, जो गैरकानूनी काम करते हैं।

नकली प्रोडक्ट की पहचान संभव
खुला फूड प्रोडक्ट न खरीदें। सीलबंद या डिब्बाबंद उत्पादों की सील हमेशा चेक करें। हमेशा डेट ऑफ मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपायरी देख कर ही सामान खरीदें।प्रमाण चिह्न (एगमार्क, एफपीओ, हॉलमार्क) देखकर ही फूड प्रोडक्ट खरीदें। त्योहारों में दूध की मांग बहुत बढ़ जाती है और इसे पूरा करने के लिए शैम्पू, डिटर्जेंट, यूरिया और दूसरे खतरनाक केमिकल के मिश्रण से नकली दूध तैयार किया जाता है। इस तरह के खतरनाक केमिकल से लिवर खराब हो जाता है।

ऑथराइज्ड डीलर से ही सामान खरीदें
ऑथराइज्ड डीलर से सामान खरीदने पर आपको असली प्रोडक्ट मिलेगा। जब भी दुकान से सामान खरीदें, तो उसका बिल जरूर लें, ताकि अगर विक्रेता गलत सामान बेचता है तो आपके पास सामान खरीदने का सबूत हो। आप वो बिल दिखाकर उस डीलर के खिलाफ शिकायत दर्ज करवा सकें।

गलत वेबसाइट से सावधान रहें
त्योहारों के समय ऑनलाइन वेबसाइट कई तरह के लुभावने और आकर्षक ऑफर देते हैं। जिसकी वजह से ऑनलाइन खरीदारी करते समय आकर्षक कीमतों और छूट के झांसे में लोग आ जाते हैं। कुछ भी खरीदने से पहले वेबसाइट की जांच-परख करके पहले यह सुनिश्चित करें कि यह असली और भरोसेमंद है। कई ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट है, जो लुभावने ऑफर देकर कई बार नकली समान बेचती हैं। उनसे सावधान रहें।

न्यूट्रिशन और क्वालिटी की जांच करें
सामान खरीदते समय उसपर लगे लेबल को ध्यान से पढ़ें. न्यूट्रिशन का लेबल नकली और असली सामग्री के बीच अंतर करने में मदद करता है।नकली सामग्री में आमतौर पर ऐसे कम्पोनेंट लिखे जाते हैं जो वास्तव में मूल सप्लीमेंट में मौजूद नहीं होते। इसलिए पोषण सप्लीमेंट के बारे में जानकारी रखें कि इनमें कौन-से कॉम्पोनेंट का उपयोग किया जाता है। उपभोक्ता मंत्रालय एवं एफएसएसएआई द्वारा ‘स्मार्ट कंज्यूमर ऐप’ भी डाउनलोड कर सकते हैं। इससे पैकेट के खाद्य पदार्थ के बारे में सही जानकारी पाने में मदद मिलेगी।

गलत वेबसाइट से सावधान रहें
गलत वेबसाइट से सावधान रहें

पैकेजिंग पर ध्यान दें
फूड प्रोडक्ट्स के पैकेट खरीदते समय हमेशा पैकेजिंग पर ध्यान दें। कई बार ज्यादा डिमांड या फेस्टिवल के मौकों पर जालसाज पैकिंग के लिए मिलती-जुलती कॉपी बनाते हैं, जो एकदम असली पैकिंग जैसी नहीं होती। लोगो, आकार, रंग और कई बार लिखावट में अंतर होता है। ज्यादातर फूड प्रोडक्ट्स पर जालसाजी से बचने के लिए तरीके भी बताए जाते हैं।

जैसे सिक्योरिटी होलोग्राम, खास पैकेजिंग फीचर, एसएमएस वेरिफिकेशन, क्यूआर कोड या स्क्रैच कोड और उत्पाद के असली होने की पहचान के लिए निर्देश भी दिए जाते हैं।उदाहरण के लिए घी के ब्रांड पर कंपनियां असली प्रोडक्ट की पहचान के लिए बाहरी पैकिंग पर सिक्योरिटी होलोग्राम/ पैकेजिंग या क्यूआर कोड देते हैं। उनकी जांच करें, निर्देशों के अनुसार सर्टिफिकेशन प्रोसेस के आधार पर प्रोडक्ट वेरिफिकेशन करें। नकली पाए जाने पर इसकी शिकायत करें। कई बार लेबल के साथ छेड़छाड़ की जाती है ऐसा लगने पर प्रोडक्ट न खरीदें।

प्रोडक्ट्स खरीदते समय हमेशा पैकेजिंग पर ध्यान दें
प्रोडक्ट्स खरीदते समय हमेशा पैकेजिंग पर ध्यान दें

डेट ऑफ मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपायरी जरूर देखें
कोई भी फूड प्रोडक्ट खरीदते समय इस बात का ध्यान रखें कि वह प्रोडक्ट ज्यादा पुराना या एक्सपायर्ड न हो।अगर ऐसा लगता है कि प्रोडक्ट के डेट में कोई भी बदलाव किया गया है तो हो सकता है कि यह रिसायकल किया गया सामान हो, जिसके उपयोग से आपको कई तरह की बीमारियां हो सकती हैं।

डेट ऑफ मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपायरी जरूर देखें
डेट ऑफ मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपायरी जरूर देखें

उपयोग करते समय भी सावधानी
हमारी रोजाना खाने-पीने की बहुत सी चीजों में मिलावट हो रही है। मिलावटी चीजें स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा रही हैं। ज्यादा पैसे कमाने के चक्कर में सामान में मिलावट का खेल चल रहा है।अगर प्रोडक्ट का रंग, खुशबू या बनावट में कोई अंतर लगे तो वह प्रोडक्ट नकली हो सकता है। जिम्मेदार प्रतिष्ठित ब्रांड जालसाजी से बचने के लिए कई जरूरी उपाय अपनाते हैं और उपभोक्ताओं को सर्टिफिकेशन प्रोसेस के बारे में जानकारी देते हैं ताकि उपभोक्ता अच्छी गुणवत्ता के उत्पाद खरीद सकें।

सेल के चक्कर में क्वालिटी से न करे समझौता
सेल के चक्कर में क्वालिटी से न करे समझौता

क्या कहते हैं डॉक्टर
गुरुग्राम पारस अस्पताल के वरिष्ठ सलाहकार डॉ संजय गुप्ता ने बताया कि मिलावटी भोजन खाने से कैंसर, इनफर्टिलिटी, ब्रेन डैमेज सहित अन्य गंभीर स्वास्थ्य समास्याएं हो सकती हैं। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) की एक रिपोर्ट के अनुसार, टेस्ट किए गए खाद्य उत्पादों में से लगभग पांचवां हिस्सा मिलावटी पाया गया। दशहरा हर्सोउल्लास का समय होता है, लेकिन हमे इस दौरान खाने पीने की चीजों को लेकर सावधानी बरतनी चाहिए। हम त्योहार से पहले बाजारों में बेची जा रही मिलावटी मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों के लेवल के बारे में लोगों को चेतावनी देते रहते हैं। जब दूध, मावा, पनीर, मिल्क केक, बर्फी, बताशा, गुलाब जामुन सहित मिठाइयों की बात आती है, तो बाजार में उपलब्ध इन चीज़ों में मिलावट की जाती है।

मिलावटी नमूने पूरी तरह से सिंथेटिक होते हैं जिनमें यूरिया, डिटर्जेंट, अरारोट पाउडर और रिफाइंड तेल जैसे केमिकल होते हैं। अधिकांश मिठाइयां बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला मैदा भी मिलावटी होता है। दशहरे पर सुखद अनुभव के लिए बाजार से खरीदे गए उत्पादों के बजाय घर का बना खाना खाना चाहिए। अगर आप बाजार से पैकेटबंद मिठाई खरीद रहे हैं, तो खरीदे गए खाद्य उत्पादों की एक्स्पायरी डेट ज़रूर चेक कर लें। मिठाइयाँ बहुत जल्दी खराब होती हैं, इसलिए सुनिश्चित करें कि आप ताजी बनी हुई मिठाई ही खरीदें। दशहरे के अगले दिन अपने आप को अच्छी तरह से हाइड्रेट करके और डाइट में अतिरिक्त फल और हरी सब्जियों को शामिल करके अपने शरीर को डिटॉक्स करें ताकि आपके पास अतिरिक्त कैलोरी की भरपाई हो सके।”

क्या करें जब फंस गए हों ऑनलाइन फ्रॉड में !
कई बार कई लुभावने ऑफर्स देकर गलत ऑर्डर डिलीवर किया जाता है। हम लुभावने ऑफर देखकर इनके बहकावे में आ जाते है।अगर आप भी कभी ऑनलाइन शॉपिंग बाजार के फ्रॉड में फंस जाते हैं तो इन ऑनलाइन वेबसाइट के खिलाफ कंपलेन दर्ज करवा सकते हैं।आप इस तरह के ऑनलाइन फ्रॉड के लिए कंज्यूमर कोर्ट में जा सकते हैं। इसकी सही जानकारी ऑनलाइन मिल जाएगी।

कंज्यूमर कोर्ट में दर्ज कराएं शिकायत
कंज्यूमर कोर्ट में दर्ज कराएं शिकायत

क्या इसपर कोई कानून है?
सुप्रीम कोर्ट के वकील निपुण सक्सेना का कहना है कि ग्राहकों की सुरक्षा और उनके अधिकारों को ध्यान में रखते हुए कई कानून बनाये गए हैं। कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट, 1986 इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी अमेंडमेंट एक्ट, 2008भारतीय रिज़र्व बैंक, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन आदि के द्वारा बनाये गए कई नियम और कानून भी इसमें आते हैं। यह सभी नियम और कानून प्रोडक्ट्स और सेवाओं को ध्यान में रखकर बनाये गए हैं।

सुप्रीम कोर्ट के वकील निपुण सक्सेना
सुप्रीम कोर्ट के वकील निपुण सक्सेना

आप अपनी शिकायत को कंज्यूमर कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर भी दर्ज कर सकते हैं, इसके अलावा अगर आप फोन पर ही शिकायत करना चाहते हैं तो आप कंज्यूमर कोर्ट के आधिकारिक टोल फ्री नंबर 1800-11-4000 पर कॉल करके भी अपनी शिकायत को दर्ज करवा सकते हैं। या इसके अलावा आप 14404 पर भी कॉल करके अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इन नंबरों पर आप 9:30 AM से 5:30 PM तक कॉल कर सकते हैं।

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