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आतंक के खिलाफ हल्ला बोल:तालिबान के खिलाफ दुनिया भर में सामने आने लगीं अफगानी महिलाएं, काबुल के बाद दिल्ली में भी प्रदर्शन

नई दिल्लीएक महीने पहले
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दिल्ली में प्रदर्शन करती महिलाएं - Money Bhaskar
दिल्ली में प्रदर्शन करती महिलाएं
  • दिल्ली में तालिबान और पाक के खिलाफ महिलाओं का प्रदर्शन
  • तालिबान से लड़ने वाले अहमद मसूद का महिलाओं ने किया समर्थन

तालिबान के खिलाफ दुनिया में कई जगहों पर महिलाओं का विरोध प्रदर्शन बढ़ता जा रहा है। अफगानिस्तान के काबुल, हेरात, मजार-ए-शरीफ के बाद अब दिल्ली में भी अफगानी महिलाएं तालिबान के खिलाफ सड़क पर उतरी हैं। इस प्रदर्शन में महिलाओं के साथ बच्चों ने भी हिस्सा लिया। इन्होंने तालिबान के साथ ही पाकिस्तान के खिलाफ भी नारे और पोस्टर्स से अपना गुस्सा जाहिर किया।

अफगानी महिलाओं का गुस्सा दिखा पोस्टर के नारों पर
इन प्रदर्शनकारियों ने पंजशीर में तालिबान से लोहा लेने वाले अहमद मसूद के प्रति अपना समर्थन जाहिर किया। दिल्ली में धरना देने वाले प्रदर्शनकारी अपने हाथों में तख्तियां लिए हुए थे, जिन पर तालिबान मुर्दाबाद, अफगानिस्तान में तालिबान की कोई जगह नहीं है, हम आजादी चाहते हैं, अफगानिस्तान जख्मी है, पाकिस्तान आतंकियों का पनाहगार है और पाकिस्तान पर बंदिश लगे जैसे नारे लिखे हुए थे।

महिलाओं के निशाने पर आईएसआई चीफ
अफगान महिलाओं ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के मुखिया फैज हामिद की फोटो लेकर प्रदर्शन किया। इन महिलाओं का कहना था कि पाकिस्तान एक आतंकी देश है, दहशतगर्द के लिए सुरक्षित पनाहगाह है। पाकिस्तान अफगानियों की हत्याएं करना बंद करे। दिल्ली में 24 अगस्त को भी अफगान महिलाओं ने प्रदर्शन किया था।

2 सितंबर से भड़की चिंगारी कई जगह फैली
असल में, तालिबान के खिलाफ अफगान महिलाओं का प्रदर्शन 2 सितंबर को हेरात प्रांत में शुरू हुआ जो काबुल और अफगानिस्तान के उत्तरी प्रांत मजार-ए-शरीफ तक फैल गया। काबुल में 4 सितंबर को करीब 100 महिलाएं राष्ट्रपति भवन के सामने एकत्रित हो गईं और झंडा-बैनर लेकर तालिबान के खिलाफ प्रदर्शन शुरू कर दिया। तालिबान सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारी महिलाओं के खिलाफ हिंसक एक्शन लिया और उन्हें सकड़ों पर पीटा। महिलाएं पुरुषों के समान अधिकार दिए जाने की मांग कर रही हैं।

वादे से मुकरा तालिबान, महिलाओं में असंतोष

तालिबान सरकार गठन में जगह न दिए जाने के बाद महिलाओं के प्रदर्शन और तेज हो गए हैं। अफगानिस्तान पर दोबारा काबिज होने के बाद तालिबान ने आश्वासन दिया था कि वो महिलाओं को समान अधिकार देगा। लेकिन कैबिनेट गठन में एक भी महिला को जगह नहीं मिली जिससे ये नाराजगी और बढ़ गई है।

सिर्फ हेल्थ सेक्टर में महिलाओं को मौका दे रहा तालिबान
दरअसल, तालिबान ने कहा था कि वे महिलाओं के अधिकारों के लिए प्रतिबद्ध हैं, और वे महिलाओं के पढ़ने या उनके नौकरी करने के खिलाफ नहीं हैं। लेकिन जब से तालिबान ने अफगानिस्तान का नियंत्रण हासिल किया है, उन्होंने सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र को छोड़कर सभी महिलाओं को सुरक्षा स्थिति में सुधार होने तक काम से दूर रहने के लिए कहा है।

पाकिस्तान से भी नाराज हैं अफगानी महिलाएं

अफगानिस्तान के नागरिक तालिबान की मदद करने को लेकर पाकिस्तान से खफा है। कहा जा रहा है कि पंजशीर घाटी में नॉर्दन एलायंस के खिलाफ जंग में पाकिस्तान ने तालिबान लड़ाकों की मदद की। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद अफगानिस्तान में पाकिस्तान के खिलाफ प्रदर्शन होने लगे हैं। पंजशीर में पाकिस्तान की मदद के खिलाफ काबुल में महिलाओं ने प्रदर्शन किया और पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाए। अफगानिस्तान की राजधानी काबुल की सड़कों पर उतरकर महिलाओं ने पाकिस्तान मुर्दाबाद, आजादी और सपोर्ट पंजशीर के नारे लगाए। अफगान नागरिकों ने पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद के विरोध में प्रदर्शन किया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रदर्शनकारी काबुल स्थित पाकिस्तान दूतावास भी पहुंचे जहां पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाए हैं। विरोध-प्रदर्शन कर रहे इन लोगों को तितर-बितर करने के लिए तालिबान ने हवाई फायरिंग भी की थी।