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पीरियड्स आने की उम्र में वैक्सीनेशन:15-17 का उम्र वालों को लग रहा टीका, लेट माहवारी या ज़्यादा हो रही ब्लीडिंग का क्या है कनेक्शन

नई दिल्ली4 महीने पहले
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कोरोना वायरस के इंफेक्शन से भले ही हर कोई न गुजरा हो लेकिन कोरोना महामारी ने हमारे शरीर को किसी न किसी तरीके से जरूर प्रभावित किया है। कोविड के बाद से कई महिलाएं यह शिकायत कर रही हैं कि उनके पीरियड्स देरी से आ रहे हैं। किसी को परेशानी है कि उन्हें ब्लीडिंग ही नहीं हो रही तो किसी को ज्यादा ब्लीडिंग और क्लॉटिंग की प्रॉब्लम सता रही है। इस बीच एक हैरान कर देने वाली स्टडी सामने आई है। अमेरिका के ओरेगन हेल्थ एंड साइंस यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने 358 महिलाओं के बीच सर्वे कर पाया कि कोरोना वैक्सीन लगने के बाद से महिलाओं के पीरियड्स लेट हुए हैं। हालांकि इसमें यह भी साफ किया गया है कि इसे लेकर महिलाओं को घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि यह सिर्फ कुछ ही दिन का बात है।

देशभर में इसी माह 15 से 17 आयु तक के युवाओं के लिए वैक्सीनेशन ड्राइव शुरू की गई है। ऐसे में भास्कर वुमन की टीम ने एक्सपर्ट से बात कर जाना कि वैक्सीनेशन टीनेजर्स के पीरियड्स साइकिल पर कितना असर डाल सकता है और इसे ठीक करने का सही तरीका क्या है।

घबराएं नहीं, सिर्फ कुछ दिन के लिए पीरियड्स लेट होने से नहीं बिगड़ती सेहत
अपोलो स्पैक्ट्रा हॉस्पिटल ग्रेटर नोएडा की गायनेकोलॉजिस्ट डॉ साधना जैसवाल बताती हैं कि कोरोना वायरस से इंफेक्ट होने के बाद कई केस ऐसे देखने को मिले जहां महिलाओं को कुछ दिन तक पीरियड्स की समस्या रही। ज्यादातर केस में लड़कियों को चार दिन से लेकर एक हफ्ते तक की देरी हुई। यह समस्या ज्यादा दिन नहीं रहती इसलिए इसमें कोई घबराने की बात नहीं है, क्योंकि यह समस्या सिर्फ कोरोना वायरस के साथ नहीं है। अगर कोई भी वायरस शरीर पर अटैक करता है तो कई बार इस तरह के बदलाव देखे जाते हैं, लेकिन यह किसी भी तरह से खतरनाक नहीं है। इससे लड़कियों की हेल्थ पर फर्क नहीं पड़ता।

डॉक्टर का यह भी मानना है कि अभी हम दुनियाभर में कोरोना के प्रभाव को ही स्टडी कर रहे हैं इसलिए ऐसे में यह कहना कि कोरोना वैक्सीनेशन से पीरियड साइकिल पर सीधा असर पड़ेगा यह सटीक नहीं होगा। न ही इसे अभी तक क्लीनिकली प्रूफ किया गया है। फिलहाल हम सिर्फ महिलाओं के पीरियड पैटर्न पर ही बात कर सकते हैं।

बेबी प्लानिंग करने वाली महिलाएं हुई सबसे ज्यादा परेशान
पीरियड्स में देरी होने के साथ ही कुछ महिलाओं में ओवर ब्लीडिंग और कम ब्लीडिंग की समस्या भी देखी गई है। इस तरह की शिकायत सबसे ज्यादा उन महिलाओं में देखी गई जो 23 से अधिक उम्र की हैं और बेबी प्लान कर रही हैं। गायनेकोलॉजिस्ट और फर्टिलिटी एक्सपर्ट के पास इस तरह की समस्या लेकर कई कपल्स पहुंचे। कपल्स को कंसीव करने में भी काफी समस्या आई है हालांकि इसके पीछे का कोई एक कारण नहीं है। कोरोना वायरस से प्रभावित हुए कपल्स की संख्या इनमें सबसे ज्यादा रही है।

कोरोना काल में सबसे ज्यादा पीसीओएस की बढ़ी समस्या
डॉक्टर्स का यह भी कहना है कि कोरोना महामारी के साय में रहते हुए दो साल बीत चुके हैं। इस बीच हमारी लाइफस्टाइल में भी काफी बदलाव आया हैं। इसी का असर अब बच्चों की जिंदगी पर भी पड़ने लगा है। डॉ साधना बताती हैं कि बीते एक साल में सबसे ज्यादा ऑनलाइन काउंसिलिंग के जरिए टीनएजर्स ने पीसीओएस की समस्या बताई है। पीसीओएस यानी पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम एक ऐसी हार्मोनल डिसओडर बीमारी है, जिसमें महिलाओं की मेंस्टुअल साइकिल बिगड़ जाती है। इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह वजन बढ़ना है। लॉकडाउन के कारण सभी लोग घर में कैद रहे और किसी भी तरह की फिजिकल एक्टिविटी नहीं हुई। सबसे ज्यादा टीनएजर्स ओवरवेट हुए हैं। इसलिए यह भी पीरियड्स देरी से आने के पीछे का सबसे बड़ा कारण है।

ध्यान लगाने और एक्सरसाइज करने से दूर होगी समस्या
लॉकडाउन में हम सब भले ही घर में कैद हो लेकिन खुद को फिजिकली और मेंटली फिट रखने से बॉडी की हर प्रॉब्लम को दूर कर सकते हैं। इसलिए सभी उम्र की महिलाएं खासकर की टीनएज लड़कियों को घर रहकर योग, एक्सरसाइज करने की जरूरत है। साथ ही मैडिटेशन के लिए भी कम से कम 10 से 15 मिनट अपने रूटीन से जरूर निकालें। इससे वह पीरियड्स की प्रॉब्लम और ओबेसिटी से दूर रहेंगी।

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