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महबूबा और मंगेतर की जासूसी करा रहे लड़के:सिगरेट पीती लड़की और गे लड़कों की टूटी हैं शादियां

2 महीने पहलेलेखक: निशा सिन्हा
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जरूरत बनती जा रही है जासूसी - Money Bhaskar
जरूरत बनती जा रही है जासूसी
  • डिटेक्टिव्स का मानना है कि शादियों पर लाखों रुपए फूंक दिए जाते हैं लेकिन बैकग्राउंड चेकिंग के नाम पर खर्च करने से बचते हैं पेरेंट्स।
  • बड़े शहरों की जरूरत बनती जा रही है प्री-वेडिंग बैकग्राउंड चेकिंग खासकर मैट्रिमोनिअल वेबसाइट से होनेवाली शादियों में

शादी के लिए लड़कों की लत-संगत की जासूसी की जाती थी। आज उलटा है, बहू बनाने के पहले लड़की के बारे में सब जान लेना चाहते हैं लड़केवाले।

मंगेतर का चक्कर
एक लड़के को मंगेतर पर शक था। मंगेतर ने घरवालों को मनाली जाने को बताया और घर से निकल गई। जासूसी शुरू हुई। पता चला कि एक सहेली के साथ वह दिल्ली आ गई। पहाड़गंज के होटल में कमरा बुक कराया। कुछ देर बाद वहां दो लड़के आएं। लड़कों ने भी एक कमरा बुक कराया। फिर दोनों लड़कियां एक-एक लड़के के साथ अलग-अलग कमरों में चली गई। डिटेक्टिव एजेंसी ने तुरंत ही लड़के वाले को होटल में बुलाया। लड़की पर शक सही साबित हुआ।

शक होने पर बॉयफ्रेंड भी जासूसी कराने से नहीं चूकता
शक होने पर बॉयफ्रेंड भी जासूसी कराने से नहीं चूकता

लड़का निकला झूठा नंबर वन
एक लड़की ने जब लड़के की तफ्तीश कराई, तो पता चला कि उसके बायोडाटा में लिखी हर बात झूठी थी। कार, पैसा, नौकरी, घर, सैलरी सब झूठ निकली। उसके साथ शादी के सपने संजो रही उस लड़की का दिल टूट गया। वह फूट फूट कर रोने लगी।

शक के 90 प्रतिशत मामले निकलते हैं सही
शक के 90 प्रतिशत मामले निकलते हैं सही

'गे' मंगेतर पकड़ा गया
एक लड़की अपने पेरेंट्स के मना करने के बावजूद डिटेक्टिव के पास गई। शादी नजदीक आते उसका मंगेतर कटा कटा रहने लगा था। वह न लड़की से मिलता न फोन पर बातें करता। इन्वेस्टिगेशन के बाद पता चला कि उसका चक्कर अपने ही दोस्त के साथ है। जासूसों ने कार में दोनों के सेक्स करने की पिक्चर ली। क्लाइंट का शक सही निकला।

होमोसेक्सुअलिटी का एंगल भी
होमोसेक्सुअलिटी का एंगल भी

लिव-इन वाला लड़का पकड़ा गया
लड़की के परिवार ने शादी के पहले लड़के की बैकग्राउंड चेकिंग करायी। लड़का लिव इन में रहता था। एक दिन तो उसने लिव इन पार्टनर को फ्लैट सेभगा दिया। पर दूसरी बार तहकीकात के दौरान दोनों फ्लैट में रंगे हाथ पकड़े गए।

दुल्हनें भी बना रही बेवकूफ
दुल्हनें भी बना रही बेवकूफ

लुटेरी दुल्हन का मामला
एक मामले में इन्वेस्टिगेशन के बाद यह पता चला कि लड़की मैट्रीमोनी के जरिए शादी करती और साल भर बाद लड़के के सारे पैसे ले कर चंपत हो जाती। वह कई बार पहले भी ऐसा कर चुकी थी। ऐसे में उसका नया शिकार बच गया।

मेहनत ओर जोखिम से भरा काम है जासूसी
मेहनत ओर जोखिम से भरा काम है जासूसी

जासूसी की तकनीक का लेखाजोखा
स्लियूथ्स इंडिया कंसल्टेंसी प्रा. लि. के एमडी नमन जैन बताते हैं कि बैकग्राउंड चेक कराना बड़ी जरूरत बन गई है। आज होमटाउन, स्कूलिंग, जॉब की जगह अलग अलग हो गई है। ऐसे में आज के समय में केवल पड़ोस से सारी जानकारियां नहीं मिल पाती। नब्बे प्रतिशत मामलों में शक सही होता है। लड़का या लड़की को सुबह से रात तक सर्वेलांस पर रखते है।यह जरूर है कि कमरे के अंदर हम नहीं झांकते। वीडियो एविडेंस बहुत जरूरी होता है। जासूसी के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले कमरे बहुत पायवरफुल होते हैं।

सुबक-सुबक कर राेते हैं क्लाइंट
हैटफील्ड इन्वेस्टिगेशन एंड कंसल्टिंग के एमडी अजित सिंह बताते हैं कि कई बार हकीकत में छोटी बातें पता चलने पर क्लाइंट रिश्ते तोड़ देते हैं। एक लड़की का रिश्ता टूट गया क्योंकि इन्वेस्टिगेशन के बाद पता चला कि लड़की ऑफिस जाने के पहले और ऑफिस से निकलने के बाद पनवाड़ी की दुकान से सिगरेट लेकर सुट्टे लगती है। ऐसे में एजेंसी की तरफ से लड़के वाले को समझाया गया कि मेट्रो सिटीज की लड़कियों में ड्रिंकिंग और स्मोकिंग कॉमन हो गया है। फिर भी रिश्ता टूट गया। लेकिन रिश्ता बचाने के लिए हम इमोशनल हो कर झूठ नहीं बोलते। कई बार सच जानने के बाद क्लाइंट का दिल इतना टूट जाता है कि वे ऑफिस में ही फूट-फूट कर रोने लगते हैं। अजित सिंह कहते हैं कि कई बार ऐसा होने पर उन्होंने ऑफिस के टेबल पर पेपर नैपकिन का डिब्बा ही रख दिया है।

हर पहलू पर होती है बारीकी से जांच
हर पहलू पर होती है बारीकी से जांच

जासूसी का कारोबार बन गई है जरूरत
एएमएक्स डिटेक्टिव्स प्रा. लि. के फाउंडर बलदेव कुमार पुरी के अनुसार 1986 के आसपास प्री-वेडिंग बैकग्राउंड चेकिंग के 70% केसेज में लड़की वाले लड़के के बारे में जानना चाहते थे। लड़कों के मामले में पता किया जाता था कि बायोडाटा में लिखी हुई सैलरी सही है या नहीं। लड़के का कोई क्रिमिनल बैकग्राउंड तो नहीं रहा है। उसके परिवार की समाजिक स्थिति क्या है। आज सिस्टम चेंज हो गया है। आज लड़के वाले लड़की वालों के बारे में जानना चाहते हैं। इसकी बड़ी वजह है कि कई कानून ने लड़की की स्थिति को मजबूत किया है। लड़के का परिवार डरता है कि कोई गलत लड़की बहू बनने के बाद उनके परिवार को बेवजह न फंसा दें।

बढ़ रही है बैकग्राउंड चेकिंग की मांग
बढ़ रही है बैकग्राउंड चेकिंग की मांग

शादी बचाने की मुहिम है जासूसी
भारत डिटेक्टिव्स प्रा. लि. के एमडी सुनील कुमार सिंह के अनुसार कुछ लोग शादी के बाद भी विवाह पूर्व के रिश्तों को जारी रखते हैं। ऐसी शादियां डायवोर्स तक पहुंच जाती है। उनके बच्चों पर बुरा असर पड़ता है। इसलिए बैकग्राउंड चेकिंग जरूरी है। जासूसी शब्द नेगेटिव लगता है, लेकिन इसमें पॉजिटिव पहलू छिपा है। कमजोर नींव पर होने वाली शादियां टूटने से अच्छा है कि लड़का-लड़की और इनके परिवार के मन में किसी तरह का कोई संदेह नहीं होता।

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