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कोई आपको भी कहेगा मम्मा:बच्चे की किलकारी से गूंज उठेगा घर, इन योगासनों से मां बनने की राह होगी आसान

4 महीने पहलेलेखक: श्वेता कुमारी
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करिअर में किसी मुकाम पर पहुंचने के बाद ले या उसके पहले। मातृत्व का सुखद अनुभव हर महिला का ध्यान अपनी ओर खींचता है। व्यक्ति की जिंदगी में जैसे-जैसे सुविधाएं बढ़ती गई हैं, वैसे-वैसे ही उसकी शारीरिक चुनौतियों का ग्राफ भी ऊपर की ओर उठने लगा है। इसका असर मां बनने की क्षमता पर भी पड़ा है। इससे निपटने के लिए कैसे योग कारगार साबित हो सकता है, बता रही हैं दीवा योग की सीनियर इंस्ट्रक्टर स्नेहा शर्मा।

मां बनना मुश्किल क्यों हो गया है?

स्नेहा कहती हैं कि आज महिलाओं में हर तरह का चैलेंज लेने का जज्बा उभरा है, चाहे वह घर से जुड़ा हो या बाहर के कामों से। प्रेशर और रेस में आगे निकलने की चाहत ने महिलाओं के शारीरिक स्वास्थ्य को प्रभावित किया है। इसकी वजह से वे न सिर्फ थाइरॉयड, पीसीओडी जैसी परेशानियों से जूझती हैं, बल्कि मानसिक तनाव के बोझ से हर दिन दो-चार होती हैं। इन समस्याओं की वजह से उनके फर्टिलिटी रेट में भी कमी देखी जाती है। यानी मां बनने की राह अब पहले जैसी आसान नहीं रही।

क्या योग मां बनने की राह आसान करेगा?

स्नेहा कहती हैं कि योग के नियमित अभ्यास से महिलाएं मानसिक और शारीरिक तौर पर स्वास्थ रह सकती हैं। यह शरीर के मसल्स को मजबूत करता है। जब महिलाएं फर्टिलिटी बेहतर करने के लिए कुछ खास योगाभ्यास करती हैं, तो इससे उनके पेल्विक फ्लोर, ओवरी मसल्स, यूट्रस, हिप्स, एब्डोमिनल एरिया और जेनेटल ऑर्गन को मजबूती मिलती है। इसकी वजह से कंसीव करने की संभावना बढ़ जाती है। वे कहती हैं कि योग किसी तरह से इस बात की गारंटी नहीं देता है कि महिलाएं प्रेग्नेंट हो ही जाएंगी, लेकिन इसे जीवन में शामिल करने से हार्मोनल बैलेंस होता है, शरीर स्वास्थ और दिमाग शांत रहता है। इस वजह से महिलाओं में फर्टिलिटी रेट कि बढ़ोतरी देखी जाती है।

इन आसनों से बढ़ेगी मां बनने की उम्मीद

  • भुजंग आसन - फर्टिलिटी बढ़ाने के लिए इस आसन को अपना सकती हैं। अगर आप पीठ के दर्द, स्पाइन या गर्दन से जुड़ी परेशानी से गुजर रही हैं, तो इस आसन को न करें।
भुजंगासन।
भुजंगासन।
  • बद्धकोणासन - इस आसन को नियमित तौर पर करने से कंसीव करने की संभावना बढ़ती है। अगर घुटने, गर्दन या हिप्स में किसी तरह की चोट, दर्द या तकलीफ है, तो इस आसन को करने से बचें।
बद्धकोणासन।
बद्धकोणासन।
  • शशांक आसन - इस आसन को करते हुए फर्टिलिटी की उम्मीद तो बढ़ती ही है। साथ ही साथ पेट और कमर की चर्बी भी कम करने में मदद मिलती है। घुटनों की चोट या पेट में इन्फेक्शन हो तो इस आसन को न करें।
शशांक आसन
शशांक आसन
  • सेतुबन्धासन - इसे ब्रिज पोज भी कहा जाता है। यह आसन मां बनने की कोशिश को सार्थक तो करता ही है, साथ ही साथ स्ट्रेस रिलीज करने में भी मददगार साबित होता है। इसे करने के दौरान कंधे और गर्दन पर ज्यादा जोर आता है, इसलिए स्पॉन्डिलाइटिस जैसी समस्या से गुजरने वाले लोगों को ये आसन नहीं करना चाहिए।
सेतुबन्धासन।
सेतुबन्धासन।
  • उत्कट कोणासन - इस आसन को गॉडेस पोज भी कहा जाता है। इसके नियमित अभ्यास से शरीर के निचले हिस्से और घुटने मजबूत होते हैं। यह कंसीव करने में होने वाली परेशानी को दूर करता है। अगर घुटनों में दर्द, लो ब्लड प्रेशर की शिकायत है, तो ये आसन न करें।
उत्कट आसन।
उत्कट आसन।