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खतरनाक है खाना खाते समय टीवी देखना:बच्चों में टीवी देखते हुए खाना बन रहा ओबेसिटी का कारण, रिसर्च में किया गया दावा, जानें क्या है डॉक्टर की सलाह...

2 महीने पहलेलेखक: राधा तिवारी
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  • खाना खाते वक्त टीवी देखना है कितना खतरनाक ।
  • बच्चों में डिप्रेशन और चिड़चिड़ापन आदि लक्षण भी देखने को मिल रहे ।
  • आउटडोर गेम खेलने की आदत डालें।

इनवायरमेंटल जर्नल ऑफ हेल्थ नाम की प्रतिष्ठित मैगजीन में बच्चों की खाने की आदत पर एक रिसर्च आई है। दुनिया की कई बड़ी यूनिवर्सिटीज के साथ मिलकर हुई इस रिसर्च में पाया गया कि जो बच्चे टीवी, लैपटॉप या मोबाइल देखते हुए खाना खाते हैं, वो आगे चलकर भी खाने के मामले में नखरे करते हैं। इन बच्चों में छोटी-छोटी बात को लेकर एग्रेसिव होते हुए भी देखा गया है। ये भी देखा गया कि टीवी देखते हुए खाने वाले 10 साल तक के बच्चों में मोटापे की आशंका कई गुना बढ़ जाती है, जबकि परिवार के साथ बातचीत करते हुए लंच या डिनर करने वाले बच्चों में ओबेसिटी का खतरा कम होता है।

टीवी देखते हुए खाने वाले बच्चों में मोटापे की आशंका ज्यादा
टीवी देखते हुए खाने वाले बच्चों में मोटापे की आशंका ज्यादा

भारत में 10 से 12 % बच्चे मोटापे के शिकार

बायोमेड सेंट्रल जर्नल में प्रकाशित इस सर्वे में पिछले कुछ वर्षों में बच्चों में मोटापे की शिकायत बढ़ी है और बच्चों में बढ़ता मोटापा एक गंभीर समस्या के रूप में सामने आ रहा है। भारत में 10 से 12 प्रतिशत बच्चे मोटापे के शिकार हैं। वर्ष 2030 तक देश के लगभग आधे बच्चे इस बीमारी की चपेट में आ सकते हैं। हाल में किए गए सर्वे के अनुसार पिछले 50 सालों में भारतीय बच्चों में तेल पदार्थों का सेवन 20 प्रतिशत बढ़ा है। कैंडी, चॉकलेट, पिज़्ज़ा, फ्रेंच फ्राइज़ और स्वीट्स खाने वाले बच्चों में 11 से 20 वर्ष के बच्चों की संख्या लगभग 80 प्रतिशत बताई जा रही है।

भारत में 10 से 12 % बच्चे मोटापे के शिकार
भारत में 10 से 12 % बच्चे मोटापे के शिकार

WHO की चेतावनी

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन यानी WHO ने हाल ही में एक रिपोर्ट जारी किया, जिसमें 5 साल से कम उम्र के बच्चों का स्क्रीन टाइम निर्धारित कर दिया है। 5 साल से कम उम्र के बच्चों का निर्धारित समय से ज्यादा स्क्रीन टाइम उनके शारीरिक और मानसिक विकास पर सीधा असर डालता है। इस रिपोर्ट में WHO ने बच्चों को मोबाइल फोन, टीवी स्क्रीन, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से दूर रखने की हिदायत दी है।

5 साल से कम उम्र के बच्चों का स्क्रीन टाइम फिक्स
5 साल से कम उम्र के बच्चों का स्क्रीन टाइम फिक्स

WHO की गाइडलाइन

1 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए : एक साल से कम उम्र के बच्चों के लिए जीरो स्क्रीन टाइम निर्धारित किया गया है।

1 से 2 साल के बच्चों के लिए : इस उम्र के बच्चों के लिए दिनभर में स्क्रीन टाइम 1 घंटे से ज्यादा नहीं होना चाहिए।

3 से 4 साल तक के बच्चों के लिए : 3 से 4 साल की उम्र के बच्चों के लिए भी दिनभर में ज्यादा से ज्यादा समय 1 घण्टा निर्धारित किया गया है।

खाना खाते समय टीवी देखने के नुकसान

  • खाते समय टीवी देखने से मेटाबॉलिज्म धीमा पड़ जाता है और शरीर में फैट जमा होने लगता है।
  • टीवी देखते हुए खाना खाने से सारा ध्यान टीवी में चल रहे प्रोग्राम पर होता है और उस वजह से यह ख्याल नहीं रहता कि कितना ज्यादा खा चुके हैं।
  • अधिकतर बच्चे जब टीवी देखते हैं तो उस समय वे जंक फ़ूड ही खाना पसंद करते है।
बच्चों में घर के बने खाने की आदत डालें
बच्चों में घर के बने खाने की आदत डालें
  • टीवी देखते समय डिनर या लंच करने बच्चे बहुत जल्दी मोटापे के शिकार हो जाते हैं। इसलिए अपनी इस आदत को बदलें और कोशिश करें कि आप पहले खाना खा लें और फिर उसके बाद आराम से टीवी देखें। अपने बच्चों में भी शुरू से ऐसी आदत डालें।
एक साथ खाने की आदत डालें
एक साथ खाने की आदत डालें

क्या कहते हैं डॉक्टर

पारस हॉस्पिटल के पीडियाट्रिशन मनीश मनन का कहना है कि 5 साल से कम उम्र के बच्चे को सही गलत में फर्क नहीं समझ आता। वे जो देखते हैं वही सीखते हैं। कई बार देखा गया है कि बच्चे कार्टून की तरह ही बोलने की कोशिश करते हैं। इस वजह से उन्हें बचपन में बोलने की प्रक्रिया भी देर से शुरू होती है। इन बच्चों को बड़े होने के बाद कम्युनिकेशन स्किल्स से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। जब बच्चे टीवी देखते हुए खाते रहते हैं तो उनका सारा ध्यान सिर्फ टीवी पर होता है और इससे उन्हें पता नहीं चल पाता है कि उन्होंने कितना खा लिया, जिससे उनमें मोटापा बढ़ता जाता है। इसके अलावा बच्चों में और भी कई तरह की बिमारियां देखने को मिलती हैं।

क्या कहते हैं मनोचिकित्सक

मनोचिकित्सक डॉक्टर बिंदा सिंह का कहना है कि कई पेरेंट्स ये शिकायत लेकर भी आते हैं कि बच्चे छोटी-छोटी बात पर चिल्लाने लगते हैं। अक्सर पेरेंट्स बच्चों को खाना खिलाने के लिए भी टीवी के सामने बैठा देते हैं या फिर फोन में कुछ न कुछ लगा कर दे देते हैं। ये बहुत ही गलत प्रेक्टिस है। ऐसे में बच्चों का ध्यान बंट जाता है और वे भूख से ज्यादा खाना खा लेते हैं। इस उम्र में बच्चों की इमेजिनेशन तेज होती है। इसलिए पहले लोग बच्चों को कहानियां सुनाया करते थे। लेकिन अब पेरेंट्स कहानियां सुनाने की बजाय बच्चों को फोन पकड़ा देते हैं।

बच्चों के साथ बिताएं समय
बच्चों के साथ बिताएं समय

क्या कहती हैं डायटीशियन

डायटीशियन रितु गिरि का कहना है कि बच्चे की डाइट में फल और सब्जियां शामिल करें। बच्चों को कलर काफी पसंद आते हैं। रंग बिरंगी सब्जियां बनाएं। बच्चों को दाल, हरी सब्जियां खाना चाहिए, जो उनकी सेहत के लिए फायदेमंद है। चिप्स, कुरकुरे, जंक फूड, चॉकलेट से बच्चों को दूर रखे। ये बच्चों के लिए बेहद नुकसानदायक हैं।

जंक फूड को कहें No
जंक फूड को कहें No

मोटापे का कारण

अनुवांशिक, बायोलॉजिकल, लाइफ़स्टाइल आदि कई कारण मोटापे के लिए ज़िम्मेदार हैं। आमतौर पर मोटापा उन बच्चों को होता है, जो शरीर की ज़रूरत से ज़्यादा कैलोरी खाते हैं। और वह किसी तरह का वर्कआउट नहीं करते।

बच्चों के साथ वर्कआउट करें
बच्चों के साथ वर्कआउट करें

फिजिकल एक्टिविटी की कमी : बच्चे आजकल अपना ज्यादा समय टीवी देखते हुए बिताते हैं। इस वजह से उन्हें फिजिकल मूवमेंट कम होता है। साथ ही टीवी देखते समय जंक फूड खाते हैं। इससे भी उनका वजन तेजी से बढ़ता है।

फिजिकल एक्टिविटी की कमी
फिजिकल एक्टिविटी की कमी

जंक फूड : खाने-पीने में पोषक आहार की जगह जंक फूड ने ले ली है। यानी स्वाद तो बढ़ा है, लेकिन पोषण गायब हो गया है। इसका नतीजा हमारी सेहत बिगड़ रही है और वज़न बढ़ रहा है।

हर दिन जंक फूड खाने वाले हो जाएं सावधान
हर दिन जंक फूड खाने वाले हो जाएं सावधान

मेडीकल कारण: एन्डोक्राइन या न्यूरोलॉजिकल बीमारी जैसी स्थितियां भी मोटापे का कारण बनती हैं। कुछ दवाइयों से भी मोटापा बढ़ता है।

दवाइयों से भी बढ़ता है मोटापा
दवाइयों से भी बढ़ता है मोटापा

अत्यधिक तनाव: माता-पिता में तलाक, झगड़े, परिवार में लड़ाई झगड़े वाली स्थिती भी इसके लिए जिम्मेदार होती हैं।

मोटापे से जुड़े खतरे: मोटापे के कारण कई तरह के कॉम्प्लिकेशन हो सकते हैं। जैसे-

डायबिटीज़ टाइप 1

छोटी उम्र में ही ब्लड प्रेशर के शिकार हो रहे हैं.

दिल की बीमारियां उन्हें घेरने लगी हैं.

मोटापे के लक्षण और असर

  • बहुत जल्दी थकना
  • नींद कम आना
  • ब्लड प्रेशर
  • डायबीटीज की आशंका
  • सांस लेने में तकलीफ
  • नींद संबंधी गड़बड़ी

इसके अलावा बच्चों में उत्साह की कमी, हीनभावना आदि समस्याएं भी देखने को मिलती हैं। उन बच्चों में डिप्रेशन और चिड़चिड़ापन आदि लक्षण भी देखने को मिलते हैं।

मोटापे को कैसे मैनेज करें?

  • वेट मैनेजमेंट प्रोग्राम शुरू करें।
  • बच्चे को स्किम मिल्क देने की आदत डालें। जिससे फैट कम होता है।
  • खान-पान की आदतों में बदलाव करें।
  • जंक और फास्ट फूड से बचें।
  • टीवी देखने की आदत को कम करें।
  • आउटडोर गेम खेलने की आदत डालें।
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