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जरा संभल कर:वे आर्टिफिशियल रंग जो आपको बना सकते हैं फूड डाई एलर्जी का शिकार, न्यूट्रीशनिस्ट से जानें बचने के उपाय

2 महीने पहले
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जैम, जैली, कैंडी, वाइन्स, फ्रोजन मीट और फिश, सॉफ्ट ड्रिंक्स, दही, आइसक्रीम, चिप्स, डिब्बाबंद फल और सब्जियां आदी को आपने कई तरह के रंगों में देखा होगा। घर में अगर हलवा या केक बनता है, तो उसमें अपनी पसंद के रंग मिला दिए जाते हैं। इन आर्टिफिशियल रंगों से बने खाने को फूड डाई कहते हैं। ये आर्टफिशियल रंग सेहत के लिए नुकसानदायक भी साबित हो सकते हैं और फूड डाई एलर्जी का कारण बन सकते हैं। इसे फूड कलरिंग एलर्जी भी कहा जाता है। हालांकि, फूड कलिरंग एलर्जी बहुत कम देखने को मिलती है।

इस तरह के मीठे में भी होते हैं आर्टिफिशियल रंग
इस तरह के मीठे में भी होते हैं आर्टिफिशियल रंग

नमामी लाइफ में न्युट्रीशनिस्ट शैली तोमर का कहना है कि फूड डाई केमिकल पदार्थ और सिंथेटिक रंग होते हैं जो प्रोसेस्ड फूड के रंग और स्वाद को बढ़ाते हैं। फूड डाई एलर्जी का शिकार बच्चे जल्दी होते हैं, क्योंकि ऐसे फूड को बच्चे पसंद करते हैं। किसी तरह का खाना खाने के बाद अगर आपको सिरदर्द, चेहरे पर सूजन, सांस लेने में दिक्कत और छाती में जकड़न महसूस हो रही है तो आप फूड कलरिंग से एलर्जिक हो सकते हैं।

फूड डाई से होने वाले नुकसान
डॉ. शैली तोमर का कहना है, आमतौर पर रेड 40, येलो 5, येलो 6, ब्लू 1 और ग्रीन 3 फूड डाई ज्यादा इस्तेमाल में लाई जाती है। फूड ऐंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) की तरफ से 36 फूड डाई एप्रुव्ड हैं, लेकिन इनमें से कुछ आर्टिफिशियल रंग जैसे रेड 3, येलो 5 और येलो 6 में कैंसर का कारण भी बनते हैं।

Image source-themomsco.com
Image source-themomsco.com

कुछ फूड डाई जैसे येलो 5 बच्चों में एलर्जी और स्किन रैशिज को जन्म दे सकती है। फूड डाई से इम्युनिटी कमजोर होती है और बच्चों को इंफेक्शन के ज्यादा प्रोन बनाती है। बच्चों में हाइपरएक्टिविटी और गुस्से को बढ़ाती है, जिस वजह से उन्हें एटेंशन डिफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर (ADHD) हो जाता है। यह डिसऑर्डर बच्चे के दिमाग को प्रभावित करता है। इस तरह का फूड खाने से मोटापा तेजी से बढ़ता है। लंबे समय तक ऐसे भोजन को खाने से बच्चों में डिप्रेशन का रिस्क भी बढ़ा देती है।

उपाय क्या है?
फूड सेफ्टी ऐंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के मुताबिक वे पैकेज्ड फूड्स जिनमें फूड डाई होती हैं, उन पर “contains permitted synthetic food colours” लिखना जरूरी है। इस हिसाब से उपभोक्ता खुद ही तय कर सकता है, उसे वह पैकेज खरीदना है या नहीं। कुछ पैकेज्ड फूड्स पर नेचुरल फूड डाई के बारे में भी लिखा होता है जैसे पपरिका (E160c), E100 (हल्दी से बना रंग), E150a-d (कैरामेलाइज्ड शुगर से बना रंग) आप घर में भी नेचुरल फूड कलर बना सकते हैं। पीला केसर से, लाल चुकंदर से, पालक से हरा, कॉफी से ब्राऊन और स्ट्रोबेरी से गुलाबी रंग बना सकते हैं। घर पर बने ये रंग आपको उतने स्ट्रांग नहीं लगेंगे जितने आर्टिफिशियल से लेकिन हेल्थ के लिए सौ फीसद सुरक्षित होंगे।
खाने में दिखने वाले आर्टिफिशियल रंग कई बार सेहत के लिए नुकसानदायक साबित हो सकते हैं, इसलिए पैकेज्ड फूड को खरीदते समय उनका लेबल ध्यान से पढ़ लेना चाहिए।

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