पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Market Watch
  • SENSEX57107.15-2.87 %
  • NIFTY17026.45-2.91 %
  • GOLD(MCX 10 GM)481531.33 %
  • SILVER(MCX 1 KG)633740.45 %

प्रेग्नेंसी:इस दौरान हो सकते हैं ये 9 इंफेक्शन, बचकर रहने के लिए अपनाएं ये जरूरी टिप्स

एक महीने पहलेलेखक: श्वेता कुमारी
  • कॉपी लिंक

प्रेग्नेंसी के दौरान होने वाले किसी भी इंफेक्शन को इग्नोर ना करें। अगर प्रेग्नेंट महिला को हल्का बुखार महसूस हो तो तुरंत अपनी गायनाकोलॉजिस्ट से संपर्क करें। हाई फीवर या किसी तरह का भी इंफेक्शन आपके होने वाले बच्चे की सेहत पर असर डाल सकता है, ये कहना है गायनाकोलॉजिस्ट डॉ. प्रतिमा थमके का।

प्रेग्नेंसी महिलाओं के जीवन का एक ऐसा दौर है, जिसमें उन्हें ज्यादा सुरक्षित और सतर्क रहने की जरूरत होती है। साफ-सफाई और खाने-पीने में परहेज से प्रेग्नेंट महिला खुद को और अपने अजन्मे बच्चे को सुरक्षित रख सकती हैं। इस दौरान महिलाओं में किस तरह के इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है और वो खुद को कैसे उससे बचा सकती हैं, इस बारे में भास्कर वुमन ने बात की है गायनाकोलॉजिस्ट डॉ. प्रतिमा थमके से।

प्रेगनेंसी में इन इंफेक्शन से बचना है जरूरी

बैक्टीरियल वेजिनोसिस - रिप्रोडक्टिव एज में महिलाओं में ये समस्या आम है। इस इंफेक्शन में वेजाइना में बैक्टीरिया बढ़ जाते हैं। ये अनसेफ सेक्स, इनरवियर में हार्ड वॉशिंग पाउडर या साबुन के इस्तेमाल, डियोड्रेंट या डूशिंग (वेजाइनल वॉश) की वजह से हो सकता है।

ग्रुप बी स्‍ट्रेप्‍टोकोकस - ये बैक्टीरिया इंसान की आंतों में रहता है और लोगों को इससे कोई नुकसान नहीं पहुंचता, लेकिन प्रेग्नेंट महिलाओं को बचने की जरूरत है। प्रेग्नेंट महिला के वेजाइना में अगर ये बैक्टीरिया पहुंच गया, तो मुमकिन है कि ये नवजात को नुकसान पहुंचाए। कई मामलों में ये बच्चों की मौत या गंभीर बीमारी की वजह बन जाता है।

जीका वायरस इंफेक्शन - प्रेग्नेंट महिलाएं अगर जीका वायरस इंफेक्शन का शिकार होती हैं, तो इसका सीधा असर उनके बच्चे के मानसिक विकास पर पड़ सकता है। इस वजह से उन्हें प्रीटर्म लेबर भी हो सकता है। जीका से बचने के लिए फिलहाल कोई टीका नहीं है, केवल सावधानी ही एक मात्र उपाय है।

रुबेला वायरस इंफेक्शन - प्रेग्नेंसी की पहली तिमाही में महिलाओं को रूबेला इंफेक्शन होने का खतरा बना रहता है। इसकी वजह से मिसकैरेज, बच्चे में विकार या मौत तक हो सकती है। इसलिए आप अगर फैमिली प्लानिंग कर रही हैं, तो रूबेला वायरस का टीका कंसीव करने के पहले लगवा लें।

साइटोमेगालो वायरस इंफेक्‍शन - ये वायरस किस करने, खाने के बर्तन शेयर करने और सेक्सुअल कॉन्टेक्ट से भी फैल सकता है। प्रेग्नेंसी में महिलाओं को पता भी नहीं चलता कि उन्हें ऐसा कोई इंफेक्शन हुआ, क्योंकि इसके कोई सिम्टम नहीं होते, लेकिन इंफेक्शन महिला के फीटस यानी भ्रूण तक पहुंच सकता है, जो कि कई बार बच्चों में शारीरिक विकार की वजह बन सकता है।

गोनोरिया - ये सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिजीज है, जिसे वक्त पर ट्रीट न करने का अंजाम खतरनाक हो सकता है। प्रेग्नेंट महिलाएं इस वजह से मिसकैरेज, प्रीटर्म बर्थ या बच्चे के लो वेट बर्थ से जूझ सकती हैं।

जेनेटिक हर्पीज - ये भी सेक्सुअली ट्रांसमिट होने वाला इंफेक्शन है। अगर आप प्रेग्नेंसी की पहली तिमाही में इससे जूझ रही हैं, तो होने वाले बच्चे पर इसका प्रभाव पड़ने की गुंजाइश बेहद कम है, लेकिन आखिरी तिमाही में हर्पीज होने से बच्चे तक इस संक्रमण के पहुंचने का खतरा बना रहता है।

लिस्टीरिया- प्रेग्नेंट महिलाओं को लिस्टिरिया से बचने की जरूरत है। इन इंफेक्शन में प्रीटर्म लेबर, प्रेग्नेंसी लॉस, नवजात में जानलेवा बिमारियों की संभावना बनी रहती है। ये इंफेक्शन कंटेमिनेटेड खाना खाने या अनपाश्चराइज्ड दूध पीने से हो सकता है।

टोक्सोप्लास्मोसिस - ये इंफेक्शन ऐसे बैक्टीरिया की वजह से होता है, जो बिल्ली की पॉटी में पाया जाता है. प्रेग्नेंट महिलाओं को इस इंफेक्शन से बचने के लिए जानवर, खास तौर पर बिल्लियों से दूर रहने की जरूरत है, ताकि मां और बच्चा इसके गंभीर प्रभाव से बचे रह सकें.

ये उपाय बचाएंगे इंफेक्शन्स से

जानवरों से दूरी बनाकर रखें।

अपने डॉक्टर से जरूरी वैक्सीन की पूरी जानकारी लें।

खाने और रोज के रूटीन में हाइजीन का ध्यान रखें।

सेक्सुअली ट्रांसमिटेड इंफेक्शन का टेस्ट करवा लें।

ऐसे लोगों से दूर रहें, जिन्हें किसी भी तरह का इंफेक्शन है।

अनपाश्चराइज्ड मिल्क या इससे बनी चीजें खाने-पीने से परहेज करें।

अच्छी तरह पका हुआ खाना खाएं। अधपका खाना न खाएं।

खबरें और भी हैं...