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प्री-मेनोपॉज:29 साल की उम्र में भी हो सकता है मेनोपॉज, इससे निपटने के लिए युवा महिलाएं खुद को करें तैयार

एक महीने पहले
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  • सर्वे के मुताबिक करीब 4% महिलाओं को मेनोपॉज 29 से 34 साल की उम्र में हो रहा

आइए बात करते हैं मेनोपॉज की। ये एक ऐसा सब्जेक्ट है, जिस बारे में बात करने से हम सभी बचतें हैं। महिलाएं सोचती हैं, मेरे पास बहुत समय है। मुझे अभी इसके बारे में टेंशन लेने की जरूरत नहीं। लेकिन द इंस्टीट्यूट फॉर सोशल एंड इकोनॉमिक चेंज के सर्वे के मुताबिक करीब 4% महिलाओं को मेनोपॉज 29 से 34 साल की उम्र में हो रहा है। जबकि भारत में मेनोपॉज की औसत उम्र 48 से 50 साल है। लाइफस्टाइल में बदलाव के कारण 35 से 39 साल की महिलाओं का आंकड़ा 8% है। ऐसे में मेनोपॉज को समझना युवा महिलाओं के लिए बेहद जरुरी है।

बता दें, मेनोपॉज से हर स्त्री को गुजरना पड़ता हैं। अधिकतर महिलाओं को लगता है कि वे एक ऐसी उम्र में पहुंच जाएंगी, जहां उनके पीरियड्स आना बंद हो जाएंगे, लेकिन मेनोपॉज में हार्मोनल बदलाव के कारण कई लक्षण भी देखने को मिलते है। इनमें तेजी से वजन बढ़ना,नींद न आना, थकान, भूलने की बीमारी, बालों का झड़ना, वेजाइनल ड्राईनेस, स्ट्रेस, डिप्रेशन, चिड़चिड़ापन, ये लक्षण सबसे कॉमन है। शरीर में होने वाले ये बदलाव पर्सनल और वर्किंग लाइफ, दोनों पर असर डाल सकते हैं और इन्हें फेस करना हमारी सोच से कई गुना ज्यादा टफ हो सकता है। इसकी वजह सिर्फ ये भी है कि ज्यादातर महिलाओं को मेनोपॉज को लेकर बेहतर समझ नहीं है।

क्यों महिलाएं मेनोपॉज को लेकर चुप रहना करती है पसंद
मेनोपॉज को लेकर महिलाएं चुप रहना इसलिए भी पसंद करती है, क्योंकि ये शब्द समाज में बुढ़ापे की निशानी है। साल 2013 में एल्योर मैगजीन (Allure Magazine) ने दुनियाभर के दो हजार महिलाओं और पुरुषों पर सर्वे किया, जिसमें एजिंग, प्लास्टिक सर्जरी और उनकी फीलिंग से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रश्न पूछें। उदाहरण के लिए, उनसे पूछा गया कि वे भूरे बालों से कैसे जुड़े हैं। भूरे बालों वाली महिलाएं खुद को बूढ़ी मानती थीं, जबकि भूरे बालों वाले पुरुष ज्यादा कांफिडेंट दिखें। 84% पुरुषों और 91% महिलाओं ने ये माना कि स्त्री को युवा दिखने के लिए अधिक दबाव का सामना करना पड़ता है। वीमेन हेल्थ एक्सपर्ट की मानें तो महिलाओं के शरीर में मेनोपॉज में होने वाले बदलाव के दौरान कई समस्याओं से बचा जा सकता है यदि 30 की उम्र में ही इसकी तैयारी शुरू कर दें। नोएडा फोर्टिस अस्पताल की गायनाकोलॉजिस्ट डॉ. अंजना सिंह ने बताया कि आमतौर पर मेनोपॉज का 45 साल के बाद माना जाता है, लेकिन आजकल महिलाओं को प्री-मेनोपॉज यानी समय से पहले ही मेनोपॉज होने लगा है। इसकी वजह फेमिली हिस्ट्री, खराब लाइफस्टाइल, बीएमआई फैक्टर, मिर्गी भी हो सकती है। ऐसे में डायट में विटामिन और कैल्शियम भरपूर मात्रा में लें, जिससे हड्डियां की सेहत पर बुरा असर न पड़े। रोजाना एक्सरसाइज करें। किसी तरह की समस्या होने पर लापरवाही किए बिना डॉक्टर की सलाह जरुर लें, ताकि समस्या को बढ़ने से पहले संभाला जा सके।

युवा महिलाएं मेनोपॉज के लिए ऐसे करें खुद को तैयार

समय-समय पर अपने हार्मोन लेवल की जांच करवाएं- हार्मोन टेस्ट से शरीर में होने वाले बदलावों को जानने में मदद मिलती है। ऐसे में इसका रिकॉर्ड मेंटेन करना जरुरी है। अगर आपको लगता है कि समय से पहले आप मेनोपॉज से गुजर रही हैं, तो डॉक्टर से संपर्क कर जांच करवा लें। इसके लिए एस्ट्रोजन और एफएसएच टेस्ट करवाया जाता है।
मेनोपॉज के बारे में जानना शुरू करें- मेनोपॉज को लेकर कुछ नया जानने की कोशिश करें, जिस बारे में आपको अब तक जानकारी नहीं। नई रिसर्च देखें।
बुजुर्ग या 40 प्लस उम्र की महिलाओं से पूछें- भले ही मेनोपॉज को लेकर महिलाओं के लिए बात करना आसान नहीं, लेकिन उन्हें समझाएं कि क्यों आप उनके विचारों में रुचि रखती हैं। उनसे पूछें कि क्या उन्होंने मेनोपॉज शुरू हो गए है या वे इससे गुजर रही है? उनका कैसा अनुभव रहा है। किसी महिला का पॉजिटिव या नेगेटिव अनुभव अगली पीढ़ी के लिए फायदेमंद हो सकता है।
हेल्दी लाइफस्टाइल का अभ्यास करें- हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाने का अभ्यास पहले ही कर लें, ये आपके लिए काफी फायदेमंद होगा। इससे मेनोपॉज के दौर में हेल्दी लाइफ जीने में काफी मदद मिलेगी।

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