पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Market Watch
  • SENSEX57684.791.09 %
  • NIFTY17166.91.08 %
  • GOLD(MCX 10 GM)47590-0.92 %
  • SILVER(MCX 1 KG)61821-0.24 %

वर्ल्ड मेंटल हेल्थ डे 2021:मिलिए उन महिलाओं से जिन्होंने जीती मेंटल हेल्थ की लड़ाई

2 महीने पहलेलेखक: श्वेता कुमारी
  • कॉपी लिंक
  • डब्लूएचओ की रिपोर्ट के मुताबिक हार्ट डिजीज के बाद डिप्रेशन दुनिया में दूसरी सबसे बड़ी बीमारी है, जिसने लोगों की जिंदगी को प्रभावित किया है।

दुनिया को हैरान करने वाले वो दो उदाहरण, जो बताते हैं मेंटल हेल्थ कितना जरूरी है

19 बार की वर्ल्ड चैंपियन और चार ओपिक गोल्ड मेडल जीतने वाली अमेरिकन स्टार जिमनास्ट सिमोन बाइल्स ने टोक्यो ओलंपिक के कई फाइनल इवेंट्स से अपना नाम अपनी मेंटल हेल्थ की वजह से वापस ले लिया था। इससे ये साबित होता है कि मेंटल हेल्थ को विश्व स्तर पर कितनी अहमियत मिलती है।

वहीं जापान की दिग्गज टेनिस प्लेयर नाओमी ओसाका भी बीते दिनों चर्चा में रहीं, जब उन्होंने डिप्रेशन और एंग्जायटी के चलते फ्रेंच ओपन से अपना नाम वापस ले लिया। ये दो उदहारण काफी है इस बात को समझने के लिए कि करियर के शिखर पर होने से भी ज्यादा जरूरी है, हमारी जिंदगी में मेंटल पीस का होना।

मेंटल हेल्थ पर बात करने की जरूरत क्यों?

वर्ल्ड मेंटल हेल्थ डे की शुरुआत साल 1992 में शुरू हुई थी। हर बढ़ते साल के साथ, लोगों में मेंटल स्ट्रेस बढ़ता जा रहा है। भाग-दौड़ भरी जिंदगी में पीछे छूटने का डर और अपने आप को साबित न कर पाने की नेगेटिव सोच मेंटल हेल्थ पर बुरा प्रभाव डालती है। इस दिन को मनाने का उद्देश्य लोगों में मेंटल हेल्थ के प्रति जागरूकता लाना है।

एम्स के पूर्व असिस्टेंट प्रोफेसर और मौजूदा समय में बत्रा हॉस्पिटल मेडिकल एंड रिसर्च सेंटर के सीनियर कन्सल्टेंट साइकेट्रिस्ट ​​ डॉ धर्मेन्द्र सिंह ने अपने कुछ केस स्टडीज भास्कर वुमन से शेयर की है, साथ ही अपने उन पेशेंट्स की फैमिली से हमारी बात करवाई, जो कभी मेंटल इलनेस झेल रहे थे, लेकिन आज रिकवर होने के बाद नॉर्मल लाइफ जी रहे हैं।

केस स्टडी नंबर 1

75 वर्षीय सुदेश जग्गा की बहू सुजाता ने बताया कि उनकी मां को बीते 3 साल से मेंटल परेशानी हो रही थी। सुदेश को पैनिक अटैक की समस्या थी, जिसमें वे नहाने-खाने जैसी हर छोटी बात के लिए घबरा जातीं। कई बार वे काबू से बाहर हो जाती या फिर कोई भी काम लूप में करने लगती थीं। अगर नहा रही हैं, तो नहाती रहतीं, पानी पी रही हैं, तो बिना रुके पानी पीती रहतीं। शुरू में तो परिवार को समझ नहीं आया कि दिक्कत क्या है। कुछ एक डॉक्टर्स से मिलने के बाद पता चला कि वे मेंटल परेशानी से जूझ रही हैं। परिवार ने डॉक्टर से कंसल्ट किया। अब 100% में करीब 80% परेशनी दूर हो चुकी है, सही दवा और उचित काउंसलिंग से सुदेश आज पहले से काफी ठीक हैं।

केस स्टडी नंबर 2

दिल्ली की रश्मि बताती हैं कि करीब एक साल पहले उन्हें अचानक से परेशानी शुरू हुई। उन्हें हर किसी पर शक होता, सब गलत लगते और वो किसी पर विश्वास नहीं कर पा रही थीं। इस समस्या के बाद जब वो डॉक्टर के पास पहुंची, तब उन्हें मालूम पड़ा कि उन्हें सिजोफ्रेनिया की समस्या है। दवा और ट्रीटमेंट से वे अब पूरी तरह ठीक हो चुकी हैं। वे लोगों से ये कहना चाहती हैं कि ये कोई लाइलाज बीमारी नहीं है, बस जागरूकता की जरूरत है। वक्त रहते अगर ट्रीटमेंट लिया जाए, तो इंसान बिल्कुल ठीक हो सकता है।

केस स्टडी नंबर - 3

18 साल की बिपाशा कोविड के बाद से लगातार 2 साल घर पर रहने और पढ़ाई के प्रेशर की वजह से स्ट्रेस में चली गईं। अचानक उनके बदले बर्ताव को देखते हुए फैमिली ने डॉ सिंह से कंसल्ट किया और 1 महीने के अंदर ही बिपाशा की 90% दिक्कत खत्म हो गई।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

साइकेट्रिस्ट डॉ सिंह बताते हैं कि दुनिया में हर 5 से एक व्यक्ति डिप्रेशन का शिकार है। वहीं अगर भारत की बात करें, तो हालत यहां भी बुरे हैं। देश में हर 7 में से एक व्यक्ति डिप्रेशन झेल रहा है। ये समस्या कोविड में अपनों को और नौकरियां खोने के बाद से कई गुना बढ़ गई है। हम खुद को फिट रखने के लिए वर्कआउट करते हैं, डाइट प्लान लेते हैं, लेकिन मेंटल पीस के लिए अब भी अवेयरनेस की कमी है। डॉ सिंह बताते हैं कि जब तक व्यक्ति मेंटली फिट नहीं रहता, उसका फिजिकली फिट रहना नामुमकिन है।

इन बातों को न करें नजरअंदाज

नींद न आना

भूख न लगना

हमेशा अकेले रहना

अचानक रोना आना

बहुत गुस्सा आना

आम तौर पर लोगों को लगता है कि ये सारी बातें बेवजह हैं। इन्हें न तो वे स्ट्रेस से जोड़ते हैं, न ही मेंटल हेल्थ से, लेकिन ये बातें दरअसल मेंटल हेल्थ में हुई गड़बड़ी के लिए एक अलार्म है, जिस पर हमें वक्त रहते काम करने की जरूरत है।

खबरें और भी हैं...