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म्यूजिक बजाएं, मच्छर भगाएं:लाउड म्यूजिक सिर्फ पार्टी के काम नहीं आता, डेंगू से बचाने में भी हो सकता है कारगर

2 महीने पहलेलेखक: पारुल रांझा
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देश के कई राज्‍य इन दिनों डेंगू के बढ़ते प्रकोप से जूझ रहे हैं। लोगों को इससे बचाव के लिए अलर्ट रहने की सलाह दी जा रही है। हैरानी की बात ये है कि इस बार डेंगू के नए स्ट्रेन 'सीरोटाइप-2' के मामले देखे जा रहे हैं। अमेरिकन जर्नल ऑफ ट्रॉपिकल मेडिसिन एंड हाइजीन की रिसर्च की मानें तो डेंगू सीरोटाइप-2 बेहद गंभीर हो सकता है। ऐसे में मच्छरों से बचाव जरूरी है।

मच्छरों को भगाने के लिए बेशक केमिकल वाले प्रोडक्ट्स बेअसर साबित होने लगे हों, लेकिन लाउड म्यूजिक से मच्छरों के काटने का खतरा कम हो सकता है। बात थोड़ी अजीब लग रही होगी, लेकिन ये कोई मजाक नहीं है। वैज्ञानिकों की एक अंतरराष्ट्रीय टीम के सर्वे के अनुसार मच्छरों को हाई फ्रीक्वेंसी वाली आवाज पसंद नहीं होती। ऐसे में इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स से लाउड म्यूजिक पर मच्छर न तो अपनी संख्या बढ़ा पाते हैं और न ही काट पाते हैं।

स्मार्टफोन भी भगा सकता है मच्छर
आप मच्छरों को भगाने के लिए स्मार्टफोन की भी मदद ले सकते हैं। इसके लिए सिर्फ कुछ ऐप्स डाउनलोड करने की जरूरत है। गूगल प्ले स्टोर पर कई एंटी मॉस्किटो रिपेलेंट ऐप्स अवेलबल हैं। मच्छरों को इन ऐप्स की हाई फ्रीक्वेंसी वाली आवाज बिल्कुल पसंद नहीं होती, इसलिए वे आवाज सुनकर पास तक नहीं फटकते। इन ऐप्स को ऑन करने पर 17 से 22 किलो हर्ट्ज की तरंगें निकलती हैं, जो मच्छरों और मक्खियों को भागने पर मजबूर कर देती हैं। ये तरंगें इंसानों को नहीं सुनाई देती हैं और खतरनाक भी नहीं होतीं। बड़े कमरे में मोबाइल फोन का स्पीकर ऑन कर सकते हैं।

क्या मच्छर सुन सकते हैं?
मच्छरों के सुनने की सीमा लगभग 2 हजार हर्ट्ज है। नर मच्छरों में सुनने की क्षमता ज्यादा होती है। लंबे समय तक मादा मच्छरों को बहरा माना जाता था, लेकिन 2006 में गैब्रिएला गिब्सन और इयान रसेल की "करंट बायोलॉजी" में प्रकाशित शोध में बताया गया कि मादा मच्छर भी सुन सकती हैं। मच्छर अपने सिर पर दो पंख वाले एंटीना से लैस होते हैं, जिनका इस्तेमाल वे सुनने के लिए करते हैं।

मच्छर आपको कैसे ढूंढ लेता है?
कैलिफोर्निया के एक संस्थान की रिसर्च बताती हैं कि इंसानों की गंध, शरीर से निकलने वाली गर्मी और मच्छरों की तेज इंद्रियों के चलते वे इंसानों के होने का पता लगाते हैं। मादा मच्छर हमेशा इंसानों के खून को प्राथमिकता देती हैं। इसी एक वजह ये है कि इंसान सहित कई जानवर कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ते हैं। इस गैस की गंध को मादा मच्छर सेंसिंग ऑर्गन्स के जरिए 30 फीट से अधिक दूरी से भी आसानी से पहचान लेती है। इसी कारण मच्छर अंधेरे में इंसानों के पास पहुंच जाते हैं।

प्रेग्नेंट महिलाएं सामान्य इंसान की तुलना में 20% ज्यादा कार्बन डाइऑक्साइड रिलीज करती हैं। ऐसे में मच्छर उन्हें ज्यादा काटते हैं। वहीं, एक अन्य शोध में ये बात भी पता चली है कि यदि किसी को पसीना ज्यादा आता है, तो उसे मच्छर अन्य लोगों के मुकाबले ज्यादा काटते हैं।

क्यों भिनभिनाते हैं मच्छर?
दरअसल, मच्छरों की भिनभिनाहट उनके पंख फड़फड़ाने की आवाज होती है। कई वैज्ञानिकों के अनुसार मच्छरों की ये आवाज उनको विपरीत लिंग की तलाश करने में मदद करती है। लुइस एम रोथ की रिसर्च बताती है कि जब मादा मच्छर उड़ रही होती हैं तो नर मच्छर उनके करीब जाते हैं। ये भिनभिनाहट उनकी तलाश में होती है।

इस देश में है मच्छर पैदा करने वाली फैक्ट्री
चीन के दक्षिणी इलाके गुआंगझोऊ में एक फैक्ट्री है, जो अच्छे मच्छरों का उत्पादन करती है। दरअसरल, इन्हें अच्छा मच्छर इसीलिए कहते हैं क्योंकि वो बीमारी फैलाने वाले मच्छरों की ग्रोथ को अपने तरीके से रोक देते हैं। ये मच्छर वोलबेचिया बैक्टीरिया से संक्रमित होते हैं। इनके उत्पादन का काम चीन ने एक रिसर्च के बाद शुरू किया है। यहां हर हफ्ते करीब 2 करोड़ मच्छरों का उत्पादन होता है। गुआंगझोऊ की फैक्ट्री में इन मच्छरों को ब्रीड करने के बाद जंगलों और मच्छरों की अधिकता वाले स्थानों पर छोड़ा जाता है।

मच्छर के काटने से हो सकती हैं कई बीमारियां
WHO की मानें तो मलेरिया विश्व स्तर पर करीब 219 मिलियन मामलों का कारण बनता है। इसके चलते हर साल 4 लाख से अधिक मौतें होती हैं। वहीं, डेंगू करीब 96 मिलियन रोगसूचक मामलों और हर साल अनुमानित 40 हजार मौतों के लिए जिम्मेदार है।

जयपुर के फोर्टिस एस्कॉर्ट्स अस्पताल में सीनियर कंसल्टेंट डॉ. प्रवीण कनौजिया बताते हैं कि कई लोग मच्छरों के काटने को गंभीरता से नहीं लेते हैं। ज्यादातर लोगों को घर पर ही कुछ उपाय करके मच्छरों के काटने से होने वाली एलर्जी से राहत मिल जाती है। कई केस ऐसे भी होते हैं, जिनमें लोगों को डॉक्टर के पास जाना पड़ सकता है। मच्छरों के काटने से कई खतरनाक और जानलेवा बीमारियां हो सकती हैं। ऐसे में इनसे बचाव के लिए सभी आवश्यक नियमों का पालन करना जरूरी है। जिस जगह मच्छर ने काटा हो, वहां खुजली न करें। साबुन और पानी से अच्छी तरह से धोना चाहिए। इस पर हाइड्रोकार्टिसोन क्रीम लगा सकते हैं

मच्छरों से फैलने वाली मुख्य बीमारियां

  • मलेरिया
  • डेंगू
  • चिकनगुनिया
  • जीका वायरस
  • यलो फीवर
  • जापानी एन्सेफलाइटिस या ब्रेन फीवर
  • फाइलेरिया या हाथी पांव

ये लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं

  • बुखार
  • सिर दर्द
  • आंखों में दर्द
  • सांस फूलना
  • ठंड लगना
  • थकान और कमजोरी
  • मसूड़ों से खून आना
  • पीलिया
  • उल्टी
  • गर्दन में अकड़न

मच्छरों से बचाव के तरीके

  • दालचीनी का स्प्रे यूज करें।
  • पूरे कपड़े पहनें।
  • सोते वक्त पंखे को तेज करके रखें।
  • दरवाजों व खिड़कियों पर जाली लगवाएं।
  • घर या अपने आसपास साफ-सफाई रखें।
  • मच्छरदानी व कीट स्प्रे का इस्तेमाल करें।
  • नीम के तेल को हाथ-पैरों में लगाएं।
  • पुदीने के पत्तों के रस का छिड़काव करें।
  • घर में लगा तुलसी का पौधा मच्छरों को दूर रखेगा।
  • सोते वक्त चमकीले या हल्के रंग के कपड़े पहनें।
  • मच्छर मारने वाले रैकेट यूज करें।
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