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पैसिव स्मोकिंग से धुंआ होती सेहत:सिगरेट जलाने पर निकलते हैं 5000 केमिकल, न पीने वालों की सेहत पर भारी पड़ रही सेकेंड हैंड और थर्ड हैंड स्मोकिंग

एक महीने पहलेलेखक: भारत सिंह
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'मैं जिंदगी का साथ निभाता चला गया, हर फिक्र को धुंए में उड़ाता चला गया'। धुंए के छल्ले बनाते लोगों के बीच ये लाइनें काफी बार शेयर हुई होंगी। धुंआ उड़ाते हुए जिंदगी का साथ नहीं निभाया जा सकता। यह बात धुंआ उड़ाने वालों पर ही नहीं, उनके साथ रह रहे लोगों के लिए भी उतनी ही सटीक है। अक्सर स्मोकिंग करने वाले लोग अपने साथ रहने वाले पैसिव स्मोकर्स की परेशानियों के बारे में नहीं सोच पाते हैं। पैसिव स्मोकर्स वो लोग हैं जो खुद तो स्मोकिंग नहीं करते लेकिन स्मोकर्स के साथ रहने की वजह से चाहे-अनचाहे धुंए की चपेट में आ जाते हैं। पैसिव स्मोकिंग किसी भी मायने में डायरेक्ट स्मोकिंग से कम खतरनाक नहीं है। बल्कि कुछ रिसर्चर्स तो इसे एक्टिव स्मोकिंग से भी खतरनाक मानते हैं।

ऑफिस, होटल या पब्लिक प्लेस पर स्मोकिंग जोन या स्मोकिंग कॉर्नर इसीलिए होते हैं ताकि स्मोकर्स के धुंए का खामियाजा उन लोगों को न भुगतना पड़े जो स्मोकिंग से परहेज करते हैं। भारत में 2003 से ही पब्लिक प्लेस पर स्मोकिंग बैन है। इसके बावजूद स्मोकर्स अनजाने में या इसकी तलब में अक्सर अपने घर या आसपास मौजूद दूसरे लोगों को भी पैसिव स्मोकर्स बनाते हैं। बता दें कि सिगरेट के धुंए से करीब 5 हजार केमिकल्स निकलते हैं, जिसमें से अधिकतर सेहत के लिए काफी खतरनाक होते हैं।

पैसिव स्मोकिंग से लंग कैंसर का रिस्क

लंग कैंसर के बारे में अमेरिका में आई एक रिपोर्ट कहती है कि अब इसके केस नॉन स्मोकर्स में भी देखे जाने लगे हैं। यूएस नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने सिगरेट न पीने वाले लोगों के बीच लंग कैंसर की वजहों की तलाश की। उनको ऐसे लोगों में कैंसर फैलने की कोई ठोस वजह तो नहीं मिली लेकिन इसके लिए पैसिव स्मोकिंग को जिम्मेदार बताया जा रहा है। अभी इस दिशा में आगे भी रिसर्च की जरूरत बताई गई है।

इम्युनिटी कमजोर होने की वजह है स्मोकिंग

दो साल से दुनिया में तहलका मचाने वाली महामारी कोरोना का सीधा कनेक्शन इम्युनिटी से है और स्मोकिंग आपकी इम्युनिटी पर असर डालती है। कोरोना की पहली लहर में फ्रांस, चीन और भारत में कहा गया कि यह वायरस स्मोकर्स पर कम असर डालता है। कोरोना की कोई दवाई न होने की वजह से कुछ नॉन स्मोकर्स ने स्मोकिंग भी की। अब इंग्लैंड में हुए एक अध्ययन में सामने आया है कि स्मोकिंग करने वालों को वायरस की चपेट में आने पर ज्यादा नुकसान झेलना पड़ा और उनके अस्पताल में भर्ती होने के चांस 80 फीसदी ज्यादा रहे। इसके बाद पुरानी स्टडी पर सवाल भी उठाए गए हैं। कहा जा रहा है कि पहली स्टडी में शामिल लोगों में कुछ टोबैको इंडस्ट्री से जुड़े हुए थे।

पैसिव स्मोकर्स के लिए रिस्क ज्यादा, थर्डहैंड स्मोकिंग और खतरनाक

पैसिव स्मोकर्स के लिए हेल्थ रिस्क इसलिए दोगुना होता है कि वह सिगरेट फिल्टर से निकले धुंए के अलावा स्मोकिंग करने वाले शख्स के छोड़े हुए धुंए को अपने अंदर लेते हैं। यह उन्हें ज्यादा नुकसान पहुंचाता है। अगर आपके घर में बच्चे हैं और आप अजनाने में उनको पैसिव स्मोकर्स बना रहे हैं तो अलर्ट हो जाइए। बच्चे पैसिव स्मोकिंग से कम उम्र में ही अस्थमा, ब्रोनकाइटिस और न्यूमोनिया की चपेट में आ जाते हैं। इसके अलावा आप एक्टिव स्मोकर्स के साथ रहते हैं तो लंग कैंसर और दिल की बीमारियों की चपेट में भी आ सकते हैं। घर में स्मोकिंग करने से बंद कमरे की हवा में धुंए के कण काफी देर तक रहते हैं। ये कपड़ों और घर की चीजों पर भी बैठ जाते हैं। इसे थर्डहैंड स्मोकिंग कहा जाता है।

पैसिव स्मोकिंग से पेट में मौजूद बच्चे भी सेफ नहीं

आप अपने घर और कार को स्मोक फ्री बना सकते हैं। कई शहरों में आप उस कार में स्मोकिंग नहीं कर सकते जिसमें 18 साल के कम उम्र के बच्चे बैठे हों। सेकेंड हैंड स्मोकिंग से आंखें, नाक, गले और फेफड़ों को नुकसान पहुंचता है। गर्भवती महिलाओं के लिए पैसिव स्मोकिंग और भी खतरनाक है। उनके पेट में मौजूद बच्चे को भी इससे नुकसान पहुंचता है और अर्ली बर्थ और लो वेट बर्थ के चांसेज बढ़ जाते हैं। रिपोर्ट्स बताती हैं कि 30 मिनट की पैसिव स्मोकिंग के बाद आपके शरीर में वही बदलाव आने लगते हैं जो एक्टिव स्मोकर्स के शरीर में आते हैं।

स्मोकिंग से अपनों को बचाने के लिए अपनाएं ये टिप्स

अगर आप तुरंत स्मोकिंग नहीं छोड़ पा रहे हैं लेकिन अपने साथ वालों की सेहत के लिए फ्रिकमंद हैं तो आप कुछ स्टेप्स अपना सकते हैं। घर के अंदर स्मोकिंग करें तो इसके लिए एक कमरा तय कर लें। याद रखें कि धुंआ आसानी से पूरे घर में फैल जाता है। पॉसिबल है तो आप अपने घर को स्मोक फ्री जोन बना लीजिए। अगर बालकनी या घर के बाहर स्मोकिंग करते हैं तो दरवाजे और खिड़कियां बंद करके स्मोकिंग करें। आपके घर आने वाले मेहमान अगर स्मोकिंग करते हैं तो उन्हें भी घर से बाहर स्मोकिंग करने के लिए रिक्वेस्ट करें। ध्यान रखें कि आपके बच्चे जिनके साथ समय बिताते हों, वो बच्चों को स्मोकिंग फ्री माहौल दे सकें।

अपने चाहने वालों के लिए छोड़ें स्मोकिंग

स्मोकिंग छोड़ने से आप सिर्फ अपनी ही नहीं अपने दोस्तों, घरवालों और करीबियों की सेहत में भी सुधार ला सकते हैं। इन लोगों को पैसिव स्मोकिंग से बचाकर आप उनके सामने मिसाल पेश कर सकते हैं। इस आदत को छोड़कर आप अपने बच्चों के रोल मॉडल भी बन सकते हैं। क्लाउडनाइन ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स के फाउंडिंग चेयरमैन डॉ. किशोर कुमार बताते हैं कि दुनिया में हर साल 6 लाख लोग पैसिव स्मोकिंग की वजह से जान गंवाते हैं। इसमें से दो लाख के करीब बच्चे होते हैं। इसलिए पैसिव स्मोकिंग को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। पैसिव स्मोकिंग से दिल की बीमारी का खतरा 25 से 30 प्रतिशत तक बढ़ जाता है।

क्या करें- क्या न करें

फोर्टिस एस्कॉर्ट फरीदाबाद में हेड ऑफ द डिपार्टमेंट पल्मोनोलॉजी और सीनियर कंसल्टेंट डॉ रवि शेखर झा बताते हैं कि सेकेंड हैंड स्मोकिंग का रिस्क सबसे ज्यादा बंद जगहों पर होता है। उनके मुताबिक पैसिव स्मोकिंग से बचने के लिए कुछ आसान चीजें हैं जो सभी को अपनानी चाहिए.

कार में विंडो ओपन करके भी स्मोकिंग न करें।

अपने गेस्ट को बताकर रखें कि आपके बच्चों के सामने स्मोकिंग न करें।

लिफ्ट में स्मोकिंग करने के कई घंटे बाद तक उसमें जहरीले पार्टिकल्स रहते हैं। अगर आपको लिफ्ट में धुंआ दिखे तो उसमें जाना अवॉइड करें।

कहीं बाहर जाएं तो स्मोक फ्री रेस्टोरेंट, होटल को चुन सकते हैं।

अगर आप बिजनेस करते हैं या पब्लिक रिलेशन में हैं तो ध्यान रखें कि आपके पार्टनर स्मोक फ्री एरिया को प्रमोट करते हों।

लगातार खांसी आती है या चेस्ट में पेन होने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।

अगर आपको लंग्स कैंसर या सांस लेने से संबंधित कोई परेशानी नजर आती है तो डॉक्टर उसकी जांच शुरू कर देते हैं।

कार्बन मोनो ऑक्साइड ब्लड टेस्ट या चेस्ट का एक्सरे से लंग्स पर प्रभाव का पता लगाया जाता है।

अगर आपको लगता है कि आप कई महीने तक पैसिव स्मोकिंग की चपेट में रहे हैं तो डॉक्टर से लंग्स का चेकअप जरूर करवा लें।

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