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न तुम बेवफा थे, न हम बेवफा:उसने कहा अब तुम सो जाओ… लेकिन प्रिया की आंखों से नींद उड़ चुकी थी और पुष्कर की बात उसके कानों में गूंज रही थी

3 महीने पहले
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“न तुम बेवफा थे, न हम बेवफा, मगर क्या करें, हमारी राहें जुदा हैं…”

मोबाइल पर वही रोज वाला फिल्मी गाना सुनकर प्रिया सो चुकी थी।

इससे पहले वह पुष्कर को गुड नाइट का मैसेज भी भेज चुकी थी। उधर से भी ‘गुड नाइट’... का मैसेज आ चुका था और उसे पढ़कर प्रिया ने दो पल के लिए लंबी आह भरी।

प्रिया की उम्र कम न थी। 52 बसंत देख चुकी थीं। उनके हमउम्र पुष्कर जो, करीब 10 साल पहले तक उनके ही कॉलेज में टीचर हुआ करते थे, जहां आज प्रिया प्रिंसिपल हैं। तब प्रिया भी इसी कॉलेज में टीचर थीं, जब पुष्कर प्रमोशन के साथ उसी शहर के एक दूसरे कॉलेज में प्रिंसिपल की नौकरी ज्वाइन करने चले गए थे। उसके डेढ़ साल बाद प्रिया भी अपने कॉलेज की प्रिंसिपल बन गई।

रोजाना की तरह सुबह 5 बजे का अलार्म बजा। प्रिया की आंख खुल गई लेकिन वह संडे होने की वजह से बिस्तर से नहीं उठीं कॉलेज की छुट्टी है इसलिए वह सोने की कोशिश करने लगी। मोबाइल ने एसएमएस रिंग दी। प्रिया जानती थीं, यह मैसेज किसका होगा। वह हौले से मुस्कुराईं। मोबाइल उठाया। मैसेज ऑन किया, लिखा था- गुड मार्निंग। नंबर पुष्कर का ही था। प्रिया ने भी रिप्लाई कर दिया- वैरी गुड मार्निंग।

जस्ट बाद उनके मोबाइल पर पुष्कर की कॉल आ गई।

'अभी सो लो मैडम जी, लेकिन आज शाम को मिलते हैं। घूमेंगे, फिर डिनर...।'

'श्योर, लेकिन लंच के लिए आपको घर आना होगा, मैं इंतजार करूंगी।'- प्रिया ने कहा।

'जो हुक्म मैडम, हाजिर हो जाऊंगा, दोपहर को ठीक एक बजे। इंतजार करना।

अब सो जाओ।'- पुष्कर ने जवाब दिया और कॉल कट हो गई, लेकिन प्रिया की नींद उड़ चुकी थी। वह 10 साल पहले की स्मृतियों में पहुंच गईं।

पुष्कर ने बताया- मैं प्रिंसिपल बनकर दूसरे कॉलेज में जा रहा हूं। वह बहुत खुश थे लेकिन प्रिया को उनका जाना अच्छा नहीं लगा, पर मुबारक करने के बाद भी वह कुछ न कह सकी। पुष्कर ने दूसरा कॉलेज ज्वाइन कर लिया लेकिन उन दोनों में संवाद बना रहा। फोन पर लंबी बातें तो हर रोज होतीं। वीक एंड पर मुलाकातें लंच या डिनर के बहाने हो जातीं, असल में, पुष्कर और प्रिया, दोनों ही खुद को एक-दूसरे का अच्छा दोस्त समझते। एक-दूसरे से देश-दुनिया की बातें करते, लेकिन उनमें से किसी ने एक-दूसरे की निजी लाइफ में झांकने की कोशिश कभी नहीं की।

दोनों के निजी जीवन में फर्क यह था कि पुष्कर पहले से विवाहित थे, जबकि प्रिया अविवाहित। अलबत्ता, पुष्कर की धर्मपत्नी अब इस दुनिया में नहीं थीं। 12 साल पहले एक हादसे में वह अपनी पत्नी को खो चुके थे, तब उनका तीन साल का बेटा था, जो अब 15 साल का हो चुका है, और एक बोर्डिंग स्कूल में पढ़ता है।

पुष्कर ने भी कभी दूसरे विवाह की जरूरत महसूस नहीं की। शायद, बेटे के लिए सौतेली मां लाने से बचते होंगे।

वहीं, प्रिया के माता-पिता ने बहुत कोशिश की कि वह शादी कर ले लेकिन वक्त की कमी और काम की व्यस्तता ने प्रिया को कभी सोचने नहीं दिया। 52 साल की उम्र में भी प्रिया के मन शादी का ख्याल नहीं आया। शायद, शादी के बाद बुजुर्ग माता-पिता से बिछड़ने का डर भी प्रिया को इसके लिए बाध्य करता रहा। वह अपने माता-पिता की इकलौती संतान हैं इसलिए सोचती थीं कि शादी के बाद पति के साथ रहना हुआ तो माता-पिता को कौन देखेगा।

पुष्कर और उनकी दोस्ती भी कुछ यूं लंबी चलती रही कि कभी प्रिया को किसी पुरुष के प्रति भावनात्मक लगाव या आकर्षण की जरूरत महसूस नहीं हो नहीं हुई।

अभी साल भर पहले प्रिया के माता-पिता गुजर गए तो उसके करीबी ने रिश्तेदारों ने शादी का दबाव बनाना शुरू किया। पहले तो प्रिया इसके लिए बिल्कुल भी तैयार न हुईं। लेकिन जब रिश्तेदारों ने ज्यादा दबाव डाला तो उन्होंने अखबार में वैवाहिक विज्ञापन दे दिया-

'52 वर्षीय एक प्रतिष्ठित स्कूल की प्रिंसिपल को विवाह बंधन के लिए हमउम्र जीवन साथी की जरूरत है।'

विज्ञापन के बारे में प्रिया ने पुष्कर को कुछ भी नहीं बताया। जबकि विज्ञापन के बाद उनके पास कई ऑफर आने लगे।

इतने सारे ऑफर में से प्रिया को चुनाव करना मुश्किल होने लगा और इनमें से किसी के साथ रिश्ता जोड़ने में प्रिया की कोई दिलचस्पी नहीं थी। उनको लग रहा था कि अगर उसने किसी को जीवनसाथी बनाया तो वह किसी प्रियजन को खो देंगी।

सच तो यह है कि शादी के निर्णय के बाद प्रिया को बार-बार पुष्कर का ख्याल अनायास ही आने लगा था।

उस दिन वह इसी सोच में डूबी हुई थीं कि आखिर क्यों वह पुष्कर से दूर होने के भय से डरने लगी हैं? कहीं ऐसा तो नहीं कि उनको पुष्कर से प्यार...!

'नहीं-नहीं, ऐसा नहीं हो सकता।'

-प्रिया के दिमाग ने जवाब दिया।

'उन्होंने तो कभी पुष्कर को लेकर ऐसी कोई फीलिंग भी न की फिर ऐसा कैसे हो सकता है।'

अब प्रिया के मन में अन्तर्द्वन्द चलने लगा था-

लेकिन पुष्कर हैं बहुत केयर करने वाले। बिना किसी स्वार्थ के हमेशा उन्होंने मेरा साथ दिया है, फिर क्यों न में पुष्कर से ही...!

यह ख्याल दिल में आते ही प्रिया का दिमाग ठहर गया।

जवाब भी उनके मन में कौंधा- 'अरे नहीं, पुष्कर क्यों भला मुझसे शादी करने लगे?'

और इस तरह के सवालों के भंवर में फंसी प्रिया की आंख लग गई। हालांकि सोने से पहले एक वह एक निर्णय ले चुकी थीं।

अगली शाम प्रिया पुष्कर के साथ डिनर पर गई और कहा- 'पुष्कर जी, मैं शादी करने जा रही हूं। रिश्ते के लिए विज्ञापन भी दे चुकी हूं।'

यह कहकर प्रिया ने अपनी नजरें पुष्कर पर गढ़ा लीं। वह उनकी आंखों और चेहरे के भाव को देखकर अपनी बात पर प्रतिक्रिया जानने की कोशिश करने लगी। लेकिन पुष्कर ने प्रिया की इस बात पर कोई जबाव नहीं दिया। कुछ देर बाद प्रिया समझ गई कि पुष्कर अवाक हैं, लेकिन खुले मन के व्यक्ति होने के नाते पुष्कर ने जवाब दिया-

'अच्छा सोचा है तुमने, हर किसी को एक जीवन साथी की जरूरत होती ही है। मेरी शुभकामनाएं।'

प्रिया को पुष्कर से ऐसी प्रतिक्रिया की उम्मीद न थी। उसने सोचा कि पुष्कर कहेंगे- मेरे होते क्या जरूरत है, तुम्हें किसी और साथ की। लेकिन उनका जवाब सुनकर प्रिया शांत हो गईं, जैसे संमुद्र में तूफान आ जाने के बाद उठी लहरें बिल्कुल शांत हो गई हों।

कुछ पल प्रिया इसी तरह शांत रहीं फिर उन्होंने पुष्कर की आंखों में पूरे आत्मविश्वास के साथ झांका। हिम्मत से सवाल किया-'तुम्हें किसी जीवन साथी की जरूरत नहीं है क्या?'

प्रिया ने देखा पुष्कर की आंखें नम थीं। प्रिया ने उनकी आंखों में झांकना चाहा तो उन्होंने नजरें चुरा लीं। बिना कहे ही पुष्कर प्रिया को अपना जवाब दे दिया। दोनों रेस्टोरेंट से उठे और कार में जाकर गुमसुम बैठे गए।

पुष्कर ने प्रिया को उसके घर पर ड्रॉप किया और बिना कुछ कहे चले गए।

शायद, वर्षों बाद वह ऐसी रात थी, जब प्रिया जागती हुई पुष्कर के 'गुड नाइट' मैसेज का इंतजार करती रही, लेकिन उधर से दो बजे तक कोई मैसेज नहीं आया, तो उसने खुद से व्हाटसएप पर गुड नाइट लिखकर भेज दिया। मैसेज रिसीव भी हुआ, पर उसका कोई रिप्लाई प्रिया को नहीं मिला।

प्रिया ने चाहते हुए भी उस रात पुष्कर को फोन करना मुनासिब नहीं समझा। जाने क्यों, उन्हें लगा कि पुष्कर से यूं ही रोजाना की तरह बात करने का वक्त नहीं है आज।

सुबह चार बजे प्रिया की आंख लगी। आज भी उनको कॉलेज नहीं जाना था, लेकिन सुबह सात बजे एक मैसेज की रिंग से उसकी आंख खुली। उन्होंने मैसेज पढ़ा, लिखा था-

क्या प्रिया तुम मुझे जीवन साथी के रूप में स्वीकार करना पसंद करोगी… मैसेज पढ़ने के बाद प्रिया को लगा कि उसे जिसकी तलाश थी वह अब उसे मिल चुका है ।

- राजीव शर्मा

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