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दो दीवाने शहर में:प्रियंका उस रात अनुज के बहुत करीब आ गई, अब उसे डर है कि वह उससे शादी करेगा या नहीं

2 महीने पहले
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कोहरे की दुशाला ओढ़े सुबह की हवा आंगन में नाच रही थी। प्रियंका की आंखें खुलीं। धुंधली नजर से उसने घड़ी को ओर देखा। साढ़े छह बज चुके थे।

आनन-फानन में वह स्टेशन की तरफ भागी। आज अनुज उससे मिलने दिल्ली आ रहा था।

प्रियंका और अनुज की प्रेम कहानी सोशल मीडिया से शुरू हुई थी। आज पूरे चार महीने बाद वो दोनों पहली बार मिल रहे थे। अलग-अलग शहरों से होने के बाद भी प्रियंका और अनुज में बहुत सी समानताएं थीं। शायद यही वजह थी कि दोनों को ये दूरी भी खलती नहीं थी।

प्रियंका सोच रही थी, ‘जब पहली बार मैं उसे देखूंगी और वो अपनी सीप सी आंखों में मुझे भर लेगा, तो मैं दुनिया की सबसे खूबसूरत मोती बन जाऊँगी!’

वह खुद से ही सवाल करने लगी, ‘जब मैं उसके कानों के पास अपने होंठ रखकर कुछ बुदबुदाऊँगी, तो क्या उसका बदन भी बरसात में भीगे पंछी सा कपकपाएगा?’

समय का वेग, प्रियंका की गाड़ी के वेग से कहीं अधिक था, उसे स्टेशन पहुंचने में थोड़ी देर हो गई।

लोगों की आती हुई भीड़ में प्रियंका की नजरें बस एक चेहरा तलाशने लगी, जिसके लिए वो आज बन-संवरकर आई थी। भीड़ में भी अपने प्रेमी का चेहरा पहचानने में उसे जरा भी परेशानी नहीं हुई।

अब वो पल था कि अनजु उसके सामने खड़ा था।

उसे देखते ही प्रियंका झट से बोल पड़ी, “ठीक से देख लो मुझे और बताओ, क्या अब भी तुम्हें मैं पसंद हूं?”

“ये बात तो मुझे पूछनी चाहिए थी। जो वास्तव में खूबसूरत है संशय उसे हो रहा है। अजीब बात है!" यह कहते हुए अनुज हंसने लगा।

प्रियंका उसे अपना शहर दिखाना चाहती थी इसलिए दोनों पहले चिड़ियाघर गए।

टिकट लेने के बाद जब दोनों अंदर जा रहे थे तो प्रियंका को लगा जैसे किसी ने सहस्र कमल उसकी हथेली में थमा दिए हों।

उसने हथेली की ओर देखा तो पाया, अनुज ने उसका हाथ थाम लिया था, जिससे उसके बदन में सिरहन हो उठी। प्रियंका पहली बार किसी मर्द के स्पर्श से रूबरू हुई थी।

कुछ देर इधर-उधर की बातें करने के बाद दोनों चुप हो गए।

फिर अचानक प्रियंका ने अनुज की आंखों में देख कर कहा, “अगर हम कल को साथ नहीं रह पाए तो? मैं तुमसे बहुत प्रेम करने लगी हूं। तुम्हारे बिना जीवन कैसे बसर होगा ये सोच कर डर लगता है। तुम मेरा साथ तो दोगे न?"

अनुज ने प्रियंका का दाहिना हाथ अपने हाथ में लिया और बड़े प्यार से बोला, “तुमसे शादी करना मेरे क्या किसी भी इंसान के लिए सौभाग्य की बात होगी। ये तुम्हें नहीं मुझे कहना चाहिए कि तुम्हारा साथ मुझे उम्र भर के लिए चाहिए," ये कहते हुए अनुज ने प्रियंका के दोनों हाथ अपने होंठों से लगा लिए और प्रियंका ने शर्म के मारे आंखें झुका लीं।

कुछ देर तक दोनों खामोश बैठे सूरज को ढलता देखते रहे। दिसंबर की ठंडी हवा के स्पर्श से प्रियंका ठिठुरने लगी तो अनुज ने अपना जैकेट उसे ओढ़ा दिया।

प्रियंका ने भी विरोध न करते हुए कहा, “क्या बात है, बड़े फिल्मी हो रहे हो?” अनुज बस मुस्कुरा दिया और उसे ठीक से जैकेट पहना दी।

शाम रात में कब बदल गई दोनों को पता नहीं चला। तभी अनुज ने धीरे से होंठों को प्रियंका के कानों के पास ले जाकर कहा, “काश! इस घड़ी की नाचती सुइयों के पैरों में मोच आ जाए और हम इस पल में कैद हो जाएं।"

बरसात शरूु हो गई थी इसलिए दोनों थोड़ा तेज चाल से लगभग भागते हुए स्कूटी के पास चले गए।

अनुज को रास्ता पता नहीं था इसलिए प्रियंका ने स्कूटी चलाना ठीक समझा। थोड़ा आगे बढ़े ही थे कि प्रियंका के पैर ठंड से कांपने लगे। बारिश की वजह से वह पूरी भीग गई थी।

दोनों जब ट्रैफिक लाइट पर कुछ देर रुके, तो अनुज ने पूछा, “तुम ठीक तो हो? तुम्हें ठंड तो नहीं लग रही?" ये कहते हुए उसने प्रियंका को कस कर बाहों में भर लिया।

प्रियंका ने बस ‘हां’ में सिर हिलाया, फिर सड़क पर बिखरे पानी में ट्रैफिक लाइट के लाल रंग को देखने लगी। वह ठीक वैसा ही लग रहा था जैसे दुल्हन के पैर पर महावर।

कुछ देर में स्टेशन आ गया। अनुज का अपने शहर लौट जाने का वक्त आ चुका था।

नम आंखों और रुआंसी आवाज में प्रियंका ने पूछा, “मुझे अपने घर वालों से कब मिलवाओगे? वो मुझे पसंद तो करेंगे न?”

अनुज, जिसे जाने की जल्दी थी, इस बात को जाने अनजाने सनु कर भी अनसुना कर बैठा।

ट्रेन आ गई।

“अपना ख्याल रखना,” कह कर अनुज चला गया।

प्रियंका अपने सवाल का जवाब न मिलने पर मायूस हो कर इसी बारे में सोचते हुए घर जा रही थी कि रास्ते में उसे स्कूटी रोकनी पड़ी। काफी देर से फोन जो बज रहा था।

एक अज्ञात नंबर से कॉल आई। उसने फोन उठाया, तो दूसरी तरफ से एक उम्रदराज महिला बोलीं, “प्रियंका, बेटा कैसी हो?”

प्रियंका एक बिन मां की लड़की थी। वह आवाज सुनकर उसे लगा मानो किसी अपने की आवाज हो।

जवाब में वह बोली, “जी, आप कौन?”

सामने से जवाब आया, “तुम्हारी होने वाली सास। अनुज ने बताया तुम्हारे बारे में। और हां, हमें तुम बहुत पसंद हो।”

यह सुनकर उसकी आंखें भर आईं।

प्रियंका को उसका जवाब मिल गया था। ऐसा लग रहा था मानो उसने अपनी जिंदगी अनुज के नाम करने का फैसला कर लिया हो।

- हेमा काण्डपाल

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