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शर्मीला पति:नलिन दिल की बात कह न पाता और मृगा उसे छेड़ने के बहाने ढूंढती, उनका प्यार एक अलग राह पर था

2 महीने पहले
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इन दिनों वह घर से ही काम करती है। शादी के बाद उसने ही ऐसी जॉब ढूंढ ली थी, जहां केवल हफ्ते में एक दिन ऑफिस जाना पड़ता था, बाकी दिन वह घर से ही काम कर सकती थी। हालांकि शादी के बाद उसे एहसास हो गया था कि नलिन बहुत बिजी रहता है और रात को नौ-दस बजे से पहले घर वापस आना उसके लिए मुश्किल होता है। लेकिन वह बार-बार जॉब बदल नहीं सकती, इसलिए जैसा चल रहा था, चलने दिया।

लैपटॉप पर तेजी से उसकी उंगलियां चल रही थीं। बेडरूम से उसे नलिन की बुदबुदाहट की आवाजें आ रही थीं। उसे हंसी आ गई। जानती थी कि वह टीवी के रिमोट को ढूंढ रहा होगा।

“मृगा!” नलिन की आवाज बेडरूम से होते हुए गलियारे से गुजरते हुए उसकी स्टडी तक आई। “टीवी का रिमोट कहां है?”

एक पल के लिए कीबोर्ड पर चलती उसकी उंगलियां रुकीं।

वह जानबूझकर ऐसा करती है ताकि जब नलिन घर पर हो और उसे डिस्टर्ब न करने के ख्याल से चुपचाप टीवी देखना चाहे, तो वह उसे किसी तरह से डिस्टर्ब करे। उसके पास आकर बात करे। नलिन वैसे तो कम बोलने वाला इंसान है, लेकिन कई बार उसका बहुत ज्यादा ख्याल रखना भी उसे चिढ़ा जाता था। आखिर पति-पत्नी में इतनी औपचारिकता क्यों हो?

“हो सकता है किचन में हो। चाय बनाने गई थी तो हाथ में ही था। शायद वहीं भूल आई हूं,” मृगा ने अपनी हंसी को रोकते हुए कहा।

“ठीक है, मैं ले लेता हूं।” नलिन ने उसकी स्टडी में झांकते हुए कहा।

वह उस समय किसी मासूम बच्चे की तरह लगा उसे। काम के लिए बस निकलने ही वाला था। तैयार हो रहा था, इसलिए तौलिया लपेटा हुआ था। सुबह ग्यारह बजे के आसपास निकलता है, इसलिए मृगा को ज्यादा भागदौड़ नहीं करनी पड़ी सुबह।

उसने नलिन को देखा। ढेर सारा प्यार आया उस पर।

दो साल पहले, इसी के लिए वह घर से भागी थी। उसके माता-पिता इस रिश्ते के लिए तैयार नहीं थे। उनका कहना था कि उसकी जैसी बुद्धिजीवी लड़की के लिए व्यापार करने वाला व्यक्ति सही नहीं रहेगा। लेकिन वह कहां मानी थी। सही फैसला ही तो लिया था उसने। नलिन के साथ वह खुश है।

नलिन की मुंबई के प्रसिद्ध जवेरी बाजार में हीरे के आभूषणों की एक दुकान थी। ज्यादा बड़ी नहीं थी, लेकिन पुश्तैनी काम होने के कारण अच्छी चलती थी।

अगले दिन मृगा बेहद खुश थी और मन ही मन गुनगुना रही थी। नलिन को भी बार-बार खास नजरों से देख रही थी। सुबह सामान्य दिनों जैसी उनके बीच बातचीत हुई। शाम को वह जल्दी लौट आयाा। बार-बार दरवाजे की बेल बजने से उसे हैरानी जरूर हुई थी, क्योंकि नलिन का यह लौटने का समय नहीं था और लगातार बेल बजाते रहने की आदत केवल उसी की थी।

उसके चेहरे पर मुस्कान आ गई। जिस दिन वे भागे थे, वह उसके घर आया था। उस समय उसके माता-पिता बाहर गए हुए थे और मृगा के दरवाजा खोलने से पहले वह बार-बार बेल बजाता रहा।

हालांकि दो साल बाद भी वह हमेशा ऐसा करता आ रहा है, जो उसके लिए किसी खेल से कम नहीं है। वह भी चिढ़ती नहीं है, बल्कि उसे आनंद ही आता है।

उसे देखकर वह खिल गई थी। वह तब रसोई में स्पेशल डिनर तैयार कर रही थी। उसने अपनी और नलिन दोनों की फेवरेट डिश बनाई।

“कुछ खास है क्या आज? या कोई आनेवाला है?” नलिन ने पूछा।

“इतनी सजी-संवरी क्यों हो? लगता है कोई सरप्राइज देने वाली हो। प्रमोशन हुआ है?”

मृगा मुस्करा दी। यानी इस भोले को कुछ याद नहीं। सुबह उसने इसलिए नहीं कहा था कि शाम तक शायद उसे याद आ जाएगा या उसे इतना तैयार देख ही वह समझ जाए। उसे जल्दी लौटा देख उसने यही सोचा था।

“बस ऐसे ही, थोड़ा दिमाग पर जोर लगाओ।”

इतने में वह किसी से फोन पर बात करने लगा।

“मुझे दुकान पर वापस जाना है।”

“क्यों?” मृगा को बुरा लगा। “मैंने सोचा था कि हम आज एक साथ खाना खाएंगे। तुम जल्दी आ गए थे तो मुझे यही लगा था।”

उसे रोना आ रहा था। आखिर वह शादी की सालगिरह कैसे भूल सकता है।

वह नलिन को बताने ही वाली थी कि वह बोला, “मैं एक घंटे में वापस आ जाऊंगा।”

“ठीक है, फिर आज ठंडा खाना ही खाना। मैं सो जाऊंगी,” वह खीझते हुए बोली।

लेकिन नलिन को अपनी सालगिरह याद थी। कैसे भूल सकता था वह इसे। मृगा के प्यार ने उसकी जिंदगी बदल दी। वह उसे सरप्राइज देना चाहता था, इसीलिए घर जल्दी आया था। पर हीरे का नेकलेस जो मृगा के लिए वह लाने वाला था, उसे दुकान पर ही भूल आया था। ‘कितना अच्छा लगेगा मृगा की नाजुक गर्दन पर वह पेंडेंट,’ सोचकर वह मुस्कराया। वह बेशक बहुत ज्यादा नहीं बोलता, लेकिन मृगा के दिल की बातें समझता है। उससे बहुत प्यार करता है।

नलिन के जाने के बाद गुस्से से मृगा स्टडी में जाकर कीबोर्ड पर उंगलियां चलाने लगी। उसका इंतजार करने से तो बेहतर है काम कर ले, ताकि गुस्सा शांत हो जाए, यही सोचकर वह लैपट़ॉप खोलकर बैठ गई थी। शाम से आसमान पर काले बादल छाए हुए थे। लग रहा था कि बहुत तेज बारिश होगी। और बारिश के मौसम में उसे नलिन की बांहों में बंधे रहना बहुत अच्छा लगता है। रोमांटिक हो जाती थी वह तब।

थोड़ी देर बाद उसे एहसास हुआ कि बेडरूम में टीवा चल रह है। वह उसे बंद करने ही लगी थी कि तभी एनाउंसर ने कहा, "ब्रेकिंग न्यूज! मुंबई फिर से धमाकों से हिल गया। मुंबई के जवेरी बाजार में बम धमाका। हीरे के व्यापार के लिए प्रसिद्ध जवेरी बाजार में अज्ञात लोगों ने बम फेंका। हमारी नजर लगातार इस खबर पर बनी हुई है, कहीं जाइएगा नहीं। जुड़े रहिए हमारे न्यूज चैनल से जो आपको देता है पल-पल की खबर।"

एनाउंसर बोल रही थी, टीवी स्क्रीन पर तस्वीरें दिखाई जा रही थीं। आग की लपटें चारों ओर उठ रही थीं। मृगा सुन्न हो गई। वह चिल्लाना चाहती थी, पर जैसे वह गूंगी हो गई। अचानक उसके जड़ होते शरीर ने हरकत की। फोन बज रहा था। उसने मोबाइल फोन उठाया। किसी बैंक से फोन आ रहा था।

उसने उसे काटकर नलिन का नंबर डायल किया। फोन बज रहा था। वह नलिन की आवाज सुनना चाहती थी। उसकी आंखें धुंधला गईं। उसे लगा शायद उसने की गलत नंबर मिला दिया है। उसने दुबारा नंबर डायल किया।

तभी दरवाजे की बेल बजने से उसके भीतर का हाहाकार शांत हुआ। कौन हो सकता है? कोई बुरी खबर? लेकिन बेल लगातार बज रही थी।

उसकी धुंधलाती आंखों में आशा की किरण चमकी। उसने दौड़कर दरवाजा खोला और सामने नलिन को देखकर उससे लिपटकर रोने लगी।

“सालगिरह मुबारक हो,” नलिन ने उसे चूमते हुए, नेकलेस पहनाते हुए कहा। “आधे रास्ते पहुंचकर मुझे याद आया कि मैंने दुकान में काम करने वाले लड़के से नेकलेस के डिब्बे को कार के डैशबोर्ड में रखने को कहा था। इसीलिए लौट आया। पर तुम क्यों रो रही हो? सॉरी, मुझे सालगिरह याद थी, पर तुम्हें सरप्राइज देना चाहता था, इसलिए सुबह तुम्हें विश नहीं किया। इस दिन को मैं कैसे भूल सकता हूं।”

मृगा रोए जा रही थी। टीवी पर खबर चल रही थी। नलिन ने रिमोट उठाया और टीवी बंद कर दिया। बहुत तेज बारिश होने लगी। मृगा ने नलिन को कसकर अपनी बांहों में बांध लिया।

- सुमन बाजपेयी

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