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आई लव यू पायल, सारी सीमाएं तोड़ मोहित ने कहा:आप शादीशुदा नहीं होतीं, तो आपसे ही शादी करता, पायल ने जोर से चांटा मारा, वह कल से स्कूल नहीं आया

3 महीने पहले
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अच्छा यह बताओ आज हर बात पर आप मुस्कुरा क्यों रही हो? प्रिया ने पायल को झकझोरते हुए कहा। पायल मुस्कुरा कर रह गई, आदतन प्रिया ने दांत किटकिटाते हुए बनावटी गुस्से में चिल्ला कर पूछा- बता दो की तुम इतना क्यों मुस्कुरा रही हो? पायल अब पत्रिका से मुंह ढक कर हंसने लगी, प्रिया उसके पैरों पर सिर रख ज़मीन पर बैठ गई...मेरी अम्मा, मेरी दीदी,मेरी बहन जी...प्लीज बता दो!..मनुहार करते उसकी आंखें भर आईं।

पायल को दया आ गई,सिर पर हाथ रख कर दुलारते हुए कहा...तुम बहुत जिद्दी लड़की हो, हठ कर बैठ जाती हो किसी भी बात पर, उसका गाल सहलाते हुए वह फिरसे मुस्कुरा उठी।

इस बार प्रिया ने तुनक कर कह ही दिया...आपको बताना ही होगा,ऐसे तो आपको पिछले आठ सालों में अकेले बैठकर मुस्कुराते नहीं देखा। गले में हाथ डाल कर कहा....पता है, ऐसे लड़कियां प्रेम होने पर मुस्कुराती हैं।

पायल को जैसे हजारों वॉल्ट का करेंट का झटका एक साथ लगा हो, वह सिहर उठी, यह पच्चीस साल की लड़की इतनी अनुभवी है कि मन के कोने में उपजी एक मध्यम सी लकीर जो होठोंं तक अनायास खिंची चली आ रही है, उसको पढ़ लेती है। वह झट पत्रिका को समेट पर्स में रख खड़ी हो गयी। पायल पैर पटकती उसके पीछे पीछे चलने लगी...बता दीजिए न प्लीज पायल मैम!

पायल के चेहरे पर तनाव उभर आया था, उसने लम्बी सांस लेते हुए कहा, "आज एक कहानी पढ़ी,उसी को सोच- सोच कर मुग्ध हो रही हूं प्रिया।" प्रिया ने मुंह बनाते हुए....बस इतना ही,बक्क! आप बहुत खराब हैं।मैंने तो सोचा...पायल उसके मुंह से अगला शब्द निकले उससे पहले ही उसे रोकने लगी। प्लीज प्रिया,एक भी फालतू शब्द मत बोलना,जानती हो यहां दीवारों के कान हैं और मैं बेमतलब मुसीबत में पड़ जाउंगी।

प्रिया का दिल धौंकनी की तरह धड़क रहा था...माथे से पसीने की बूदें टपकनें लगीं, पेट में गुड़गुड़ाहट होने लगी...घबराहट और बेचैनी में वह सामने के खंडहर हो चुके क्लास रूम में आकर दीवार की टेक लेकर खड़ी हो गयी। आज उसे झाड़ झंखाड से भरे इस कमरे में बिल्कुल डर नहीं लग रहा था...उस भयानक से कमरे की दीवार से चिपकी रोए जा रही थी। उधर, प्रिया उसे खोज कर जब थक गयी, तो क्लास में जाकर बच्चों को पढ़ाने लगी।

आज मोहित स्कूल नहीं आया था, मोहित पिछले साल स्कूल में आया नया शिक्षक,जैसा नाम वैसा ही स्वाभाव।सभी को अपने आकर्षक व्यक्तित्व और विनम्र स्वभाव से मोहित कर लेता।शुरू में सभी को लगा कि मोहित प्रिया को पसन्द करता है। पायल ने एक दिन कह भी दिया कि प्रिया तुम्हारी और मोहित की जोड़ी बहुत सुन्दर लगेगी.. प्रिया ने लम्बी सांस लेते हुए पायल से कान में कहा था, मोहित आपको पसन्द करता है। पायल ने प्रिया को उस दिन बहुत डांटा था।वह समझ ही नहीं पा रही थी, वह मोहित को कैसे समझाए कि वह जो कहता फिरता है सबके सामने वह एक दिन उसके जीवन में तूफान खड़ा कर सकता है।

मोहित पायल से इतना प्रभावित रहता था कि उसे दर्द निवारक मैम कह कर हंस पड़ता। चाहे कितनी मुश्किलें सामने हो पायल धैर्यपूर्वक उसका हल खोज निकालती। चाहे बच्चों की समस्या हो या शिक्षकों की वह कुछ न कुछ करके सब ठीक कर लेती। उसके पास हर समस्या का समाधान रहता..हर मुश्किल उसे सुनाकर माेहित हल्का हो लेता, ऐसी पायल अपने अन्दर के असीम तूफान को समेटे हर पल मुस्कुराते हुए सबसे मिलती और मोहित मुग्ध होकर उसे गुनगुनाता रहता। एक दिन तो मोहित ने इतना तक कह दिया कि यदि आप शादीशुदा नहीं होतीं, तो आपसे ही शादी करता और परसों उसने सारी सीमाएं तोड़ते हुए पायल से कह ही दिया..आई लव यू पायल्, पायल ने उसे जोर से चांटा मारा था..वह कल से स्कूल नहीं आया। पायल को छोड़ इस बात की जानकारी किसी को नहीं थी। हां प्रिया जरूर मोहित का पक्ष जानती थी और पायल को छेड़ती रहती थी।

पायल के जीवन का यह साल भी अजीब था, शादी के एक दशक खत्म होने को हैं, और चल रहा ये सब,जैसे हर आम औरत की दुनिया में चलता है। जिस उम्र में प्रेम के कोंपल फूटते हैं, उस उम्र में कुछ बनने की धुन में वह लड़कों की तरफ देखती तक नहीं। दिल के बंजर ज़मीन पर कभी प्रेम के अंकुर नहीं फूटे और अब जो घट रहा था, वह अजीब था.।..शादी होनी थी, हुई...पति के लिए वह जरूरत थी,समाज के लिए एक सुखी परिवार, बच्चे ,पति, घर परिवार से घिरी एक औरत जिसे जरूरत की किसी चीज की कमी नहीं थी, वह आखिर क्यों नहीं खुलकर हंसती नहीं थी? उसे खुश रहना चाहिए... औरत को उसी में खुश रहना है और क्या चाहिए उसे। खाओ पहनो घूमों और चुपचाप सबकी जरूरतें पूरी करती रहो।

उसे याद आता है कि काजल उसे देख कैसे बिफर पड़ी थी...क्या पायल! तुम्हारे जैसी जहीन लड़की ने अपना क्या हाल बना रखा है?जानती हो! हम तो तुम्हें लेकर इतने आश्वस्त थे कि तुम हमारे बैच से जरूर आई.ए.एस.बनोगी और तुम आज क से कबूतर पढ़ा कर खुश हो।कहां मर गयी तुम्हारे भीतर की वह प्रिया जो अपनी पहचान खुद बनाने में यकीन रखती थी।आई हेट यू प्रिया! उसने नम आंखों से अन्तिम वाक्य कहा था...तुम हम सब की आदर्श थी और आज क्या से क्या हो गयी।

क्या से क्या होना ही तो स्त्री होने की त्रासदी थी...वह बहना चाहती थी पहाड़ी अल्हड़ नदी की तरह और उसे घर के अंधेरे कुएं में कैद कर दिया गया। वह उड़ना चाहती थी चहचहाते परिंदों की तरह और उसके पर कतर करके ब्याह कर दूर देश भेज दिया गया। वह घर की दीवारों पर बहुरा के दिन जब भित्ति चित्र उकेरती, लोग उसमें बड़ा चित्रकार देखते। वह जब प्रार्थना में गाती...हमको मन की शक्ति देना, संगीता शिक्षिका उसमें गायिका की संभावनाएं देखतीं। जब वह स्कूल के मंच पर नृत्य करती सखियां, उसमें सफल नर्तकी देखती। क्या कुछ नहीं था, उसमें और सब कुछ खत्म होने को था। जो शेष था उसे छात्रों में बांटती, वह खुश थी कि किसी ने कान में यह कह उसे फिर से जिन्दा कर दिया था कि मुझे तुम्हारी प्रतिभा से प्रेम है।

प्रेम कितना रूमानी शब्द है उसने तीस की उम्र में आकर जाना,....पायल खुद को बार -बार झिड़कती है।पागल हो! अब जानकर भी क्या करना।सब खत्म हो जाएगा तुम्हारे चेहरे पर गुलाबी रंग उभरते। वह रोते -रोते थक चुकी थी...उस खण्हर हो चुके कमरे की दीवार पर शिव का चित्र किसी पेंटर ने कभी बनाया होगा...चित्र धुंधला हो चुका था।शिव उसके इष्ट.. वह उनकी आंखों में आंखे डालकर बुदबुदा उठती...आपने एक बार विष पीया महादेव! हम रोज पीते हैं और आकंठ विष से भरी हुई हम स्त्रियों का कंठ कोई नहीं देखता।आप तो देव संस्कृति के एकमात्र साम्यवादी देवता हैं, अर्द्धनारीश्वर! ..आपकी दुनिया में हमसे केवल प्रेम किया जा सकता है, कभी भी,कहीं भी,किसी हाल में,किसी उम्र में। प्रेम का रंग आपकी दुनिया में चाहे जितना लाल और गुलाबी हो,हमें तो केवल प्रेम में विषपान मिला...हलाहल।देखिए तो कितनी स्याह हो चुकी हूं मैं, हां मुझे प्रेम हुआ है... एक गुनाह जिसका परिणाम बस विष है और मैं विषपान कर रही हूं।मैं इस बार जीना चाहती हूं ...जी भर जीना।हां मैं प्रेम में हूं..प्रेम मेरा मौलिक अधिकार। वह रोए जा रही थी..

प्रिया का घंटा खत्म हुआ,तो वह पायल को खोजने लगी।दोनों बहुत अच्छी दोस्त थीं और एक ही स्कूल में टीचर भी।दोनों एक दूसरे की हमराज... आज जो हुआ उससे प्रिया भी असहज थी।वह चारों तरफ खोज कर थक गई,उसे खयाल आया कि वह दोनों जब कुछ खास बातें करतीं, तो विद्यालय के पुराने हिस्से में चली आतीं जो वीरान हो चुका था। वह भागती हुई आई और सभी कमरों में तलाश लेने के बाद पीछे के कमरे में पहुंची। पायल को सिसकते देख उससे लिपट गयी...पायल ने उसे गले से लगाकर धीरे से कहा...हां मुझे प्रेम हो गया है,एक गुनाह।मैंने प्रेम का ज़हर पी लिया है प्रिया!..देखो न...उसे झकझोरते हुए। मैं स्याह पड़ती जा रही हूं।इस उम्र का प्रेम विषपान ही तो है एक शादीशुदा स्त्री के लिए। वह रोए जा रही थी। प्रिया ने अपनी पूरी ताकत से उसे अपनी बांहों में भर लिया और मुंह पर हाथ रख दबा दिया...चुप हो जाइए पायल मैम! यहां दीवारों के कान हैं।प्लीज चुप हो जाइए...दोनों बेतहाशा रो रही थीं। यही हासिल था एक स्त्री को प्रेम में...दोनों जल रहीं थी, उस आग मेंं जो आकण्ठ विष बन जल रहा था। स्त्रियां प्रेम में बार- बार नीलकण्ठ होती हैं, पर किसी सभ्यता की दीवार पर उनके चित्र नहीं मिलते उस रूप में।

-सोनी पांडेय

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