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E-इश्क:उसकी निगाह मानसी पर रुक गई, घुंघराले बालों वाली ये बिंदास सी लड़की उसे अंदर क्यों बुला रही थी

4 महीने पहले
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रेनड्रॉप्स कैफे की खिड़की पर गिरती बूंदों के पीछे से मानसी ने जोर से दो-तीन बार नॉक किया। खिड़की के बाहर खड़े लड़के को शायद सुनाई नहीं दिया। मानसी ने इस बार जोर से थपथपाया, तो लड़के ने मुड़कर खिड़की में देखा। ग्लास की खिड़की से घुंघराले बालों वाली एक लड़की अंदर आने का इशारा कर रही थी। लड़के को कुछ समझ नहीं आया। वो ग्लास के करीब आकर अंदर झांकने लगा। मानसी थोड़ा पीछे हट गयी। कैफे अंदर से बहुत खूूबसूरत था, पर उसकी निगाह मानसी पर रुक गयी। घुंघराले बालों वाली ये बिंदास सी लड़की उसे अंदर क्यों बुला रही थी? वो अपना बैग और गिटार उठाकर गली से कैफे का चक्कर लगाते हुए मेन गेट की तरफ आया। सफेद रंग की दीवार के बीच नीले रंग का दरवाजा था। ऊपर बोर्ड लगा था ‘रेनड्रॉप्स कैफे’, अंदर जाते ही उसे एहसास हुआ कि ये नाम क्यों रखा गया था? कैफे के अंदर कुछ कुछ हिस्से नेचुरली खुले रखे गए थे, जहां से बारिश की बूंदें नीचे बनी क्यारियों में गिरतीं। उन गिरती हुई बूंदों की आवाज और उन्हें देखने का एहसास लाजवाब था।

उसकी नजर घुंघराले बालों वाली लड़की को ढूंढ रही थी। इतने में कैफे के आखिरी कोने में बने काउंटर से आवाज आयी,

“कम ऑन!”

उसने देखा एक सफेद टैंक टॉप और काली योगा पैंट पहने लड़की उसे बुला रही थी। वो उसी की तरफ चलने लगा। लड़की ने सिर पर कपड़े का एक स्टाइलिश हेडबैंड पहन रखा था। वो पहचान गया। ये वही लड़की थी जिसने उसे खिड़की से अंदर बुलाया था।

“हाय, आई एम मानसी,” लड़की ने रुद्राक्ष की माला वाला हाथ आगे बढ़ाया।

“हेलो, आई एम टोनी,” लड़के ने हाथ मिलाना चाहा, पर उसे समझ नहीं आया गिटार और बैग कहां रखे।

“कोई बात नहीं, आप इन्हें वहां पर रख सकते हैं।” मानसी ने काउंटर के पास की खाली जगह की तरफ इशारा किया और बोली, “तुम यहां किसी भी टेबल पर बैठ सकते हो।”

“लेकिन मुझे आपने अंदर क्यों बुलाया?”

“अरे! तुम बाहर बारिश में भीग रहे थे। मेरी नजर पड़ी तो मुझे लगा अंदर बुलाना चाहिए। वैसे तुम वापस जाना चाहो तो जा सकते हो,” मानसी ने मुस्कुराते हुए कहा।

“ओह प्लीज, ऐसा नहीं है। मैं बारिश रुकने का इंतजार कर रहा था, मगर और बढ़ती जा रही थी।”

“मुंबई की बारिशें ऐसी ही तो होती हैं। लगता है तुम मुंबई से नहीं हो?”

“मैं गोवा से हूं, आज ही मुंबई आया हूं। एक दोस्त से काम के सिलसिले में मिलने जा रहा था कि बारिश शुरू हो गयी।”

“ओह, तो तुम गोवा से हो? मैं गयी हूं कई बार। बहुत खूूबसूरत जगह है।”

“हां, है तो सही, मगर आपका ये कैफे कम खूबसूरत नहीं। मुझे तो अंदर आते ही लगा जैसे दूसरी दुनिया में आ गया हूं। कितनी ग्रीनरी है अंदर।”

“थैंक यू! बारिश, खाना और गार्डनिंग ये तीनों मुझे हमेशा से पसंद हैं, तो सोचा पैशन को प्रोफेशन बना लिया जाए।”

“सुनकर ही कितना अच्छा लग रहा है। काश! सब लोग इतने लकी होते कि अपना पैशन फॉलो कर पाते।” टोनी की आवाज में थोड़ी सी उदासी झलकी।

“आओ, वहां बैठ कर बातें करते हैं,” मानसी ने किताबों की रैक के पास वाली एक टेबल की तरफ इशारा किया। टेबल के पास से बोगनवेलिया की बेल ऊपर की तरफ जा रही थी, जहां पर एक पतला जाल लगा था, जिसमें से पानी की बूंदें अभी भी रिमझिम बरस रही थीं।

“क्या पिओगे?” मानसी ने मेन्यू उसकी और बढ़ाया।

“एक गरम कॉफी मिल जाए बस।”

“वो तो मिल ही जाएगी, ये बताओ कॉफी के साथ खाने में क्या लोगे?”

“कुछ भी जो अच्छा हो।”

“अच्छा? ये रेनड्रॉप्स कैफे है, यहां पर सब अच्छा ही होता है,” कहते हुए मानसी जोर से हंसी। उसने हंसते हुए कहा, “वैसे गार्लिक ब्रेड पसंद है मुझे, खाओगे?”

टोनी ने मुस्कुराकर हां में सिर हिलाया। मानसी कुर्सी से उठकर किचन की तरफ गयी। टोनी ने एक बार फिर से कैफे को गौर से देखा। नीले और सफेद रंग की कुर्सियां। टेबल पर रखे रंगीन फूलों के गुलदस्तें, दीवारों पर बादलों की पेंटिंग। सब कुछ इतना सम्मोहित कर देने वाला था। उसे याद आया गोवा का अपना घर, जो था तो इतना ही कलरफुल, मगर उसमें रंग ऐसे खिलते हुए नहीं थे।

मानसी वापस आयी तो उसके हाथों में एक वुडन ट्रे थी। कॉफी मग में से धुआं उठ रहा था।

मानसी ने बैठते ही पूछा, “तुम पैशन के बारे में कुछ कह रहे थे। गिटार देखकर लग रहा है सिंगर हो। मुंबई में पैशन फॉलो करने आए हो?”

टोनी बगीचे के बीच गिरती हुई बारिश की बूंदों को देखने लगा। मानसी को लगा उसके इस सवाल ने टोनी को परेशान किया है।

उसने बात ठीक करने की कोशिश की, “अगर नहीं बताना चाहो तो कोई बात नहीं।”

“नहीं, ऐसा कुछ नहीं, सोच रहा हूं कहां से शुरू करूं! एक्चुअली गोवा में हम पांच दोस्तों ने मिलकर एक बैंड बनाया था। एक क्लब में फ्राइडे पार्टीज में गाने का मौका मिला तो हम लोग गाने लगे। फिर एक दिन पापा को पता चला तो वो नाराज हो गए। उन्हें मेरा गिटार बजाना पसंद नहीं। उन्हें लगता है म्यूजिक से पैसा नहीं कमाया जा सकता है, जो एक बेहतर जिंदगी जीने के लिए बहुत जरूरी है।”

“हम्म!” मानसी ने कॉफी का घूंट लिया।

“पापा बताते नहीं हैं, लेकिन मैं जानता हूं उन्हें म्यूजिक से कितना प्यार है। मैं जब छोटा था तो घर में एक ट्रम्पेट रखा होता था। पता नहीं क्यों बाद में वो कहीं मिला नहीं। घर में कोई इसके बारे में बात भी नहीं करता। खैर, अब यहां मुंबई आया हूं। जॉब की तलाश में, कोई अच्छा काम मिल जाए तो पापा भी खुश होंगे।”

“जानते हो टोनी, तुम्हारे पापा बिल्कुल सही कहते हैं। पैसा जरूरी है जिंदगी के लिए। मुझे भी ऐसा ही लगता है।”

“तुम ऐसा कह रही हो? जो अपने पैशन को फॉलो करके यहां तक पहुंची हो।”

“सब कुछ वैसा नहीं होता टोनी जो हमें दिखायी देता है। तुम आज जिस मानसी से मिल रहे हो वो अलग है। आज से पांच साल पहले मिलते तो मैं तुम्हें किसी बैंक में जॉब करते हुए मिलती। मेरे पापा भी बहुत खुश हुए थे जब मुझे जॉब मिली थी। एक साल काम करने के बाद लगा कि ये वो नहीं है जो मैं चाहती थी। दोस्तों से बात की तो सबने कहा इसी में सिक्योरिटी है। इसे छोड़ना बेवकूफी होगी। पर मुझे लगता है, लाइफ में कई बार बेवकूफियां करना ज्यादा समझदारी का काम होता है। मैंने जॉब छोड़ दी!”

“सीरियसली? तुमको जॉब मिली और छोड़ दी? तुम्हारे पापा ने कुछ कहा नहीं?”

“कहा ना, पापा बहुत नाराज हुए। कुछ दिन बात नहीं की। वो भी सही थे अपनी जगह, मेरे पास कोई ऑप्शन नहीं था। मुझे खुद पता नहीं था क्या करूंगी, कैसे करूंगी। बस इतना पता था कि बचपन से मैं सोचती थी समंदर किनारे एक कैफे होना चाहिए मेरा। पापा से बात की, मगर वो नहीं माने। फिर मैंने एक कैफे में नौकरी की। वहां कई तरह की डिशेज बनाना सीखा, कैफे कैसे ऑपरेट होता है, सब सीखा और एक पूरे प्रोजेक्ट प्लान के साथ पापा से मिली।”

टोनी हैरानी से मानसी को सुन रहा था। उसे ये सब बहुत दिलचस्प लग रहा था।

मानसी ने कहना जारी रखा, “पापा के सामने मैंने पूरे कॉन्फिडेंस के साथ अपनी बात रखी, तो वो मना नहीं कर पाए। उन्होंने हमारा घर बेचा और मुझे पैसे दिए। कुछ दिन हम किराए के घर में रहे। अब ये कैफे तो मेरा है ही, साथ ही एक घर भी है जो इस कैफे ने वापस दिला दिया।” कहते हुए मानसी की आंखों में एक चमक थी।

“जानते हो, जब मैं ये जगह देखने आयी थी उस दिन भी बहुत तेज बारिश हो रही थी। मेरा छाता उड़कर समंदर किनारे तक चला गया था। जब भी बारिश आती है मेरे साथ कुछ अच्छा होता है।”

टोनी के चेहरे पर मुस्कुराहट थी। वो मानसी की बातों में खो सा गया था। उसे मानसी बहुत सुलझी हुई और कॉंफिडेंट लगी। वो अपनी जगह से खड़ा हुआ और बोला, “क्या मैं तुम्हें हग कर सकता हूं?”

“उम्मम्म! ओके,” मानसी ने थोड़ा रुक कर कहा।

टोनी आगे बढ़ा और उसने मानसी को गले लगा कर कहा, “कई बार लाइफ में कुछ चीजें इसलिए भी होती हैं कि उनका होना हमारे लिए बहुत जरूरी होता है। मेरा मुंबई आना, इस बारिश में यहां रुकना, तुम्हारा मुझे बुलाना। मैं बता नहीं सकता ये सब कितना जरूरी था मेरे लिए। थैंक यू सो मच मानसी!”

“थैंक्स कहना है तो मुझे नहीं, इस बारिश को कहो, जिसकी वजह से हम मिल पाए।”

टोनी ने कैफे के बीच बने छोटे से पोंड में गिरती हल्की-हल्की बूंदों को देखा और आंखें बंद करके कहा, “शुक्रिया बारिश!”

वो मानसी की तरफ पलटा और बोला, “अच्छा तो अब मैं चलता हूं, बारिश कम हो गयी है। इंटरव्यू के लिए भी जाना है। मैं आज का दिन हमेशा याद रखूंगा।”

“और मैं तुमको हमेशा याद रखूंगी,” मानसी ने मुस्कुराते हुए कहा।

दोनों उठ कर बाहर की तरफ चल पड़े। कैफे से बाहर निकलते ही टोनी ने मानसी से हाथ मिलाया और बाय कहकर जाने लगा। इतने में उसने पीछे से आती मानसी की आवाज सुनी, “तुम चाहो तो मेरे कैफे में हर शाम गिटार बजा सकते हो।”

टोनी ने पीछे मुड़ कर देखा, मानसी मुस्कुरा रही थी। टोनी की आंखों से आंसू लुढ़क कर गाल पर आ गिरे। उसके दिल में गिटार बजने लगा। बाहर भले ही बारिश थम गयी थी, मगर उसके भीतर अभी आसमान बरस रहा था।

- कुश वैष्णव

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