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E-इश्क:पैंतीस साल की उम्र में किसी को लगातार देखते रहने की चाह उसके मन में पहली बार जगी थी

6 महीने पहले
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“एक्सक्यूज मी,” एक मधुर स्वर उसके कानों में पड़ा और सीधे उसके दिल के तारों को झंकृत कर गया। लगभग तीस-बत्तीस वर्ष की एक महिला उसके सामने खड़ी थी। एकदम परफेक्ट फीगर, …पर्पल कलर की शिफॉन की प्रिंटेड साड़ी और स्लीवलेस ब्लाइउज पहना हुआ था। गले में मोतियों की माला थी और कंधे पर डिजाइनर बैग झूल रहा था। होंठों पर लगी हल्की पर्पल लिपस्टिक, एक अलग ही लुक दे रही थी। नफासत और सौंदर्य… दोनों एक साथ। …कुछ पल उस पर नजरें टिकी ही रह गईं।

“एक्सक्यूज मी, क्या सरक कर बैठ सकते हैं? और कोई बेंच खाली नहीं है,” उसने बहुत ही तहजीब से कहा।

“या श्योर,” समर ने सरककर उसके लिए जगह बना दी। बेंच पर पड़ी बर्फ को उसने टिश्यू पेपर से साफ किया और अपनी लटों को हाथों से पीछे धकेलते हुए बैठ गई। मनाली की सड़कों पर सैर करते-करते वह सुंदर नजारों को जी भर देखने के ख्याल से एक बेंच पर बैठ गया था। ऑफिस की रुटीन लाइफ से ऊब कर वह यहां घूमने चला आया था। ऊब से ज्यादा अकेलापन उस पर हावी रहता था।

बार-बार उसका ध्यान उसी पर जा रहा था। पता नहीं मोबाइल पर क्या चेक कर रही थी। बहुत चाहा उसने कि उसे न देखे, पर दिल था कि जैसे उसी की ओर खिंचा जा रहा था। अपनी खुद की पैंतीस साल की जिंदगी में किसी को लगातार देखते रहने की चाह इससे पहले कभी उसके अंदर इतनी तीव्रता से उत्पन्न नहीं हुई थी।

वेल सेटेल्ड और कल्चर्ड फैमिली का होने के बावजूद न जाने क्यों उसे अभी तक सही लाइफ पार्टनर नहीं मिल पाया था। कभी उसे लड़की पसंद नहीं आती, तो कभी उसके मां-बाप को, तो कभी लड़की के बैकग्राउंड से दादी को आपत्ति होती। ऐसा नहीं था शादी को लेकर उसने कोई सेट रूल्स बना रखे थे। लड़की पसंद करने की कोशिश 35 साल तक भी किसी तरह के निर्णय पर नहीं पहुंच पाई थी। धीरे-धीरे रिश्ते भी आने कम हो गए थे। कोई पूछता कि कैसी लड़की चाहिए तो वह कहता, ‘मेरे मन में कोई छवि तो नहीं है उसकी, बस जैसी मुझे चाहिए, जब वह सामने आएगी तो मैं खुद ही आप लोगों को बता दूंगा।’

कोई मैसेज आया और वह बेंच से उठ गई। एक स्वाभाविक मुस्कान उसके चेहरे पर खिली हुई थी। समर को सिहरन सी महसूस हुई। उसे लगा मानो मिल्स एंड बून्स का कोई किरदार पन्नों में से निकलकर उसके भीतर समा गया हो।

काश! फिर से मुलाकात हो जाए। अगले दिन भी वह उस सड़क से गुजरा। अपने ऊपर हंसी भी आई। कोई पहचान नहीं है, पता भी नहीं कि यहीं रहती है या किसी दूसरे शहर से आई है और वह उससे मिलने की आस संजो रहा है। अगला दिन भी उसने उसी सड़क को नापते हुए गुजार दिया। मनाली घूमा तक नहीं। शॉपिंग भी तो करनी है बहन और मम्मी के लिए। वह एक म़ॉल में घुस गया।

नए साल का स्वागत करने के लिए हर तरफ जगमगाहट थी। जो समझ आया खरीद लिया। गर्माहट लेने के इरादे से वह कैफे में बैठ कॉफी पीने लगा। एक घूंट भरा ही था कि वह अंदर आती दिखी। हाथों में बहुत सारे पैकेट थे। आज मैरून कलर का कुरता और क्रीम कलर की लैगिंग्स पहन रखी थीं उसने। कानों में डैंगलर्स लटक रहे थे जो बीच-बीच में उसकी लटों को चूम लेते थे। संयोग की बात कि सारी टेबल भरी हुई थीं। वह बिना झिझके उसके सामने वाली कुर्सी पर आकर बैठ गई।

कॉफी का आर्डर देने के बाद वह अचानक बोली, “आई होप मेरे यहां बैठने से आपको कोई प्रॉब्लम नहीं होगी।”

“इट्स माई प्लैजर।”

“ओह रियली,” उसके कहने के अंदाज में व्यंग छिपा था।

“वैसे आपको शायद पसंद नहीं कि कोई लाइफ में आपको डिस्टर्ब करे। अपने हिसाब से फैसले लेना पसंद करते हैं आप।”

हैरानी, असमंजस जाने कैसे-कैसे भाव उसके चेहरे पर उतर आए।

“आप परेशान न हों, समर मल्होत्रा। मैंने तो उसी दिन आपको पहचान लिया था। संयोग देखिए, फिर आपसे मुलाकात हो गई। सोच रही हूं आज बरसों से दबा गुबार निकाल ही लूं। हो सकता है आपने मुझे पहचाना न हो या फिर आप ऐसा जरूरी न समझते हों, पर मैं आपको भूल नहीं पाई। अब तक तो आपको अपना परफेक्ट लाइफ पार्टनर मिल ही गया होगा। अच्छा ही है, वरना बेवजह लड़कियों को रिजेक्ट करने का सिलसिला नहीं रुकता।”

“हम पहले कहीं मिल चुके हैं क्या?” समर ने सकुचाते हुए पूछा। वह कहां तो उससे मुलाकात हो जाने की कामना कर रहा था और कहां अब वही कह रही थी कि वह उसे जानती है। इतना ही नहीं, उसे एक तरह से कठघरे में ही खड़ा कर दिया था।

“हम मिले तो नहीं हैं, पर हमारा परिवार अवश्य ही एक-दूसरे से मिला है। थोड़ा दिमाग पर जोर डालें तो याद आ जाए शायद कि एक बार आपके घरवाले मेरे घर आए थे। दिल्ली में शाहजहां रोड पर रहते थे तब हम। पापा आईएएस अफसर थे। हमारी शादी की बात चली थी। आपके घरवालों को मैं पसंद आ गई थी। आपकी फोटो दिखाई थी उन्होंने मुझे। वे तो जल्दी से जल्दी शादी की डेट तक फिक्स करने को तैयार हो गए थे। फिर तय हुआ कि आपके मुझसे मिलने के बाद ही आगे की बात तय की जाएगी। मैं खुश थी और मेरे मम्मी-पापा भी कि इतने संस्कारी और शिक्षित लोगों के यहां मेरा रिश्ता तय हो रहा है। हम मिल पाते उससे पहले ही पापा पर किसी ने फ्रॉड केस बना दिया। आपकी दादी ने फोन पर खूब सुनाया कि ऐसे घर में जहां बाप बेईमानी का पैसा लाता हो हम रिश्ता नहीं कर सकते हैं। पापा ने बहुत समझाया कि उन्हें फंसाया गया है पर उन्होंने एक न सुनी। मुझे दुख हुआ, इसलिए नहीं कि आपसे रिश्ता नहीं हो पाया, बल्कि इसलिए कि बिना सच जाने इल्जाम लगाकर आपकी दादी ने मेरे पापा का अपमान किया था। पापा तो खैर बेदाग साबित हुए, पर मेरा रिश्ता टूटने का गम सह नहीं पाए और चले गए इस दुनिया से...”

उसकी आंखों में आंसू थे और समर को समझ नहीं आ रहा था कि उसकी बात का क्या जवाब दे।

वो अपनी रौ में बोले जा रही थी, “हमारे समाज में किसी लड़की को रिजेक्ट कर देना आम बात है, पर कोई एक बार भी नहीं सोचता कि इससे उसके मन पर, उसके घरवालों पर क्या बीतती होगी। आपको कोई रिजेक्ट करे तो कैसा लगेगा समर मल्होत्रा?”

“मेरा यकीन करो…...”

“मेरा नाम विधि है।”

नाम सुनकर समर को लगा कि जैसे घर में उसने कई बार इस नाम को सुना था। मम्मी-पापा, भाई-बहन, यहां तक कि दादी के मुंह से भी। वह भी कई बार कि लड़की तो वही अच्छी थी, पर उसका बाप... मम्मी भी उलाहना देती थीं कई बार दादी को। “अब तक जितनी लड़कियां देखी थीं, समर के लिए वही मुझे सबसे अच्छी लगी थी।”

“विधि, सच में मुझे कोई जानकारी नहीं है। हालांकि घर में अक्सर तुम्हारी बात होती थी, पर तुम मेरे लिए किसी अनजान चेहरे की तरह थीं। आई एम सॉरी, मेरे परिवार वालों की वजह से तुम्हें अपने पापा को खोना पड़ा और इतना अपमान सहना पड़ा। पर...” कहते-कहते रुक गया समर। आखिर कैसे कहता कि जब से उसे देखा है, वही उसके दिलो-दिमाग पर छाई हुई है। अब उसने ही उसे रिजेक्ट कर दिया तो क्या होगा…।

“पर क्या समर मल्होत्रा? मुझे आपकी सॉरी नहीं चाहिए। चलती हूं, कल सुबह वापसी है। आई होप फिर हमारी मुलाकात...” समर जल्दी से बोला, “एक मौका भूल सुधार करने का तो हर किसी को मिलता है। यह मेरा कार्ड है। फेसबुक पर आपको ढूंढकर फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजूंगा। प्लीज विधि, एक्सेप्ट कर लेना। विश्वास है कि आप रिजेक्ट नहीं करेंगी।” समर ने अपना विजिटिंग कार्ड उसे थमाते हुए कहा। “नए साल में नई शुरुआत की जा सकती है। पुराना सब कुछ भुलाकर।”

कार्ड लेते हुए विधि ने अपने शॉपिंग बैग उठाए और बाहर जाने के लिए पलटी। तभी उसके डैंगलर ने उसकी बालों की लटों को यूं छुआ और लटें इस तरह हिलीं मानो कह रही हों इस बार एक्सेप्ट आपको करना है।

समर बाहर आया तो देखा हैप्पी न्यू ईयर का बोर्ड बहुत सारे बल्बों के बीच झिलमिल कर रहा है।

- सुमन बाजपेयी

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