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अरे! क्या हुआ, संतोष ने कहा:सब ठीक तो है, दो दिनों से पापा और मम्मी का फोन आ रहा है, घर बुला रहे हैं-वंदना बोली

2 महीने पहले
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आज तुम ऑफिस के बाद क्या कर रहे हो- वंदना ने संतोष से कहा। संतोष और वंदना दोनों कनॉट पैलेस में अलग-अलग ऑफिस में काम करते हैं। दोनों के ऑफिस में कुछ कदम की दूरी है। आज वंदना को ना जाने क्या हुआ है? सुबह से बेचैन है। वह अपने मन की बात किससे करे ये सोच रही थी, तभी उसे संतोष का ख्याल आया। संतोष बहुत सुलझा लड़का है। वंदना से उसकी दोस्ती ऑफिस आते जाते हुई।

सुबह के फोन के बाद वंदना ने तीन बार और फोन किया। संतोष समझ नहीं पा रहा था कि आखिर मामला क्या है? शाम 6 बजे वंदना का फिर से फोन आया। संतोष मैं सीसीडी पहुंच गई हूं। तुम कब तक आ रहे हो। मैं भी निकल गया हूं, बस पांच मिनट में आया,संतोष ने जबाव दिया। आज ये पांच मिनट भी वंदना के लिए घंटों इंतजार के बराबर है। खैर! संतोष को देखकर वंदना रुआंसी हो गईं। अरे ! अरे! क्या बात हो गई । बैठो। ठीक है सब संतोष ने पूछा। नहीं यार कुछ भी ठीक नहीं है। क्या हुआ? दो दिनों से पाप और मम्मी का फोन आ रहा है। घर बुला रहे हैं। तो चले जाओ, इसमें क्या दिक्कत है! नहीं जाना चाहती मैं। क्यूं ! वे हमेशा के लिये बुला रहे हैं। अभी मेरा प्रमोशन होने वाला है और मैं सब कुछ छोड़कर चली जाऊ। नहीं । नहीं। दृढ़ता से वंदना ने बोला। तुम बताओ मुझे क्या करना चाहिए संतोष। क्या शादी के लिये बुला रहे हैं ? नहीं अभी तो ऐसी कोई बात नहीं है। फिर क्या बात है जो बुला रहे हैं। बस वही घिसी पिटी बातें। लड़कियों को काम नहीं करना चाहिए। ये तो छोटी सी बात है। इसका हल निकालते हैं, जल्दी।

दोनों के बातचीत में कब 9 बज गया पता ही नहीं चला। चलो घर चलते हैं । रात में बात करते हैं।ओके! चलो चलते हैं। दोनों मेट्रो से घर निकल गए। रात को 11 बजे फ्री होकर संतोष ने वॉट्सऐप पर मैसेज छोड़ा - हेल्लो। दो मिनट बाद जवाब आया। वंदना ने पूछा तुमने डिनर कर लिया। संतोष बोला हाँ! और तुमने । हाँ!,मैन भी कर लिया। वंदना ने मैसेज करते हुए पूछा -आप सोने तो नहीं जा रहे हो। नहीं, नहीं अभी नहीं । संतोष ने जवाब दिया।

वंदना ने संतोष से बोला मेट्रो से जब मैं आ रही थी तब मम्मी का फोन आया था। मैंने नेटवर्क नहीं है बोल कर , कट कर दिया था। संतोष बोला अभी कुछ भी करके दो तीन महीने तक टालने की कोशिश करो। फिर घर जाकर मम्मी पापा से बात करना। उनको समझाने की कोशिश करना। नहीं यार। वो लोग मेरी बात नहीं सुनते हैं। ठीक है कोई और रास्ता निकलते हैं। तभी संतोष के मोबाइल स्क्रीन पर नवीन का मैसेज आया। संतोष उसका जवाब देने लगा। इस बीच वंदना ने चार मैसेज कर दिये और उधर से कोई रिप्लाई नहीं आया। संतोष ने देखा फिर लिखा, सॉरी यार किसी दोस्त का मैसेज आ गया था। दोस्त या गर्ल फ्रेंड वंदना ने कहा। नहीं मेरा स्कूल मेट था। वंदना बोली शरमाओ नहीं। नहीं ऐसी कोई बात नहीं है। वंदना इसी बहाने तसल्ली कर लेना चाहती थी कि संतोष भी सिंगल है। संतोष बोला अभी कोई नहीं है, मेरी जिंदगी में बिल्कुल अकेला हूँ। ओह! मेरे साथ दोस्ती कर लो वंदना.. बोली। संतोष बोल पड़ा हम तो दोस्ते हैं ही। हां हां ठीक बोले तुम । शायद वंदना कुछ और बोलना चाह रही थी। ठीक है। आज तो नहीं बोल पाई। उसकी धड़कन दोगुनी रफ्तार से ज्यादा तेज चल रही थी। कुछ कहते कहते रुक गई, इस बात को संतोष ने भी महसूस किया। चलो अब रात ज्यादा हो गई है सो जाओ । सुबह जल्दी उठ कर आफिस भी जाना है। ओके । गुड़नाइट।

सुबह ऑफिस जाते हुए । वंदना ने गुड मॉर्निंग का मैसेज किया। पहले कभी नहीं आया था ऐसा मैसेज , संतोष ने रिप्लाई देते हुए पूछा । कहां हो अभी। वंदना ने जवाब दिया अभी तो बाराखंभा पर हूं। तुम कहां हो। मैं राजीव चौक पहुंच गया हूं। वंदना बोली ओके थोड़ा वेट करो गेट नंबर दो पर । ठीक है संतोष बोला। दोनों मिले और ऑफिस की तरफ चल पड़े। रास्ते मे वंदना ने संतोष की तरफ देखा। संतोष ने महसूस किया कि वंदना की आँखों में बहुत सजलता है । आज उसकी आंखें बिना कहे बहुत कुछ कह रही थी। संतोष ने भी वंदना की तरफ देखा और चलते रहे । दोनों ऑफिस पहुँच गए। आज संतोष का भी मन ऑफिस में नहीं लग रहा। तभी वॉट्सऐप पर संतोष ने मैसेज देखा -मिस यू। संतोष ने थोड़ी देर रुक कर आई लव यू का मैसेज भेज दिया। और मोबाइल स्क्रीन की तरफ देखता रहा । वंदना मैसेज नहीं देख पाई थी। लंच में संतोष ने देखा वंदना उसके सामने खड़ी थी।

-पंकज कुमार चौबे

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