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तुम मुझे छू रही हो बहुत अच्छा लग रहा है:घबराई तापसी ने मनु को बाहों में समेट लिया, उसका चेहरा अपने हाथों में लेकर शरारत से पूछा...

3 महीने पहले
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“बोलो, क्या कहना है?” लैप-टॉप पर ऑफिशियल काम की गुत्थी में उलझी तापसी ने अपनी ओर एकटक देखते हुए मनु से हमेशा की तरह बिना उसकी ओर देखे रूखी आवाज में कहा। “कहना नहीं करना है” मनु के उत्साहित सरल वाक्य का संक्षिप्त और भावहीन उत्तर मिला – “जो जी में आए, करो” मनु के चेहरे पर उत्साह का ज्वार आ गया। वो करीब आया, बिजली की तेज़ी से तापसी का चेहरा अपने हाथों में लिया और उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए।

तापसी की कामनाएं सुलग उठी। कितनी बार उसने मनु को यह सब समझाने की कोशिश की, पर असफल रही। अब जाने किससे और कितना सीखकर आया है, ये जो उसकी चाह जगाकर... उसने मनु को झिटक दिया और उसका चेहरा तमतमा आया – “क्या बकवास है ये?” इस अप्रत्याशित व्यवहार से मनु सहम गया। उसका प्रफुल्लित चेहरा एकदम बुझ गया। उसने निगाहें झुका लीं। “कहां से आया ये ख्याल?” तापसी कड़की। मनु का चेहरा उदास और सहमी आवाज में बोला – “टी.वी. में विज्ञापन में बताया गया था, कि गूगल सब कुछ जानता है। मैंने उसी से पत्नी को खुश करने के तरीके पूछे।

मैंने तो सोचा था तुम खूब खुश हो जाओगी।” मनु की आंखों में आंसू आ गए – “तुम खुश नहीं हुईं? सॉरी, मैं अब से गूगल से कुछ नहीं पूछूंगा। लेकिन तुम आज सुबह से उदास क्यों हो? नाश्ता भी नहीं किया!” मनु की मासूमियत ने एक बार फिर तापसी के आक्रोश की धूल झाड़ दी। तभी उसे भूख महसूस हुई और याद आया कि काम के चक्कर में कहते हुए...वो नाश्ता करने डाइनिंग टेबिल पर आ बैठी। मनु ने झटपट दो प्लेट लगा दीं। “तुमने नाश्ता क्यों नहीं किया?” पर आवाज़ तापसी की अभी भी भावहीन थी। “पति-पत्नी एकसाथ खाते हैं, तो उनमें प्रेम बढ़ता है। इसीलिए मैं तुम्हारे बिना कभी कुछ नहीं खाता।” तापसी ने एक आह भरी – ‘प्रेम! काश वो मनु को प्रेम का मतलब समझा सकती।

हर समय आगे पीछे घूमता मनु जैसे ही प्यार का नाम लेता है, उसकी कुंठा बन जाती और आह सुगबुगाने लगती है। जाने कौन सी घड़ी में उसके माता-पिता ने उसका नाम तापसी रखा था। सारी उम्र उसके जीवन में तपना ही लिखा है शायद। तापसी लैप-टॉप पर खट्‌-खट्‌ करके अपनी अभुक्त कामनाओं को काम में डुबोने में लग गई।

बचपन से मेधावी छात्रा रही तापसी पढ़ रही थी, जब उसके माता-पिता की पलकें एक दुर्घटना में बंद गईं और सहारा ढूंढ़ती तापसी ने मनु से शादी के लिए हां कर दी। कुछ वर्षों में तापसी के हाथ में पूरा घर, सम्पत्ति और मनु को सौंपकर उसके माता-पिता दुनिया से चले गए। सेटिल होने के बाद प्यार की प्यास जगने पर एहसास हुआ कि क्या कर बैठी है लेकिन...

“हाय तापसी” तभी हवा में निर्द्वद्व हाय उछालते हुए मनीष ने प्रवेश किया। मनीष - तापसी के लिए दूसरा आग का दरिया। मनु सामने होता था तो उस मंद बुद्धि को कुछ न समझा पाने का मलाल सिर खाता और ये सामने होता तो इसकी चतुर बुद्धि से कुछ छिपा न पाने की कशमकश। माता-पिता की असमय मृत्यु के बाद जब तापसी को ज़रूरत थी, तब मनीष ने उससे नज़र चुरा ली, पर मनीष फिर से उसके नजदीक आने की कोशिश करने लगा। पिछले दिनों तो उसने खुलकर अपनी मुहब्बत का इज़हार भी कर दिया। और तापसी के प्यासे दिल ने इनकार से सख्त मना कर दिया था, पर मनु? मनीष लिव-इन में रहना चाहता था और तापसी तलाक... लेकिन वो मनु को तलाक भी नहीं देना चाहती थी। उसकी फिक्र थी कि मनु को वो ऐसा कुछ समझा दे..लेकिन वो सचमुच क्या चाहती थी, उसे स्वयं समझ नहीं आ रहा था। वो मनु को दुखी भी नहीं करना चाहती और मनीष का प्यार भी खोना नहीं चाहती। तापसी के मन एक सुलगती लकड़ी बन गई थी, जो मनीष के प्यार की आग में जलती और जिसे मनु की मासूमियत पानी डालकर ठंडा कर देती।

मनीष ने उसकी नजरों को पहचान लिया। वो आगे बढ़ा और तापसी के बहुत नज़दीक आ गया। तापसी भी उसके इरादे पहचान गई – “थोड़ा हटकर बैठो, मनु देखेगा तो...” “कुछ नहीं देखेगा वो, मैंने उसे भेज दिया है” मनीष ने कहा, तापसी चिंतित होकर बोली, “कहां भेज दिया है?” “बेसमेंट में... मैंने बताया था तुम्हें कि मेरे घर के बेसमेंट में कोई भी स्विच छूने से वहां शाॅटशर्किट हो जाएगा। मैंने एलेक्ट्रीशियन को बुलाया है, इसीलिए छुट्टी ली है..” तापसी ने लैप-टॉप पटका बिस्तर से कूदकर भागी। मनीष ने उसका हाथ पकड़ लिया – “इसीलिए तो भेजा है, मैंने उससे कहा है कि वो बेसमेंट में जाकर लाइट जला दे, तो तुम उससे खुश हो जाओगी। देखो, इससे अच्छा मौका हमें फिर नहीं मिलेगा। उसका सब कुछ भी तुम्हारा हो जाएगा और मैं भी..देखो अगर तुम तलाक लोगी तो उसकी अकूत सम्पत्ति..” तापसी की पूरी चेतना झनझना उठी। “चले जाओ मेरे घर से” वो बस इतना ही बोल पाई।

तापसी बेसमेंट की ओर दौड़ी, कुछ पलों के लिए उसके मन में आ रहा था कि वह मनु को कैसे खुश रखे...और आज जब मनु को खोने का डर सामने आया तो पता चला कि उसके दिल में कितने गहरी जगह बना चुका था मनु। वो उसे दुख भी नहीं पहुंचा सकती थी, मार डालना तो दूर...बच्चे के समान निश्छल इंसान को मार डालना.. उफ़! मनीष ऐसा सोच भी कैसे सकता था। ऐसी कुटिल बुद्धि से तो मंद बुद्धि कहीं अच्छी। “मना किया था न कि बेसमेंट में मत आना” लाइट के स्विच तक पहुंचते मनु के हाथ को पकड़कर तापसी चिल्लाई और उससे लिपट गई।

“वो मनीष ने कहा था मनु बोला...” घबराई तापसी ने मनु को बाहों में समेट लिया और चुंबन किया। “जो काम मैंने मना किया हो वो किसी गैर के कहने पर मत किया करो। समझाया था न तुम्हें? पता है मैं कितना घबरा गई ?” कहती हुई तापसी की बांहों का घेरा कसने लगा, तो मनु ने अपना वाक्य अधूरा छोड़ दिया – “तुम मुझे ऐसे छू रही हो तो मुझे बहुत अच्छा लग रहा है।” वो पुलक उठा और तापसी की ही तरह चुंबन करने लगा। “अच्छा तो जैसा-जैसा मैं कहूंगी, करोगे? और अच्छा लगेगा।” “बिल्कुल करूंगा” “अच्छा बताओ, तुम्हें इतना अच्छा क्यों लग रहा है?” तापसी ने उसका चेहरा अपने हाथों में लेकर शरारत से पूछा। “क्योंकि कि अब तुम भी मुझे प्यार करने लगी हो।” तापसी अवाक रह गई। आज पहली बार उसे अपने प्यार का एहसास हुआ था, ये बात मनु भी जानता था, क्योंकि प्यार को समझने के लिए दिमाग की ज़रूरत ही नहीं है, एहसास की भी है, जिसे सिर्फ एहसास समझने वाला हर प्राणी समझ सकता है।

- भावना प्रकाश

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