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पति दहेज मांगने की सजा काट रहा था:पत्नी ने किया माफ; क्या जेल से बाहर आ सकता है पति?

17 दिन पहले
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सुप्रीम कोर्ट ने दहेज उत्पीड़न के केस में सजा काट रहे एक पति की सजा कम कर दी है। ऐसा उसकी पत्नी की याचिका के आधार पर किया। दरअसल, पत्नी ने कोर्ट से गुहार लगाई थी कि वह अपनी मैरिड लाइफ को दोबारा जीना चाहती है। पति के साथ आगे की जिंदगी बिताना चाहती है।

यह दहेज उत्पीड़न का केस था इसलिए पति को 498 ए में दोषी माना गया। उसे दो साल कैद की सजा हुई। हाईकोर्ट ने भी इस सजा को बरकरार रखा। तब तक पति छह महीने की जेल काट चुका था।

पत्नी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि इस मामले में सजा के फैसले में दखल नहीं देना चाहते हैं। इसके बावजूद महिला ने जो बयान दिया है और जो परिस्थितियां हैं, उसमें आरोपी पति ने अब तक जो समय जेल में बिताया है उसे सजा मान लिया जाता है। इसलिए आरोपी की पत्नी की अपील स्वीकार की जाती है और आरोपी की सजा कम कर दी जाती है।

हम सब जानते हैं कि यह पहला मामला नहीं था, जहां पति को दहेज प्रताड़ना की वजह से सजा मिली थी। हां, इस तरह के मामले जरूर कम आते हैं जहां पत्नी अपने पति की सजा माफ करवाकर उसके साथ रहने की अपील करे।

इसके साथ हमारे देश में दहेज प्रताड़ना के कई फर्जी मामले भी कोर्ट में चल रहे हैं, जहां निर्दोष होते हुए भी पति और उसके घर वाले इसकी सजा काट रहे हैं।

आज जरूरत की खबर बात करते हैं कि क्या कोर्ट में चल रहा केस वापस लिया जा सकता है। दहेज प्रताड़ना के केस वापस लेने का प्रोसेस क्या है?

हमारे एक्सपर्ट हैं- जबलपुर से मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के एडवोकेट अशोक पांडे और सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट सचिन नायक।

सबसे पहले समझते हैं कि केस कितने तरह के होते हैं…

केस दो तरह के होते हैं

  • समझौतावादी यानी कॉम्प्रोमाइज केस
  • गैर-समझौतावादी यानी नॉन- कॉम्प्रोमाइज केस

समझौतावादी केस में पीड़ित व्यक्ति चाहे तो अपना केस कोर्ट से वापस ले सकता है। ऐसा गैर-समझौतावादी केस में नहीं किया जा सकता।

सवाल- अच्छा तो फिर समझौतावादी केस क्या हाेता है?
जवाब- CrPC की धारा-320 के तहत एक चार्ट मौजूद है, जिसमें समझौतावादी अपराध के बारे में डिटेल में बताया गया है कि किन मामलों में शिकायत करने वाला केस वापस ले सकता है। इनमें कई ऐसे मामले हैं, जिनमें कोर्ट के बाहर समझौता हो सकता है और कोर्ट को CrPC की धारा-320 के तहत अर्जी दाखिल कर सूचित किया जाता है कि शिकायती और आरोपी के बीच समझौता हो चुका है, ऐसे में कार्रवाई रद्द की जाए। तब कोर्ट कार्रवाई रद्द कर देता है।

सवाल- केस वापस लेने के लिए आपको किन बातों का ख्याल रखना होगा यानी प्रोसेस क्या है?
जवाब- अगर केस करने वाला और जिस पर केस हुआ है दोनों के बीच समझौता हो गया है, तब वो केस वापस ले सकते हैं। प्रोसेस ऐसे समझें…

CrPC की धारा 320 के तहत कोर्ट में एप्लिकेशन दी जाएगी। इस एप्लिकेशन में कोर्ट को बताया जाता है कि दोनों पक्ष के बीच समझौता हो गया है। इसलिए इस केस को रद्द कर दिया जाए। इसके साथ कई मामलों में कोर्ट खुद भी केस रद्द कर सकता है।

सवाल- किन मामलों में केस वापस नहीं लिए जा सकते हैं?
जवाब-जब अपराध गंभीर होता है। उसकी सजा 3 साल से अधिक होती है, तब अपनी मर्जी से केस वापस नहीं लिया जा सकता।

सवाल-अगर अपराध गंभीर है इसके बावजूद दो पार्टी समझौता करना चाहती हैं, तो ऐसे में क्या केस वापस लिया जाएगा?
जवाब-अगर दोनों पार्टियों में समझौता हो जाता है और वे दोनों केस खत्म करना चाहते हैं, तो हाईकोर्ट में अर्जी दी जाती है। वहीं इस बारे में फैसला होगा।

गैर समझौतावादी केस के बारे में अब पढ़ें, इन मामलों में केस वापस लिया नहीं जा सकता

  • राजद्रोह
  • दहेज प्रताड़ना
  • गैर-इरादतन हत्या
  • जालसाजी
  • अपहरण और फिरौती
  • हत्या
  • बलात्कार

सवाल- किन परिस्थितियों में आप अपना केस वापस ले सकते हैं?

जवाब- अगर थोड़े समय के बाद पति और पत्नी के बीच सब कुछ ठीक हो जाता है, तब वे ऐसा कर सकते हैं। उस सिचुएशन में जब दोनों को लगे कि उन्हें एक साथ रहना है, जिंदगी दोबारा से शुरू करनी है तब वो कोर्ट की मदद ले सकते हैं। याद रखें कि कोर्ट कभी भी तलाक के पक्ष में नहीं होती।

सवाल- झूठा दहेज प्रताड़ना और हिंसा का केस किया गया है तो पति क्या करें?
जवाब-यदि पत्नी ने झूठा दहेज प्रताड़ना या हिंसा का मामला दर्ज कराया है तो खुद को बेगुनाह साबित करने के लिए सबूतों की जरूरत होती है। अगर मानसिक या शारीरिक प्रताड़ना से रिलेटेड कोई सबूत पत्नी के पास नहीं है तो पति के पास यह ऑप्शन रहता है कि वह कोर्ट के सामने इस बात को आधार बनाकर पेश करे। वो अपनी डिस्चार्ज एप्लिकेशन 227 CrPC 1973 के अंतर्गत फाइल करते हुए अपने मामले को खत्म करा सकता है।

इसके साथ ही उसके पास दूसरा ऑप्शन यह है कि हाईकोर्ट के सामने FIR दर्ज होने के बाद एक एप्लिकेशन दे जो 482 CrPC 1973 के अंतर्गत होगी।

IPC की धारा 498a के खिलाफ पति और उसके घरवाले दहेज प्रताड़ना के झूठे आरोप से ऐसे सेफ हो सकते हैं

1.सभी सबूत और डॉक्युमेंट्स इकट्ठा करें: एक झूठे आरोप को साबित करने में पहला कदम 498a मामले के तहत अच्छी तरह से सभी डॉक्युमेंट्स इकट्ठा करना होगा। आपको जितने संभव हो उतने सबूत इकट्ठा करना शुरू करना चाहिए, जिसमें शामिल हैं:

  • आपके या आपके परिवार के सदस्य के बीच आपकी पत्नी या उसके रिश्तेदारों के बीच कोई बातचीत जैसे कोई SMS, ईमेल, पत्र, कॉल रिकॉर्डिंग आदि।
  • कोई सबूत जो साबित करता है कि आपकी पत्नी खुद की मर्जी से आपके घर से बाहर चली गई।
  • कोई सबूत जो दर्शाता है कि शादी से पहले या बाद में दहेज की कोई मांग नहीं की गई थी

2.अग्रिम जमानत लें: अगर आपको लगता है कि आपकी पत्नी धारा 498a के तहत FIR​​​​ दर्ज कर सकती है, तो बचाव के लिए वकील की मदद लें और अपने या अपने परिवार के सदस्य की गिरफ्तारी को रोकने के लिए अग्रिम जमानत यानी इंटरिम बेल ले लें।

अग्रिम जमानत एक एहतियाती जमानत की तरह है जब पुलिस आपको या आपके परिवार के सदस्यों को गिरफ्तार करने के लिए आगे बढ़ती है। आप CrPC की धारा 438 [ 1 ] के तहत धारा 498a IPC मामले के खिलाफ सुरक्षा के लिए अग्रिम जमानत के लिए फाइल कर सकते हैं।

3. 498a की FIR रद्द करवाएं: आप CrPC की धारा 482 के तहत सुप्रीम कोर्ट द्वारा रद्द की गई झूठी 498a FIR भी रद्द करवा सकते हैं।

सवाल-कई बार ऐसा देखा जाता है कि दहेज प्रताड़ना के केस छोटी-मोटी लड़ाई को ईगो मानकर लड़की वाले दर्ज करवा देते हैं। ऐसे मामले में पत्नी अपने पति के साथ जाना चाहती है, लेकिन ऐसा घर वाले करने नहीं देते, तब क्या ऑप्शन है?
जवाब-पत्नी अगर पति के साथ वापस जाना चाहती है और घर वालों के दबाव में केस चल रहा है तो दोनों आपसी सहमति से कोर्ट के सामने कॉम्प्रोमाइज करते हुए वापस अपने घर पर जा सकते हैं।

दूसरा ऑप्शन यह है की धारा 9 रेस्टीट्यूशन ऑफ कंजगाल राइट्स हिंदू मैरिज एक्ट 1955 के अंतर्गत पति अपनी पत्नी को वापस अपने साथ लेकर आ सकता है।

अब दहेज से रिलेटेड कानून और उसकी धारा को समझ लें

सवाल- दहेज प्रताड़ना क्या है?

जवाब-

  • इंडियन पेनल कोड की धारा 498 A दहेज से रिलेटेड धारा है।
  • दहेज लेना और देना दोनों ही अपराध की श्रेणी में है।
  • पत्नी या उसके रिश्तेदार से संपत्ति या कीमती वस्तुओं के लिए मांग की जाए, उसे दहेज कहा जाता है।

सवाल-दहेज कानून क्या है? दहेज प्रताड़ना के लिए कितनी सजा का प्रावधान है?
जवाब-दहेज निषेध अधिनियम(Dowry Prohibition Act), 1961 के अनुसार दहेज लेने, देने या इसके लेन-देन में साथ देने वालों को 5 साल की जेल होगी। इसके साथ 15,000 रुपए के जुर्माने का प्रावधान है।

दहेज के लिए मारपीट करने पर, कीमती चीजों की मांग करने पर IPC की धारा 498a के तहत सजा मिलती है। इसके लिए 3 साल की जेल और जुर्माना होगा। अगर पति और ससुराल वाले स्त्रीधन को सौंपने से मना करते हैं तब 3 साल की सजा और जुर्माना दोनों का प्रावधान है।

चलते-चलते जान लें

दहेज हत्या क्या है ?

IPC 1860 की धारा 304-B के तहत होने वाले अपराध को कानून की भाषा में दहेज हत्या कहा जाता है। इस प्रावधान के अनुसार विवाह के सात साल में किसी महिला की जलने या किसी दूसरे तरह की शारीरिक चोट से अगर मौत हो जाती है और यह दिखाया जाता है कि मरने से पहले पति या ससुराल वालों ने मारपीट की थी, दहेज की मांग की थी, उसे ही दहेज हत्या माना है।

सुप्रीम कोर्ट के दो फैसले पढ़ लें

दहेज प्रताड़ना का केस ससुराल वालों पर नहीं चला सकते

महिला ने पति और उसके ससुराल वालों के खिलाफ दहेज प्रताड़ना का केस दर्ज किया गया था। FIR और कानूनी कार्रवाई खारिज करने के लिए पति और उसके रिश्तेदारों ने पटना हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल की थी। हाईकोर्ट ने अर्जी खारिज कर दी। मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया। महिला के ससुराल वालों ने याचिका में क्रिमिनल केस खारिज करने की गुहार लगाई। कहा कि उन्हें मानसिक तौर पर प्रताड़ित करने के लिए झूठे केस में फंसाया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सवाल यह है कि क्या पति के रिश्तेदारों यानी महिला के ससुरालियों के खिलाफ जनरल और बहुप्रयोजन वाले आरोप को खारिज किया जाए या नहीं?

498a (दहेज प्रताड़ना) (Section 498A of IPC) मामले में पति के रिलेटिव के खिलाफ स्पष्ट आरोप के बिना केस चलाना कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग है। शीर्ष न्‍यायालय के अनुसार, पति के रिश्तेदार (महिला के ससुरालियों) (Relatives of Husband) के खिलाफ सामान्‍य और बहुप्रयोजन वाले आरोप के आधार पर केस चलाया जाना कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग (Misuse of 498a) है। इस तरह केस नहीं चलाया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने महिला के ससुरालियों के खिलाफ चल रहे दहेज प्रताड़ना के केस को खारिज कर दिया।

झूठा केस कर पति को फंसाया, पत्नी को देना पड़ा 50 हजार मुआवजा

साउथ मुंबई के एक बिजनेसमैन के खिलाफ पत्नी ने दहेज और आपराधिक मामले का केस किया था, पति का आरोप था कि पत्नी ने प्रताड़ित करने के लिए दहेज का झूठा आरोप लगाया है। पति ने कोर्ट में तलाक की अर्जी लगाते हुए कहा था कि एक दशक के लंबे संबंधों के दौरान पत्नी ने जो अत्याचार किए, उससे उसकी और उसके परिवार की प्रतिष्ठा खराब हुई है। हाईकोर्ट ने पुरुष को पत्नी से तलाक दिलाया है। साथ ही पत्नी को आदेश दिया है कि वह पति को 50 हजार रुपए का मुआवजा भी देगी।

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