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  • Want To Run Again Or Run For The First Time After The End Of The Lockdown, If You Adopt These Techniques, You Will Become Fit And Will Also Avoid Injury.

पाबंदियां खत्म, अब भागेंगे हम:लॉकडाउन खत्म होने के बाद दोबारा दौड़ना चाहते हैं या पहली बार दौड़ेंगे, ये तकनीक अपनाएंगे तो फिट बनेंगे और चोट से भी बचेंगे

4 महीने पहले
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फिट रहने का सबसे कारगर और कम खर्चीला तरीका है दौड़ना। कोरोना ने लाखों दौड़ने वालों पर भी असर डाला है। हजारों लोगों को लॉकडाउन की वजह से काफी दिनों के लिए दौड़ना छोड़ना पड़ा।

अब जब देश के ज्यादातर हिस्सों में लॉकडाउन की ज्यादातर पाबंंदियां हट चुकी हैं, ऐसे में लोगों को दोबारा दौड़ शुरू करने में काफी परेशानी हो रही है। ये परेशानी शारीरिक और मानसिक दोनों हैं।

ठीक ऐसी ही स्थिति उन लोगों की है जो खुद को फिट करने के लिए नए सिरे से दौड़ना शुरू करना चाहते हैं। खास बात यह है कि लॉकडाउन के दौरान तमाम लोगों ने दौड़ने के अपने शेड्यूल, जगह और तरीकों में बदलाव किया। इस बदलाव से बड़ी संख्या में ऐसे लोग चोटिल भी हुए।

तो आइए जानते हैं कि कैसे हम लॉकडाउन के बाद दोबारा या नए सिरे से दौड़ना शुरू कर सकते हैं...

सबसे पहले एक तारीख तय कर टारगेट सेट करें

सबसे पहले एक तारीख तय करके टारगेट सेट कर लें कि उस दिन तक आपको कितनी लंबी दौड़ कितने समय के भीतर पूरी करनी है। इसके लिए हो सके तो किसी रेस इवेंट में हिस्सा लेने के लिए रजिस्ट्रेशन भी करवा सकते हैं। एक्सपर्ट्स के अनुसार टारगेट तय करने या दौड़ में हिस्सा लेने से दौड़ने की शुरुआत करने की इच्छाशक्ति मजबूत होती है।

शुरू में हफ्ते के तीन दिन करें दौड़ने की ट्रेनिंग

  1. हफ्ते में दो दिन 20-30 मिनट दौड़ें या run-walk-run को अपनाएं।
  2. वीकएंड्स पर 40-60 मिनट तक लंबी दौड़ लगाएं run-walk-run को अपनाएं।
  3. छुट्टी के दिन आराम या क्रॉस ट्रेनिंग करें (किसी और खेल की प्रैक्टिस करें)।
  4. छुट्टी पर आराम न करें तो कन्वरसेशनल पेस (conversational pace) पर दौड़ें।
  5. कन्वरसेशनल पेस वह स्पीड है जिस पर आसानी से बात कर सकें।

दौड़ो-चलो-दौड़ो (run & walk) सबसे बेहतर तकनीक
लॉकडाउन के चलते कई महीनों तक दौड़ने से दूर रहने वाले हों, दौड़ने की शुरुआत करने वाले हों या एक्सपीरियंस्ड रनर अपनी टाइमिंग सुधारना चाहते हों। इन सभी के लिए दौड़-चलो-दौड़ यानी run walk and run एक शानदार तरीका है।

इस तरीके की खोज एथलेटिक्स के चर्चित कोच और ओलिंपियन जेफ गैलोवे ने की थी। इसके तकनीक में हम कुछ देर या कुछ दूरी तक दौड़ते हैं और फिर चलते हैं। इसके बाद फिर दौड़ते हैं और फिर चलते हैं। नए सिरे से दौड़ शुरू करने या दोबारा से अपने शरीर को दौड़ने लायक बनाने के लिए यह बेहद कारगर साबित होती है।

इस तरह तय करें दौड़ें-चले-दौड़ें का शेड्यूल

पहले ही तय कर लें दौड़ने के सात सप्ताह का प्लान

दौड़ने के अपने नेचुरल तरीके को अपनाएं

कुछ लोग स्वाभाविक रूप से heel striker यानी एड़ी के बल दौड़ने वाले होते हैं, जबकि कई लोग पैर के पंजे की उंगलियों के जोर से दौड़ते हैं। अच्छी खबर यह है कि इनमें से कोई भी तरीका प्राकृतिक रूप से दूसरे से बेहतर नहीं। वहीं अगर दौड़ने के स्वाभाविक तरीके को बनाए रखते हैं तो आपके चोटिल होने की संभावना कम होती है।

आप जितना दौड़ेंगे आप उस स्वाभाविक तरीके में उतना ही आरामदायक महसूस करेंगे और आपका शरीर भी उतना ही कुशल (efficient) बन जाएगा।

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