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40 बच्चों को एक ही सिरिंज से लगा दी वैक्सीन:अब इन्हें है हेपेटाइटिस का खतरा; 3 महीने तक बच्चे निगरानी में रहेंगे

15 दिन पहलेलेखक: अलिशा सिन्हा
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मध्यप्रदेश के सागर में एक प्राइवेट स्कूल में बच्चों के लिए वैक्सीनेशन का कैंप लगाया गया था। इस काम के लिए स्वास्थ्य विभाग ने प्राइवेट नर्सिंग कॉलेज के छात्रों की ड्यूटी लगाई। इसमें एक थर्ड ईयर का स्टूडेंट भी था।

उसने एक के बाद एक 40 बच्चों को एक ही सिरिंज से कोविड वैक्सीन लगा दी। जब एक स्टूडेंट के पिता की नजर इस पर पड़ी, तब जाकर एडमिनिस्ट्रेशन के पास ये मामला पहुंचा।

ऐसे में सवाल उठता है कि एक ही सिरिंज से वैक्सीन लगाने से क्या खतरा हो सकता है? सिरिंज इस्तेमाल का सही तरीका क्या है?

आज इन सवालों के जवाब देंगे इंदौर की जनरल फिजिशियन डॉ. फातिमा चाहवाला, भोपाल के जनरल फिजिशियन डॉ. अरविंद कुमार मित्तल और एडवोकेट सचिन नायक।

सवाल- एक सिरिंज से वैक्सीन लगाना किस तरह नुकसान करता है?
जवाब-
एक ही सिरिंज का इस्तेमाल वैक्सीन या कोई भी दवा देने के लिए किया जाए तो सबसे ज्यादा खतरा वायरल बीमारियों के फैलने का रहता है।

इसे ऐसे समझें– अगर किसी के ब्लड में कोई इंफेक्शन है और उसका खून कहीं न कहीं सिरिंज में रह जाएगा। जैसे ही आप दूसरे व्यक्ति को उसी सिरिंज से वैक्सीन या दवाई देंगे तो उसे भी इंफेक्शन हो जाएगा।

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सवाल- अगर पेशेंट को इस बात का पता लग जाए कि उसे पुरानी सिरिंज से वैक्सीन या दवा लगाई गई है तो उसे सबसे पहले क्या करना चाहिए?
जवाब-
ऐसी सिचुएशन में जानकारी मिलने के बाद आपको तुरंत डॉक्टर को पूरा मामला बताना चाहिए और ब्लड टेस्ट करवाना चाहिए। इससे वायरल बीमारी या ब्लड इंफेक्शन का पता जल्द से जल्द लगाया जा सकता है। इससे इलाज भी समय पर हो पाएगा।

सवाल- कैसे पता चलेगा कि हमें वैक्सीन या कोई दवाई नई सिरिंज से लग रही है या पुरानी सिरिंज से?
जवाब-
इस बात का पता लगाने का कोई खास रास्ता पेशेंट के पास नहीं होता है। आप बस इतना कर सकते हैं कि इंजेक्शन या वैक्सीन लगाने वाले व्यक्ति से कहें कि वह आपके सामने ही नई सिरिंज का इस्तेमाल करे।

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ये तो बात हुई सिरिंज की। अब बात करते हैं डायबिटिज के पेशेंट की। आप सोच रहे होंगे कि हम अचानक सिरिंज और वैक्सीन से डायबिटिज पेशेंट पर कैसे आ गए। तो बता दें कि जब किसी दवा या वैक्सीन को शरीर में पहुंचाना होता है तो सिरिंज के ऊपर एक नीडल लगी होती है और डायबिटिज के बहुत से पेशेंट रोजाना इंसुलिन लेने के लिए सिरिंज और नीडल यूज करते हैं? ऐसे में सवाल उठता है कि…

क्या एक ही निडिल से डायबिटीज के पेशेंट बार-बार इंसुलिन ले सकते हैं?
इस बारे में जनरल फिजिशियन, डॉ. अरविंद कुमार मित्तल कहते हैं नहीं ऐसा बिलकुल नहीं कर सकते हैं। एक नीडल से बार-बार वैक्सीन या दवा लगाना बैन हो चुका है। इसे सिंगल यूज करके फेंक दिया जाना चाहिए। डायबिटिज के मरीज को भी इंसुलिन लगाने के लिए एक नीडल का यूज सिर्फ एक ही बार करना चाहिए।

इंजेक्शन से इंसुलिन लेने का सही तरीका ये हैं

  • इंसुलिन लेने से पहले हाथों को साबुन और पानी से धोएं।
  • सिरिंज में जरूरत के हिसाब से इंसुलिन भरें।
  • एक सिरिंज में एक से ज्यादा तरह की इंसुलिन नहीं डालें।
  • डोज को चर्बी वाले हिस्से पर ही लगाएं।
  • इंजेक्ट करने के दौरान सुई को स्किन के अंदर डालें।
  • धीरे-धीरे सिरिंज को दबाएं। सिरिंज पूरी तरह खाली होने के बाद सुई को तकरीबन 10 सेकंड तक उस जगह पर रखें।
  • यूज करने के बाद सुई और सिरिंज को ध्यान से फेंक दें।

जानते हैं कि सागर में हुई घटना पर एक ही सिरिंज से वैक्सीन देने वाले नर्सिंग स्टूडेंट ने ऐसा क्यों किया?

उसका कहना है- 'मुझे कॉलेज के HOD स्कूल वैक्सीन देने के लिए लेकर आए थे। मुझे एक ही सिरिंज दी गई। मैंने उनसे पूछा भी था कि क्या एक ही सिरिंज से बच्चों को वैक्सीन लगानी है तो उन्होंने कहा- हां। इसलिए मैंने एक ही सिरिंज से बच्चों को वैक्सीन लगाई। इसमें मेरी क्या गलती है?’

चलते-चलते

  • 1990 में HIV फैलने के बाद डिस्पोजेबल सिरिंज के यूज को जरूरी कर दिया गया था।
  • सिरिंज और नीडल दोनों का दोबारा यूज करना अनसेफ है।
  • ऐसा करने से नेक्रोटाइजिंग फासियाइटिस यानी मांस खाने वाले बैक्टीरिया डिवेलप हो सकते हैं।
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में अनसेफ इंजेक्शन की वजह से हर साल हेपेटाइटिस सी के करीब चार लाख केस सामने आते हैं। इससे करीब 96,000 लोगों की जान चली जाती है।