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देश में मंकीपॉक्स के 8 मामले:केरल में विदेश से आए मरीज की मौत; WHO ने कहा- जो भी मरीज के संपर्क में आएगा उसे खतरा

2 महीने पहले
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भारत में मंकीपॉक्स के अब तक 8 केस दर्ज हो चुके हैं। केरल की हेल्थ मिनिस्टर वीना जॉर्ज ने कंफर्म कर दिया है कि केरल में मंकीपॉक्स से एक मौत हो गई है। मृतक की उम्र 22 साल थी, वो UAE से अपने घर लौटा था। UAE से निकलने के एक दिन पहले ही उसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी।

मंकीपॉक्स को अब तक लोग सीरियस नहीं ले रहे हैं। देश में हुई पहली मौत के बाद इसको लेकर किस तरह सचेत होने की जरूरत है। मंकीपॉक्स से मौत की कितनी संभावना है ये सब जानेंगे डॉ. प्रभाकर तिवारी, इन्फॉर्मेशन एक्सपर्ट्स, CMHO भोपाल और डॉ. आर वी एस भल्ला, डायरेक्टर इंटरनल मेडिसिन, फोर्टिस अस्पताल से।

सवाल 1– सबसे पहले जो मामला मंकीपॉक्स का UAE से आया था क्या उसी व्यक्ति की मौत हुई थी?
जवाब–
नहीं, यह मामला नया है। केरल में पहले पाए गए तीन मामलों से यह अलग है। पहले के उन तीन मामलों में से एक व्यक्ति को हॉस्पिटल से छुट्टी दे दी गई है और दूसरे दो मरीज की स्थिति अभी स्थिर है।

सवाल 2– पिछले दिनों दिल्ली में भी एक मामला सामने आया था? क्या वो व्यक्ति भी विदेश से आया था?
जवाब–
दिल्ली का मामला केरल के सभी मामलों से अलग था। दिल्ली में जिस मरीज को मंकीपॉक्स हुआ है, वह कभी विदेश गया ही नहीं था।

सवाल- मंकीपॉक्स के लक्षण क्या हैं?
जवाब-
ये हैं मंकीपॉक्स के लक्षण

  • बुखार
  • शरीर में दर्द
  • ठंड लगना
  • थकान और सुस्ती
  • मांसपेशियों में दर्द
  • बुखार के समय बहुत ज्यादा खुजली वाले दाने उभर सकते हैं
  • चेहरे, हाथ और शरीर के बाकी हिस्सों पर चकत्ते और दाने

सोर्स– डॉ. प्रभाकर तिवारी, इन्फॉर्मेशन एक्सपर्ट्स, CMHO भोपाल

सवाल 3 – केरल में मरने वाला मरीज कौन था? उसकी मेडिकल हिस्ट्री क्या थी?
जवाब–
मरीज त्रिशूर के पुन्नियूर का रहने वाला था। UAE से लौटने के बाद 22 वर्षीय त्रिशूर निजी अस्पताल में भर्ती था। जहां उसकी मौत भी हुई। वह 22 जुलाई को केरल पहुंचा था और 26 जुलाई को बुखार होने के बाद अस्पताल पहुंचा था। बाद में उसे दूसरे अस्पताल ले जाया गया, जहां लाइफ सपोर्टिंग सिस्टम पर रखा गया था। केरल स्वास्थ्य विभाग ने उसके सैंपल अलाप्पुझा स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV) के केरल ब्रांच को भेजे थे।

मंकीपॉक्स के स्ट्रेन पर नजर डालें

इसके दो स्ट्रेन हैं…

  • कांगो स्ट्रेन
  • वेस्ट अफ्रीकन स्ट्रेन

कांगो स्ट्रेन पश्चिम अफ्रीकी स्ट्रेन से ज्यादा घातक है। इस स्ट्रेन में मृत्यु दर 10% है। वेस्ट अफ्रीकी स्ट्रेन की मृत्यु दर कांगो से 1% कम है।

सवाल 4 – क्या मौत की वजह मंकीपॉक्स है?
जवाब–
पहले इस बात का पता नहीं चल पाया था कि मौत की वजह क्या है। मौत का सही कारण तलाशने के बाद कंफर्म किया गया कि युवक की मौत का असल कारण मंकीपॉक्स था। मरीज में इंसेफलाइटिस और थकान के लक्षण भी थे।

सवाल 5– मंकीपॉक्स से अब तक कितनी मौतें हो चुकी हैं?
जवाब–
दुनिया भर में मई के बाद 78 देशों में मंकीपॉक्स के लगभग 20,000 से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं। सबसे ज्यादा मौत अफ्रीका में हुई हैं। यहां 75 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। ब्राजील में एक और स्पेन में दो मंकीपॉक्स से मौत हुई है।

मंकीपॉक्स से बचाव के लिए हेल्थ मिनिस्ट्री की ये हैं 8 गाइडलाइन

  • सभी हेल्थ सेंटर्स ऐसे लोगों पर कड़ी नजर रखें, जिनके शरीर पर दाने दिखते हैं।
  • उन पर नजर रखें, जिन्होंने पिछले 21 दिनों में मंकीपॉक्स सस्पेक्टेड देशों की यात्रा की हो।
  • संदिग्ध केस को हेल्थकेयर फैसिलिटी में आइसोलेट किया जाएगा, जब तक मरीज के शरीर में दानों से पपड़ी नहीं उधड़ जाती।
  • मंकीपॉक्स संदिग्ध मरीजों के फ्लूइड या खून का सैंपल NIV पुणे में टेस्ट के लिए भेजा जाएगा।
  • अगर कोई पॉजिटिव केस पाया जाता है, तो फौरन कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग शुरू की जाएगी।
  • विदेश से आने वाले यात्रियों को ऐसे लोगों के संपर्क में आने से बचना चाहिए, जो स्किन की बीमारी से पीड़ित हों।
  • यात्रियों को चूहे, गिलहरी, बंदर सहित जिंदा और मरे हुए जंगली जानवरों के संपर्क में भी नहीं आना चाहिए।
  • अफ्रीकी जंगली जानवरों से बनाए गए प्रोडक्ट्स जैसे- क्रीम, लोशन और पाउडर का इस्तेमाल करने से बचें।

WHO पहले से कहता आ रहा है कि समलैंगिक पुरुषों में मंकीपॉक्स के संक्रमण की ज्यादा संभावना है। या जिस पुरुष का संबंध दूसरे पुरुष से रहता है उन्हें मंकीपॉक्स होने का खतरा ज्यादा है। इस बात को लेकर LGBTQ कम्यूनिटी में हलचल थी। अब WHO ने नई हेल्थ एडवाइजरी जारी की है जिसमें कहा है कि यह ध्यान रखना जरूरी है कि मंकीपॉक्स का खतरा केवल पुरुषों के साथ यौन संबंध यानी सेक्स करने वाले पुरुषों तक ही सीमित नहीं है। कोई भी व्यक्ति, जो किसी संक्रमित व्यक्ति के कॉन्टैक्ट में है, उसे मंकीपॉक्स होने का खतरा ज्यादा है।