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कोरोना सोमनिया से बचें:कोरोना के दौर में तेजी से बढ़ी नींद से जुड़ी बीमारियां, इससे जुड़े 15 सवालों के जवाब में जानिए अपनी नींद की समस्या का हल

8 दिन पहले
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कोरोना वायरस ने बीते एक साल में बहुत कुछ बदल दिया है। इसमें सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है हमारी लाइफस्‍टाइल जिसका एक महत्वपूर्ण पार्ट है हमारी नींद। हाल ही में हुई एक स्टडी में पता चला है कि महामारी के दौरान इनसोमनिया के मरीज तेजी से बढ़े हैं। साल भर में इनसोमनिया के मरीज 20% से बढ़कर 60% हो गए।

कोरोना ने दिमागी सेहत और लोगों के स्वास्थ्य को भी प्रभावित किया है। डर चाहे वायरस के संक्रमण का हो या उससे जुड़े लक्षणों से निपटने का, चिंता और तनाव इतना ज्यादा बढ़ा कि उसका सीधा असर लोगों की नींद पर हो रहा है। यह स्थिति कोरोना सोमनिया कहलाती है।

कोरोना सोमनिया शब्द अनिद्रा के मुद्दों और कोरोना वायरस के कारण नींद की समस्याओं को बताता है। जर्नल ऑफ क्लीनिकल स्लीप मेडिसिन में प्रकाशित रिसर्च के मुताबिक करीब 40 फीसद लोगों ने कोरोना के बाद नींद की समस्या महसूस की है।

लोगों के मन में नींद की समस्या को लेकर कई सारे सवाल हैं, इसलिए हम इस समस्या से जुड़े 15 सवाल और एक्सपर्ट से उनके जवाब बता रहे हैं...

1. शारीरिक रूप से थके होने पर भी नींद न आना, ऐसा क्यों होता है?

यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, बर्कले में न्यूरो साइंस और साइकोलॉजी के प्रोफेसर मैथ्यू वॉकर ने बताया कि इस समस्या को टायर्ड बट वियर्ड सिंड्रोम कहते हैं। आमतौर पर, यह तनाव और चिंता की वजह से होता है। थके होने के बावजूद आपका दिमाग नर्वस सिस्टम की फाइट और फ्लाइट ब्रांच को एक्टिवेट रखता है, जिसकी वजह से आप अलर्ट रहते हैं और नींद नहीं आती है। इसके लिए नर्वस सिस्टम की एक शांत ब्रांच में शिफ्ट होने की जरूरत होती है, जिसे पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम कहते हैं।

अगर आप लगातार ऐसा महसूस कर रहे हैं, तो अपने तनाव और चिंता को कम करने के लिए सोने से पहले एक्सरसाइज करें जैसे -ब्रीदिंग एक्सरसाइज, प्रोग्रेसिव मसल्स रिलैक्सेशन एक्सरसाइज।

2. सोने के लिए लेटते ही दिमाग और दिल के बीच रेस शुरू हो जाती है, ऐसे में सोने के लिए दिमाग और शरीर दोनों को कैसे शांत किया जाए?

दिमाग को शांत करने का सबसे अच्छा तरीका है मेडिटेशन। 2014 में स्लीप जर्नल में पब्लिश हुई एक स्टडी में पाया गया कि लगातार 8 हफ्ते तक मेडिटेशन करने वालों की नींद बेहतर हुई। उन्हें हर रात 45 मिनट ज्यादा नींद आने लगी। लगातार 6 महीने तक मेडिटेशन करने वाले 40 से 50% लोगों को इंसोमनिया से राहत मिलने लगी।

डॉ. वॉकर कहते हैं कि इंसोमनिया से पीड़ित लोगों में सुबह की बजाय शाम को मेडिटेशन करने के ज्यादा फायदे हैं। शाम के समय मेडिटेशन करने से नींद जल्दी और काफी अच्छी आती है।

3. मेडिटेशन करने के बावजूद नींद न आने की समस्या बनी रहने पर क्या करें?

अपने दिमाग को शांत करने के लिए अपनी चिंताओं के बारे में लिखना शुरू करें। हर रात बेड पर जाने के एक या फिर दो घंटे पहले अपनी उन चिंताओं के बारे में लिखिए जिनसे आप काफी ज्यादा परेशान हैं। स्टडी के मुताबिक यह आदत आपकी मेंटल हेल्थ और जल्दी नींद आने में भी मदद करती है।

डॉक्टर वॉकर कहते हैं कि आजकल की लाइफस्टाइल में लोग अपने लिए समय नहीं निकाल पाते हैं, इसलिए सारी चिंताओं के बारे में वो तभी सोचते हैं, जब सोने के लिए बेड पर जाते हैं, इस वजह से उनकी नींद से जुड़ी समस्या और बढ़ जाती है।

4. अक्सर सोने के 15 मिनट बाद ही नींद खुल जाती है, बहुत ज्यादा घबराहट और सांस लेने में कठिनाई होने लगती है। दिमाग तेजी से दौड़ने लगता है, चेस्ट टाइट हो जाता है और स्किन पर झुनझुनी महसूस होती है, ऐसा क्यों?

मेयो क्लिनिक के सेंटर फॉर स्लीप मेडिसिन में साइकाइट्री एंड कंसल्ट के एसोसिएट प्रोफेसर डॉक्टर भानू प्रकाश कोल्ला कहते हैं कि स्लीप एपनिया के कारण ऐसा हो सकता है। रात में जोर से खर्राटे लेते हैं और सांस की कमी होने लगती है, क्योंकि गर्दन के पीछे की मांसपेशियां इतनी ज्यादा रिलैक्स हो जाती हैं कि एयरवे को संकुचित कर देती हैं। ऐसी स्थिति में दिमाग को एहसास होता है कि आप सांस नहीं ले रहे हैं और वह फाइट एंड फ्लाइट मोड ऑन कर देता है। जिसकी वजह से हार्ट रेट और ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है। इसकी वजह से आप ऐसा महसूस करते हैं और आपकी नींद खुल जाती है।

डॉक्टर कोल्ला का कहना है कि पैनिक डिसऑर्डर की वजह से भी ऐसा हो सकता है। इसलिए अगर आप ऐसा महसूस करते हैं तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें। यह इलाज से ठीक हो सकता है, लेकिन देरी न करें।

5. नींद के लिए सबसे सुरक्षित सप्लीमेंट कौन सा है?

डॉक्टर कोल्ला कहते हैं कि नींद के लिए सबसे सुरक्षित सप्लीमेंट मेलाटोनिन है। वह हार्मोन जो आपको जल्दी सोने और देर तक सोए रहने में मदद करता है। इसके साइड इफेक्ट भी कम हैं, लेकिन अगर आप किसी बीमारी से जूझ रहे हैं जैसे स्लीप एपनिया, रेस्टलेस लेग्स सिंड्रोम या पैनिक डिसऑर्डर, तो मेलाटोनिन लेने के बाद आपको इन बीमारियों के बारे में पता नहीं चल सकेगा। इसलिए डॉक्टर की सलाह के बिना कोई सप्लीमेंट न लें।

6. वजन भी अच्छी नींद को प्रभावित कर सकता है?

शरीर का ज्यादा वजन भी नींद को प्रभावित कर सकता है, क्योंकि वजन बढ़ने से गले में सॉफ्ट टिश्यू बनने लगते हैं जिससे स्लीप एपनिया का खतरा बढ़ जाता है। स्टडी के मुताबिक वजन कम करने से स्लीप एपनिया में फायदा मिल सकता है। कई स्टडी में यह पता चला है कि नींद की समस्या से भी शरीर का वजन बढ़ने लगता है।

नींद न आने की वजह से हंगर हार्मोन तेजी से बढ़ता है और लोगों में जंक फूड या स्नैक्स खाने की क्रेविंग भी बढ़ने लगती है। इसलिए नींद से जुड़ी बीमारी के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है हेल्दी डाइट।

7. रूम का टेंपरेचर नींद को कैसे प्रभावित करता है?

सुबह सूरज का उगना और दिन चढ़ते ही टेंपरेचर बढ़ने लगना। शाम में सूरज के ढलते ही टेंपरेचर कम होने लगना। इसका सीधा असर हमारी बॉडी पर पड़ता है। हमारा शरीर 24 घंटे की सर्कैडियन रिदम को फॉलो करता है। यह हमारी मेटाबॉलिक और साइकोलॉजिकल एक्टिविटी जैसे बॉडी टेंपरेचर का दिन में बढ़ना और रात में गिरना जैसी गतिविधियों पर नजर रखती है। यह रात में बॉडी का टेंपरेचर धीरे-धीरे कम करने लगती है जिसकी वजह से नींद आने में मदद मिलती है। जिन लोगों के रूम का टेंपरेचर रात के समय काफी ज्यादा होता है, उन्हें नींद से जुड़ी बीमारी हो सकती है।

8. अच्छी नींद के लिए रूम का टेंपरेचर कितना होना चाहिए?

9. फैन और एसी के अलावा रूम को ठंडा रखने का कोई और तरीका हो सकता है?

शिकागो में नॉर्थ-वेस्टर्न यूनिवर्सिटी फीनबर्ग स्कूल ऑफ मेडिसिन में स्लीप मेडिसिन और न्यूरोलॉजी की असिस्टेंट प्रोफेसर सबरा एबॉट ने बताया- आपका शरीर रात में अपने तापमान को कम करने के लिए आपके हाथों और पैरों में गर्मी भेजता है, इसे वासोडिलेशन कहते हैं।

आप रात में मोजे पहनकर इस प्रक्रिया को और आसान बना सकते हैं। यह थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन गरम मोजे आपके शरीर की गर्मी बाहर निकालकर टेंपरेचर कम करने में मदद करते है। बॉडी टेंपरेचर कम करने का एक और तरीका ये भी हो सकता है कि सोने के कुछ घंटे पहले एक्सरसाइज न करें।

10. दिन में नैप लेना इनसोमनिया से जूझ रहे लोगों के लिए फायदेमंद है या नुकसानदायक?

अगर आप इनसोमनिया से जूझ रहे हैं तो आपको दिन में नैप नहीं लेनी चाहिए। इससे रात के समय नींद अच्छी आएगी। वहीं जिन लोगों को इनसोमनिया नहीं है, उनके लिए नैप फायदेमंद हो सकती है। कई स्टडी में पता चला है कि नैप लेना दिल की बीमारी और ब्रेन हेल्थ के लिए फायदेमंद हो सकता है।

11. अगर नैप लेते हैं तो उसे शॉर्ट रखें? क्या दोपहर में नैप लेना ठीक नहीं है?

डॉक्टर वॉकर कहते हैं कि अगर आप नैप लेते हैं तो कुछ बातों का ध्यान रखें जैसे कि दोपहर में 2 बजे के बाद नैप न लें। इससे रात में नींद आने में दिक्कत होती है। 20 मिनट से ज्यादा की नैप न लें। ऐसा करने से आपका ब्रेन गहरी नींद वाली स्टेज पर नहीं पहुंचेगा और रात में आसानी होगी।

12. क्या महिलाओं को पुरुषों की तुलना में नींद की समस्या ज्यादा होती है?

स्टडी से पता चला है कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं में इनसोमनिया से पीड़ित होने की संभावना लगभग 40 प्रतिशत अधिक होती है। इसके कई कारण हो सकते हैं जैसे जेनेटिक, प्रेगनेंसी, मेन्स्ट्रूअल साइकल, मेनोपॉज। इसका दूसरा कारण महिलाओं में डिप्रेशन और एंग्जायटी का हाई रेट भी हो सकता

13. पार्टनर के खर्राटों की वजह से बार-बार नींद खुलती है। ऐसे में चैन की नींद कैसे लें?

डॉक्टर अब्बासी कहते हैं कि खर्राटे लेना मेडिकल प्रॉब्लम नहीं है। लेकिन यह स्लीप एपनिया या किसी स्लीप डिसऑर्डर का संकेत हो सकता है। इसलिए अपने पार्टनर को स्लीप स्पेशलिस्ट या डॉक्टर से सलाह लेने को जरूर कहें।

14. पार्टनर के खर्राटे से बचने के लिए इयरप्लग भी ट्राई किए, लेकिन ये काफी अनकम्फर्टेबल हैं, इसके अलावा क्या किया जा सकता है?

डॉक्टर अब्बासी कहते हैं कि अगर आपका पार्टनर खर्राटे की समस्या के लिए डॉक्टर के पास नहीं जा सकता तो आप व्हाइट नॉइस मशीन ट्राई करें। अक्सर खर्राटे की तेज आवाज नहीं बल्कि घटती-बढ़ती आवाज की वजह से भी दूसरों की नींद खराब होती है, ऐसे में ये मशीन मदद कर सकती है। इसके अलावा आप अपने पार्टनर को दूसरी तरफ करवट लेकर सोने के लिए कह सकते हैं, इससे उनके एपनिया एपिसोड या खर्राटे कम होंगे।

15. पीरियड्स आने के पहले अक्सर नींद से जुड़ी समस्या होती है, ऐसा क्यों?

क्रैंप्स, मूड स्विंग्स और ब्लोटिंग के अलावा कई महिलाओं में इनसोमनिया, बुरे सपने (नाइटमेयर) और बार-बार नींद खुलने की समस्या भी प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम हो सकती है। प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम वाली महिलाओं में अन्य महिलाओं की तुलना में इनसोमनिया होने की आशंका दोगुनी होती है। 10 में से सात महिलाएं जिन्हें पीएमएस की अधिक गंभीर समस्या है (जिसे प्रीमेन्स्ट्रुअल डिस्फोरिक डिसऑर्डर या पीएमडीडी कहते हैं) उन्हें पीरियड्स के पहले नींद की समस्या हो जाती है। इसके अलावा जो महिलाएं बर्थ कंट्रोल पिल्स लेती हैं, उन्हें भी नींद से जुड़ी दिक्कत होती है।

इससे बचने के लिए पीरियड्स आने के कुछ दिन पहले से ही शराब से दूरी बना लें, क्योंकि शराब की वजह से हार्मोन लेवल प्रभावित होते हैं। इसके अलावा अपने स्लीपिंग शेड्यूल को फॉलो करें। रोज-रोज सोने और जागने का समय न बदलें। नियमित रूप से एक्सरसाइज करें। कैफीन वाली चीजों से दूरी बना लें।

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