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यात्रीगण कृपया ध्यान दें:रेलवे ला रहा है AC-3 इकोनॉमी, ज्यादा यात्री ढोकर अधिक कमाई की तैयारी; लेकिन सफर होगा सस्ता

नई दिल्ली18 दिन पहलेलेखक: आदित्य सिंह
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यात्रीगण कृपया ध्यान दें, आपकी यात्रा और सुखद व आरामदायक होने वाली है, क्योंकि भारतीय रेल के स्लीपर कोच का एडवांस वर्जन आने वाला है। रेलवे ने AC-3 इकोनॉमी क्लास बनाया है। इसके लिए लखनऊ स्थित रेलवे के रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड ऑर्गनाइजेशन (RDSO) ने नए कोच तैयार किए हैं। इनका ट्रायल भी चल रहा है और बहुत ही जल्द ये यात्रियों के लिए उपलब्ध होंगे।

RDSO में कोच डिजाइन टीम को लीड करने वाले एडमिन आशीष अग्रवाल ने बताया कि सस्ता और अच्छा ट्रैवल रेलवे का मोटिव है। इसलिए हम नए कोच बना रहे हैं। इन कोचों को तैयार करने की अनुमति रेलवे बोर्ड ने पिछले साल ही दे दी थी।

रेलवे का मकसद इसके जरिए ज्यादा यात्री ढोकर ज्यादा पैसे कमाने का है। हालांकि इसका लाभ यात्रियों को ही होगा। एक्सपर्ट्स के मुताबिक AC-3 इकोनॉमी क्लास का किराया स्लीपर से महंगा और AC-3 से सस्ता होगा।

क्या है AC-3 इकोनॉमी क्लास?

यह एक तरह से स्लीपर क्लास का एडवांस वर्जन होगा, जिसमें AC भी होगा। AC-3 इकोनॉमी कोच स्लीपर की तुलना में ज्यादा आरामदायक और सुविधाओं से लैस होंगे। इसके साथ ही इसमें 72 की जगह 83 यात्री बैठ सकेंगे।

NID की रिसर्च पर आधारित है कोच की डिजाइनिंग

नेशनल इंस्टीट्‍यूट ऑफ डिजाइन (NID) अहमदाबाद ने देश के लोगों की ट्रैवलिंग हैबिट पर रिसर्च कर किताब तैयार की है। इसमें सफर के दौरान लोगों की जरूरतों का जिक्र है। इसी रिसर्च को ध्यान में रखकर नए कोच डिजाइन किए गए हैं। कोच का लेआउट पहले से काफी अलग है। इनकी फिनिशिंग भी काफी लग्जरी है।

नए AC-3 इकोनॉमी क्लास में कितना होगा किराया?

हालांकि अभी ये कोच ट्रायल फेज में हैं, लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि नए AC-3 इकोनॉमी क्लास का किराया स्लीपर से ज्यादा और AC-3 से कम होगा। दरअसल किराया तय करने के दौरान सबसे पहले बेस फेयर तय किया जाता है। बेस फेयर मतलब किसी भी क्लास में ट्रैवल करने के लिए चुकाया जाने वाला कम-से-कम किराया।

अभी स्लीपर का बेस फेयर 124 रुपए है और AC-3 का बेस फेयर 440 रुपए है। इसी आधार पर एक्सपर्ट कह रहे हैं कि नए AC-3 इकोनॉमी क्लास का बेस फेयर 250 से 350 के बीच हो सकता है, लेकिन इसका आखिरी निर्णय रेलवे बोर्ड को लेना है।

AC की सुविधा देकर रेलवे किराया कम कैसे करेगा?

अब सवाल है कि रेलवे AC-3 के साथ लग्जरी सुविधाएं देकर भी किराया कैसे कम करेगा। दरअसल रेलवे किसी भी क्लास या ट्रेन में किराए को कम करना चाहे, तो उसके लिए वह दो फैक्टर्स पर काम करता है। इनके जरिए किराया भी कम हो जाता है और रेलवे को घाटा भी नहीं होता।

1. पैसेंजर की क्षमता बढ़ाकर- अगर रेलवे किसी भी कोच या ट्रेन में यात्रियों की क्षमता बढ़ा दे, तो यात्रियों की संख्या बढ़ने से उसको उतनी ही लागत में ज्यादा किराया मिलने लगता है। ऐसे में किराया कम करने पर रेलवे को कोई अतिरिक्त घाटा नहीं होता है।

2. स्पीड बढ़ाकर- अगर रेलवे ट्रेनों की स्पीड को बढ़ा दे, तो वह कम समय और कम ईंधन में ज्यादा दूरी तय करेगी। इससे भी रेलवे की लागत घटती है और वह यात्रियों के किराए में सहूलियत दे सकता है।

मतलब- नए कोच में ये दोनों बातें हैं। इसे हाई स्पीड और ज्यादा यात्रियों के लिहाज से तैयार किया जा रहा है। इसीलिए इसका किराया AC-3 से कम होगा।

नया क्लास यात्रियों के लिए कब तक उपलब्ध होगा?

नए कोचों का अभी ट्रायल चल रहा है। ट्रायल में पास हो जाने के बाद ही यह यात्रियों के लिए उपलब्ध होंगे। इसके बाद ही नया क्लास भी लॉन्च होगा। एक्सपर्ट्स के मुताबिक नए कोच को ट्रायल पूरा करने में अभी करीब 2 महीने का वक्त लग जाता है। मई तक यह लोगों के लिए उपलब्ध हो सकता है।

रेलवे का ट्रायल कैसे होता है?

कोच का ट्रायल बड़ी रोचक प्रक्रिया है। आपको नहीं पता होगा कि जो अधिकारी ट्रायल के बाद किसी ट्रेन या कोच को पास या फेल होने का सर्टिफिकेट देता है, वह रेलवे का नहीं, बल्कि सिविल एविएशन मंत्रालय का अधिकारी होता है। नीचे ग्राफिक्स में हम 11 पॉइंट्स में आपको बता रहे हैं कि कोच के ट्रायल कैसे होते हैं।

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