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अब भी काम के हैं ऑक्सीमीटर:कोरोना ढलान पर, घर-घर पहुंचे ऑक्सीमीटर का अब क्या करें? जानिए इसके बेहद जरूरी इस्तेमाल

16 दिन पहले
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कोरोना काल में शुरुआती लक्षणों पर ध्यान देने और सही इलाज के अलावा एक शब्द बार-बार सुना गया, वो था ऑक्सीमीटर। डॉक्टरों की हल्के लक्षण वाले कोरोना के मरीजों को सलाह थी कि घर पर रहते हुए ही प्रोटोकॉल का पालन करते हुए ऑक्सीमीटर का इस्तेमाल करें।

इसकी मदद से अनुमान लगाया जा सकता है कि कब, किस मरीज को अस्पताल लाने की जरूरत है। इससे अस्पतालों पर भी बोझ कम होगा, जिससे जरूरतमंदों को सही समय पर इलाज मिल सकेगा।

दक्षिण अफ्रीका की एक रिसर्च से पता चला है कि कोरोना पॉजिटिव आने के बाद ऑक्सीजन के स्तर की जांच के लिए पल्स ऑक्सीमीटर का उपयोग करने से मरीज की जान बच सकती है। अध्ययन के लिए 8,115 हाईरिस्क वाले मरीजों को घर पर ऑक्सीजन चेक करने के लिए ऑक्सीमीटर दिया गया। हाईरिस्क वाले रोगियों में बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं, हृदय रोग और मधुमेह जैसी पुरानी बीमारियों से ग्रसित लोग थे। कोविड की पहचान होने के बाद रोगियों को पल्स ऑक्सीमीटर दिया गया और यह सुनिश्चित करने के लिए फॉलो-अप कॉल किया गया कि वे इसका सही उपयोग कर रहे हैं या नहीं।

कोरोना मरीजों को 90 प्रतिशत से कम रीडिंग आने पर इमरजेंसी रूम में जाने के लिए कहा गया। साथ ही मरीजों से यह भी कहा गया कि अगर सांस लेने में दिक्कत है तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं, भले ही ऑक्सीमीटर पर रीडिंग कुछ भी आए। जिन मरीजों को घर पर ही ऑक्सीमीटर से निगरानी रखने के लिए कहा गया था। उनमें मरने की संभावना 50 प्रतिशत कम थी।

कोरोना के बाद ऑक्सीमीटर किस काम का?
ये तो बात हो गई कोरोना में ऑक्सीमीटर के इस्तेमाल की, लेकिन अब ज्यादातर लोग फुली वैक्सीनेटेड हैं इसलिए कोरोना के मामलों में भी धीरे-धीरे कमी आ रही है। ऐसे में लोगों को लगने लगा है कि अब इस ऑक्सीमीटर का क्या काम है? तो हम आपको बता दें कि ऑक्सीजन सैचुरेशन केवल कोरोना के मरीजों में ही कम नहीं होता है, बल्कि कई दूसरी वजह से भी कम हो सकता है। इसलिए कोरोना के अलावा भी ऑक्सीमीटर हमारे बहुत काम आता है।

ऑक्सीमीटर के फायदे
पल्स ऑक्सीमीटर उन लोगों के लिए उपयोगी होते हैं जिनमें ऑक्सीजन सैचुरेशन को प्रभावित करने वाली स्थितियां या बीमारियां होती हैं। उदाहरण के लिए, स्लीप एक्सपर्ट उन लोगों को रात के समय ऑक्सीमीटर साथ रखने की सलाह देते हैं जो स्लीप एपनिया या खर्राटों की समस्या से पीड़ित हैं।

नेलपॉलिश लगी होने पर गलत हो सकती है ऑक्सीमीटर की रीडिंग
पल्स ऑक्सीमीटर को वैसे तो इस्तेमाल करना एकदम आसान है, लेकिन इसके लिए भी कुछ नियम हैं। डिवाइस की सटीकता अलग-अलग हो सकती है। खासकर गहरे रंग की त्वचा वाले रोगियों पर। अमेरिकी संस्थान रोग निवारक एवं नियंत्रक यानी सीडीसी ने अपने अध्ययन में बताया कि 10 अश्वेत रोगियों में से किसी एक में परिणाम सटीक नहीं आता है। त्वचा मोटी होने पर, त्वचा का तापमान, तंबाकू का इस्तेमाल और नाखूनों पर नेलपॉलिश लगी होने की स्थिति में हो सकता है कि ऑक्सीमीटर की रीडिंग सही नहीं आए।

इसलिए जरूरी है कि नेलपॉलिश हटाकर ये डिवाइस उंगली पर लगाएं। इसके अलावा काफी ठंडे तापमान में भी ऑक्सीमीटर की एक्युरेसी गड़बड़ा जाती है, इसलिए हाथ ठंडे न हों, ये ध्यान रखें।

कितना होना चाहिए खून में ऑक्सीजन का स्तर
इस्तेमाल से पहले ये जानना भी जरूरी है कि खून में ऑक्सीजन का सही स्तर कितना होता है या होना चाहिए। स्वस्थ व्यक्ति के रक्त में ऑक्सीजन का सैचुरेशन लेवल 95 से 100 फीसदी के बीच होता है। 95 फीसदी से कम ऑक्सीजन लेवल इस बात का संकेत है कि उसके फेफड़ों में परेशानी हो रही है। ऑक्सीजन का स्तर अगर 94 से नीचे जाने लगे तो सचेत हो जाना चाहिए और अगर ये स्तर 93 या इससे नीचे हो जाए तो मरीज को तुरंत अस्पताल ले जाना चाहिए, क्योंकि ये संकेत है कि उसके शरीर की 8 फीसदी तक कोशिकाएं ऑक्सीजन का प्रवाह नहीं कर पा रही हैं।