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फोन से डूम स्क्रोलिंग की बीमारी:कोरोना के दौर में बुरी खबरें लगातार देखने की लत से डिप्रेशन का शिकार हो रहे लोग, जानिए इस मनोरोग से बचने के तरीके

7 दिन पहले
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कोरोना महामारी लोगों को आर्थिक और मानसिक दोनों तरह से प्रभावित कर रही है। इंटरनेट पर कोरोना से जुड़ी खबरें लगातार देखने का असर लोगों की मेंटल हेल्थ पर भी हो रहा है। महामारी का मेंटल हेल्थ से जुड़ा एक प्रभाव है डूम स्क्रोलिंग या डूम सर्फिंग।

तो चलिए सबसे पहले जानते हैं कि आखिर डूम स्क्रोलिंग है क्या...

लगातार निगेटिव या डिप्रेशन वाली खबरें स्क्रोल करने की आदत
द जर्मिनेट में पब्लिश एक आर्टिकल के मुताबिक जब आप लगातार निगेटिव या डिप्रेशन वाली खबर को स्क्रोल करते रहते हैं तो उसे डूम सर्फिंग या डूम स्क्रोलिंग कहते हैं। परेशान करने वाली खबरों के बारे में भी अधिक जानकारी पाने के लिए उसे लगातार स्क्रोल करते रहना आम बात है।

पॉजिटिव से ज्यादा निगेटिव खबरें पढ़ने के लिए दिमाग प्रेरित करता है
हम में से बहुत से लोग महामारी से संबंधित खबरों और इससे जूझ रहे लोगों से जुड़ी खबरें लगातार पढ़ने या देखने से खुद को रोक नहीं पाते हैं। कुछ नई इंफॉर्मेशन जानने के लिए लोग लगातार दूसरी वेबसाइट और चैनल चेक करते रहते हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि निगेटिव खबरों के लिए ऐसा करना कोई नई बात नहीं है। हमारा दिमाग पॉजिटिव खबरों से ज्यादा निगेटिव खबरें पढ़ने के लिए प्रेरित करता है।

डूम स्क्रोलिंग हमारी मेंटल हेल्थ को प्रभावित करता है
आजकल सोशल मीडिया पर हर चीज को बढ़ा-चढ़ा कर दिखाया जाता है। यही वजह है कि न्यूज वेबसाइट, चैनल और अखबार से दूर रहने के बावजूद हमें सारी चीजें लगातार सोशल मीडिया पर मिलती रहती हैं। लगातार ये निगेटिविटी हमारी मेंटल हेल्थ को बुरी तरह से प्रभावित करती है और इसकी वजह से बहुत ज्यादा डर, एंग्जायटी, डिप्रेशन की समस्या हो सकती है।

लगातार निगेटिव खबरों की वजह से कैटास्ट्रोफाइजिंग भी हो सकता है, जिसकी वजह से आपको हर जगह सिर्फ निगेटिविटी ही नजर आने लगती है।

लगातार बढ़ रहा है लोगों का स्क्रीन टाइम
एरिक्सन मोबिलिटी रिपोर्ट के मुताबिक भारत में लोगों का औसतन स्क्रीन टाइम चार से पांच घंटे तक हो गया है। अमेरिका में हुई एक स्टडी के मुताबिक ग्लोबल लेवल पर गैजेट का यूज टाइम 90% तक बढ़ गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक स्मार्टफोन का इस्तेमाल जहां पहले प्रति व्यक्ति औसतन 3 घंटे होता था, वो 5 घंटे तक पहुंच गया है। ब्रॉडबैंड या वाईफाई से जुड़े रहने के दौरान पहले एक व्यक्ति औसतन 2.5 घंटे स्क्रीन इस्तेमाल करता था, अब यह आंकड़ा 4.5 घंटे तक जा पहुंचा है।

टेक्सास यूनिवर्सिटी में साइकोलॉजी के प्रोफेसर डॉ. जॉन डी केरी कहते हैं कि सोशल मीडिया या डिजिटल डिवाइस के इस्तेमाल को एक दिन के लिए भी रोकना बहुत मुश्किल है। सोशल मीडिया एक दूसरे के साथ जुड़े रहने, सूचना साझा करने, मनोरंजन मुहैया कराने में मदद करता है। इसके फायदे और नुकसान दोनों हैं। हालांकि उस पर बहुत ज्यादा समय बिताना भी नशे की लत की तरह है। उससे हम प्रभावित होते हैं और इसका नकारात्मक प्रभाव हमारे मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है।

मेंटल हेल्थ पर डूम स्क्रोलिंग के प्रभाव को कम करने के लिए ये तरीके अपनाएं

सोशल मीडिया पर समय बिताना कम करें
स्मार्टफोन में एक खास फीचर होता है, जो इस बात का रिकॉर्ड रख सकता है कि आप कितना समय किस ऐप पर बिता रहे हैं। इस फीचर को ट्रैक करते रहें, जिससे आपको समय का पता चलता रहेगा। सोने से पहले और उठने के तुरंत बाद मोबाइल फोन इस्तेमाल करने से बचें। हो सके तो अपना मोबाइल बेड से दूर रखें।

अपनी सेहत का ख्याल रखें
नियमित एक्सरसाइज करने से न्यूरोट्रांसमीटर्स रिलीज होते हैं, जिनमें फील-गुड इफेक्ट होता है। योग और मेडिटेशन भी तनाव को दूर करने में मदद करते हैं। इसके साथ ही हेल्दी और बैलेंस डाइट लें और अपने फोन को स्क्रोल करते समय अनहेल्दी चीजें खाने से बचें।

माइंडफुलनेस की प्रैक्टिस करें
जो भी काम कर रहे हैं उसे माइंडफुलनेस के साथ करें। यानी अगर आप रीडिंग, राइटिंग, पेंटिंग जैसा कुछ भी कर रहे हैं तो उसे पूरे तरीके से मन लगाकर करें। बार-बार मोबाइल स्क्रोल करने के चक्कर में अपना ध्यान न भटकाएं। कोई भी खबर पढ़ते वक्त उसका सोर्स जरूर चेक करें। साथ ही पॉजिटिव खबरें भी पढ़ें और उन्हें दोस्तों या फिर परिवार के साथ शेयर भी करें।

स्टॉप टेक्नीक ट्राई करें
अगर आप मोबाइल स्क्रोलिंग कम नहीं कर पा रहे हैं, तो स्टॉप टेक्नीक अपनाएं। यदि आपको लगता है कि आपका तय किया हुआ स्क्रीन टाइम पूरा हो गया है, फिर भी आपकी उंगलियां लगातार स्क्रीन स्क्रोल करती जा रही हैं, तो जोर से चिल्लाकर खुद को स्टॉप कहें। ऐसा करने पर आपके हाथ रुक जाएंगे। ऐसा जब आप कई बार करेंगे तो आपका ब्रेन इसके लिए तैयार हो जाएगा कि आप जो भी कर रहे हैं, उसे इतने मिनट बाद रोक देना है।