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घर में पानी नहीं, जहर पी रहे हैं आप:सरकार ने खुद दिखाए आंकड़े, हो सकता है कैंसर और अल्जाइमर, समझिए कैसे बचें

9 दिन पहलेलेखक: अलिशा सिन्हा
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देश की 80% से ज्यादा आबादी जहरीला पानी पी रही है।

सही पढ़ा आपने। जल शक्ति मंत्रालय के एक डॉक्युमेंट के अनुसार, देश की 80% से ज्यादा आबादी के घरों में पानी ग्राउंड वाटर से जाता है। जिसमें जहरीली धातुओं की मात्रा तय मानक से ज्यादा पाई गई है। मतलब साफ है कि पानी जहर बनता जा रहा है।

सरकार के मुताबिक 209 जिलों के ग्राउंड वाटर में आर्सेनिक और 491 जिलों में आयरन की मात्रा तय मानक से ज्यादा मिली है। जो चिंताजनक है।

पीने के पानी में आर्सेनिक या आयरन की मात्रा ज्यादा होने से क्या-क्या नुकसान हो सकते हैं। हमें कैसे पता चलेगा कि इनकी मात्रा ज्यादा है और इससे बचने के उपाय क्या हैं... सब कुछ आज जरूरत की खबर में जानेंगे।

सवाल- आर्सेनिक और आयरन होता क्या है, जिसकी मात्रा पानी में बढ़ने से वो जहरीला माना जा रहा है?
जवाब-

  • आर्सेनिक- ये एक केमिकल एलिमेंट है। यह वातावरण में नेचुरल तरीके से मौजूद होता है। कुछ एग्रीकल्चर और इंडस्ट्रियल एक्टिविटी के कारण आर्सेनिक ग्राउंड वाटर में घुल जाता है। फिर पानी के जरिए हमारे शरीर में पहुंचता है।
  • आयरन- आर्सेनिक की तरह आयरन भी एलिमेंट है। मानव शरीर के न्यूट्रिशन में आयरन एक जरूरी एलिमेंट है। अच्छे स्वास्थ्य के लिए आपको हर रोज तय मानक के हिसाब से आयरन को अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए।

सवाल- आर्सेनिक और आयरन शरीर को कैसे नुकसान पहुंचा सकते हैं?
जवाब-
डॉ. वी पी पांडे के मुताबिक, हमारा शरीर को बहुत कम मात्रा में आर्सेनिक चाहिए होता है, जो आसानी से बाहर (पेशाब के जरिए) निकल जाता है। अगर इसकी मात्रा ज्यादा हो गई तो ये शरीर में कई तरह के निगेटिव इफेक्ट्स पैदा कर सकता है।

वहीं आयरन हमारे शरीर में खून बनाने के लिए जरूरी फैक्टर है। इसके न होने से खून की कमी हो जाती है, लेकिन शरीर में तय मात्रा में ही आयरन का होना जरूरी है। जब लंबे समय तक ज्यादा आयरन शरीर में जाता है, तो यह जहर की तरह काम करने लगता है। इससे कई तरह की बीमारियां हो सकती हैं।

आर्सेनिक और आयरन के अलावा कुछ और चीजें भी ग्राउंड वाटर में ज्यादा पाई गई हैं। एक नजर उन पर भी डाल लीजिए-

  • 11 राज्यों के 29 जिलों के ग्राउंड वाटर में कैडमियम की मात्रा 0.003 मिलीग्राम प्रति लीटर से ज्यादा है।
  • 16 राज्यों के 62 जिलों के ग्राउंड वाटर में क्रोमियम की मात्रा 0.05 मिलीग्राम प्रति लीटर से ज्यादा देखी गई है।
  • 18 राज्यों में 152 जिले के ग्राउंड वाटर में 0.03 मिलीग्राम प्रति लीटर से ज्यादा यूरेनियम मिला है।

आंकड़ों के बाद जानते हैं कि जब पानी में इन सभी चीजों की मात्रा ज्यादा हो जाती है तो कौन-कौन सी बीमारियां हो सकती हैं।

  • पानी में कैडमियम ज्यादा होने से किडनी, लिवर, हड्डी और ब्लड रिलेटेड बीमारियां हो सकती हैं।
  • पानी में क्रोमियम की मात्रा ज्यादा होने से छोटी आंत में हाइपरलेशिया डिफ्यूज और ट्यूमर का खतरा बढ़ सकता है।
  • पानी में यूरेनियम की ज्यादा होने पर किडनी से रिलेटेड बीमारियां और कैंसर होने की आशंका रहती है।

(सोर्स- University of California, Water Quality Association)

शहर से ज्यादा गांव की हालत खराब

देश की आधे से ज्यादा आबादी गांवों में रहती हैं। यहां पीने के पानी का मुख्य जरिया ही ग्राउंड वाटर है। जैसे- हैंडपंप, कुआं, नदी-तालाब या बोरवेल।

सवाल उठता है कि शहर हो या गांव, जिन लोगों के घरों में ग्राउंड वाटर आता है या कुआं, हैंडपंप नदी-तालाब या बोरवेल से डायरेक्ट पानी आता है, उन्हें कैसे पता लगेगा कि उनके पानी में आयरन और आर्सेनिक की मात्रा ज्यादा है या नहीं? इसके लिए नीचे दिए ग्राफिक्स को पढ़ें और दूसरों के साथ शेयर भी करें...

सवाल- पीने के पानी में आयरन और आर्सेनिक कितना होना चाहिए?
जवाब-
ICMR ने पीने के पानी में ज्यादा से ज्यादा आयरन की मात्रा 1.0 PPB तय की है।

आर्सेनिक के लिए निर्देशित मानक या मैक्सिमम कंटामिनेशन लेवल (MLC) 10 PPB (WHO के अनुसार) है, जिसे ज्यादातर विकसित देश मानते हैं। विकासशील देश जिनमें भारत और बांग्लादेश भी शामिल हैं,व हां पीने वाले पानी में आर्सेनिक की मात्रा 50 PPB मानी गई है।

सवाल- अगर वाटर टेस्टिंग की रिपोर्ट में आपके घर का पानी पीने लायक नहीं बताया जाता है तो क्या होता है?
जवाब-
अगर आपके घर के पानी में कोई भी मिनरल ज्यादा होता है और उसका ट्रीटमेंट नहीं किया जाता है, तो उस कुएं, हैंडपंप या बोरवेल को बंद कर दिया जाता है। फिर घर पर किसी और रिसोर्स के जरिए पानी लेने के सलाह दी जाती है। जैसे- नगरपालिका के नल का कनेक्शन लें।

सवाल- कई बार आंधी-तूफान या बाढ़ जैसी इमरजेंसी अचानक आ जाती है। ऐसे में हो सकता है कि हमारे नल में पानी न आए और कुएं, हैंडपंप या बोरवेल का पानी पीने लायक न हो। ऐसी सिचुएशन में बीमारी से बचने के लिए हम कैसे पानी पिएं।
जवाब-
CDC के अनुसार, जब तक आपके घर में पीने लायक पानी का सप्लाई न हो तब तक…

  • खाना पकाने, पर्सनल हाइजीन और पीने के लिए बोतल बंद, उबला हुआ या किसी दूसरे घर से पानी मांगकर इस्तेमाल करें।
  • पानी को उबालने और ट्रीट करने के लिए अपने एरिया के स्टेट, लोकल और ट्राइबल हेल्थ डिपार्टमेंट की सिफारिशों को फॉलो करें।
  • जिस पानी में फ्यूल, रेडियोएक्टिव मटेरियल, केमिकल या कोई मिनरल ज्यादा है, उसे उबालने से भी कुछ नहीं होगा। इसलिए पानी का दूसरा सोर्स मिलने तक बोतलबंद या किसी दूसरी जगह से लेकर ही पानी पिएं।
  • अपने घर के अंदर और बाहर पानी सप्लाई के दूसरे सोर्स को तलाशें, जहां से पीने लायक पानी मिल सके।
  • कभी भी रेडिएटर या बॉयलर से पानी गर्म न करें।

सवाल- आजकल शहरों में बहुत से लोग वाटर प्यूरीफायर लगवाते हैं। क्या ये पीने के पानी में आयरन और आर्सेनिक की मात्रा को कंट्रोल कर सकता है?
जवाब-
वाटर प्यूरीफायर कई तरह के होते हैं। आपको खरीदने से पहले इस बात को आइडेंटिफाई करना होगा कि कौन सा वाटर प्यूरीफायर आर्सेनिक और आयरन को कंट्रोल कर सकता है और कौन सा नहीं।

चलते-चलते

केंद्र ने जो आंकड़े राज्यसभा में पेश किए हैं, उस पर भी नजर डाल लीजिए-

रिहायशी इलाकों में भी पीने के पानी के स्रोत प्रदूषित हो चुके हैं। सरकारी आंकड़ों की मानें तो 671 इलाके फ्लोराइड, 814 इलाके आर्सेनिक, 1,4079 इलाके आयरन, 9,930 इलाके खारापन, 517 इलाके नाइट्रेट और 111 इलाके भारी धातु से इंफेक्टेड हैं।

जरूरी बात- किसी इंसान को हेल्दी रहने के लिए हर दिन कम से कम 2 लीटर पानी पीना चाहिए। कोई भी इंसान बिना खाने के महीनेभर तक जिंदा रह सकता है, लेकिन बिना पानी के सिर्फ एक हफ्ते तक ही। एक व्यक्ति अपनी पूरी जिंदगी में औसतन 75 हजार लीटर पानी पी जाता है।