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हम फीवर से इतना डरते क्यों हैं?:कई परिस्थितियों में फीवर फायदेमंद होता है, इससे गंभीर बीमारी का खतरा कम होता है

8 दिन पहलेलेखक: जेन ई ब्रॉडी
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कभी आपने सुना है कि फीवर फायदेमंद हो सकता है? नहीं न। लेकिन हम आपको बताते हैं कि फीवर कई मायनों में फायदेमंद होता है। ये बीमारी के गंभीर परिणामों और बीमारी के शरीर में लंबे समय तक बने रहने की संभावना को कम करता है।

अमेरिका में रहने वाली जेन ब्रॉडी बताती हैं कि स्थानीय लोग कोरोना के फैलाव को रोकने के लिए कई तरह के उपाय कर रहे हैं। वे किसी भी बिल्डिंग के अंदर जाने वाले लोगों का फोरहैड स्कैनर से टेम्परेचर चेक करते हैं। एक दिन उनका टेम्परेचर 96.2 डिग्री दर्ज किया गया। इससे पहले उनका टेम्परेचर 97.5 डिग्री था।

ब्रॉडी का सवाल है कि क्या 98.6 डिग्री तक बॉडी टेम्परेचर नॉर्मल माना जाता है ?

सभी का बॉडी टेम्परेचर एक जैसा नहीं होता
ब्रॉकलिन में रहने वाले बच्चों के डॉक्टर फिल्पिया गोर्डन ने ब्रॉडी को इमेल के जरिए एक आर्टिकल भेजा था। इस आर्टिकल को कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के दो एंथ्रोपॉलोजिस्ट माइकल गुरवेन और थॉमस क्राफ्ट ने लिखा है।

गोर्डन ने लिखा कि सभी का बॉडी टेम्परेचर एक जैसा नहीं होता है। इसका कोई मानक नहीं है। हर शरीर का टेम्परेचर अलग-अलग होता है। ये बदलता रहता है। सुबह के समय बॉडी टेम्परेचर कम तो शाम को ज्यादा हो जाता है। एक्सरसाइज के दौरान भी ये बदल जाता है। ये मेन्सचुरेशन के समय भी अलग होता है। यंग लोगों की तुलना में बुजुर्गों का टेम्परेचर कम होता है।

इसके अलावा कई तरह के रिसर्चर ने पालो अल्टो के रहने वाले लोगों की हजारों की संख्या में टेम्परेचर रीडिंग ली है। इसमें उन्होंने 97.5 डिग्री टेम्परेचर को न्यू नॉर्मल पाया है। इसमें पाया गया कि नॉर्मल बॉडी टेम्परेचर 97.2 से 99.5 डिग्री होता है।

स्टैनफॉर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर जूली परसोनेट ने 1862 से 2017 तक का डाटा रिव्यू किया। इसमें पाया कि बॉडी टेम्परेचर हर दस साल में 0.05 फारेनहाइट तक कम होता रहा। करीब 75% लोगों का नॉर्मल बॉडी टेम्परेचर 98.6 डिग्री से कम होता है।

क्या 98.6 टेम्परेचर पर फीवर होता है ?
इस सवाल का जवाब प्रोफेसर शेरॉन एस इवान हां में देते हैं। वे कहते हैं कि 98.6 टेम्परेचर पर फीवर होता है। हालांकि, 100.4 डिग्री टेम्परेचर को फीवर का सबसे निचला स्तर माना जाता है।

क्या फीवर फायदेमंद है?
एलिजाबेथ ए रेपास्की और डेनियल टी फीशर ने अपने रिव्यू में कहा कि डॉक्टर इवान ने कई परिस्थितियों में फीवर को फायदेमंद बताया है। इसमें उन्होंने बीमारी की गंभीरता और उसके शरीर में लंबे समय तक रहने की संभावना कम करने की बात का जिक्र किया है।

हालांकि, वे फीवर कम करने के लिए डॉक्टर की सलाह पर दवाई लेने पर जोर देती हैं। फीवर इम्यून सिस्टम के हर पहलू को प्रभावित करता है, जिससे ये सही तरह से काम कर सके।

इम्युन सिस्टम पर इस तरह से काम करता है फीवर
फीवर जन्मजात इम्यूनिटी को एक्टिव करता है। इस दौरान व्हाइट सेल एक जगह इकट्ठे होते हैं। न्यूट्रोफिल्स बॉडी में पेथोजैन्स और मैक्रोफेज्स की तलाश कर उन्हें जकड़ लेते हैं। इसके बाद माइक्रोफेज रिएक्ट करता है और मदद के लिए सिग्नल भेजता है।

इसके बाद इम्यूनिटी के T सेल और B सेल एक्शन मोड में आते हैं। ये सेल्स एंटीबॉडी बनने के बाद हमलावर पर रिएक्ट करते हैं।

क्या फीवर का इलाज करना गलत है?
पेंसिलवेनिया यूनिवर्सिटी के डॉक्टर पॉल ओफिट ने अपने वीडियो में फीवर के ट्रीटमेंट को लेकर चेताया है। उनका मानना है कि फीवर उम्र को बढ़ाता है। वे कहते हैं इम्यूनिटी हाई टेम्परेचर में अच्छे से काम करती है। वे कहते हैं कि जब हम फीवर को कम करने के लिए मेडिसिन लेते हैं, तो हम इम्यून सिस्टम के खिलाफ काम करते हैं।

डॉक्टर पॉल कहते हैं कि फीवर सिरदर्द, मांसपेशियों के दर्द और थकान के लक्षणों में राहत देता है। लेकिन वह जोर देकर फीवर के समय बाहर निकलने को मना करते हैं। इससे संक्रमण का प्रसार रोका जा सकता है।

वे कहते हैं कि फीवर वायरल शेडिंग और फ्लू जैसी बीमारी को शरीर में लंबे समय तक बने नहीं रहने देता है। डॉक्टर गोर्डन की मानें तो पैरेंट्स बच्चों को फीवर आने पर डर जाते हैं और तुरंत इलाज शुरू करा देते हैं। उनका कहना है कि हर बार हाई टेम्परेचर फीवर हानिकारक नहीं है।

हाई टेम्परेचर फीवर को लेकर चेतावनी
अगर फीवर इन्फेक्शन की वजह है तो हमें सतर्क रहने की जरूरत है। अगर ऐसे में बच्चा कार में बंद हो और एक एथलीट धूप में एक्सरसाइज कर रहा है तो उसमें स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।

हालांकि कंज्यूमर को टेम्परेचर लेने के तरीकों का ध्यान रखना चाहिए। कान का टेम्परेचर ओरल टेम्परेचर से ज्यादा होता है, जो हाथ के बगल में और सिर को स्कैन कर लिया जाता है। गोर्डन कहते हैं कि नवजात बच्चों का टेम्परेचर रेक्टल थर्मामीटर से लेना चाहिए। हालांकि, बड़े बच्चों में जब तक टेम्परेचर रीड नहीं किया जाता, तब तक वह मायने नहीं रखता है।

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