पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

Install App
  • Market Watch
  • SENSEX48832.030.06 %
  • NIFTY14617.850.25 %
  • GOLD(MCX 10 GM)470210.83 %
  • SILVER(MCX 1 KG)689701.52 %

Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप

जरूरत की खबर:अटेंशन न मिलने की वजह से भी बच्चों में होता है डिप्रेशन, टीवी और इंटरनेट से मिल जाता है सुसाइड का ऑप्शन

12 दिन पहले
  • कॉपी लिंक

डिप्रेशन का युवा या वयस्क ही नहीं बच्चे भी हो सकते हैं। 6 साल से ज्यादा उम्र वाला कोई भी बच्चा डिप्रेशन का शिकार हो सकता है। आमतौर पर बच्चे का नाराज होना या रूठना स्वाभाविक होता है, लेकिन अगर बच्चे की खामोशी में असामान्य लक्षण झलक रहे हैं तो उसे बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। डिप्रेशन का शिकार बच्चों की बॉडी लैंग्वेज से भी उनकी समस्या को समझा जा सकता है। जानिए बच्चों में डिप्रेशन के लक्षण….

डॉ. प्रज्ञा रश्मि के मुताबिक बच्चों में डिप्रेशन के शुरुआती लक्षण कुछ ऐसे होते हैं -

  • स्वभाव में चिड़चिड़ापन आना या बहुत ज्यादा गुस्सा करना, हमेशा दुखी-दुखी से रहना।
  • नींद में अचानक से बदलाव आना, कम नींद आना या बहुत ज्यादा देर तक बहुत ज्यादा देर तक सोते रहना।
  • हमेशा मायूस रहना और किसी भी काम में कोशिश किए बिना ही हार मान लेना।
  • थकावट और कम एनर्जी।
  • एकाग्रता में कमी और मामूली गलती के लिए खुद को ज्यादा कसूरवार ठहराना।
  • सामाजिक गतिविधियों से दूरी बनाए रखना, दोस्तों और रिश्तेदारों से कम घुलना-मिलना।

पैनिक अटैक
डॉ. प्रज्ञा के मुताबिक पैनिक अटैक को एंग्जाइटी अटैक भी कहते है। कई लोगों में ये डिप्रेशन का शुरुआती दौर होता है। कई बार पैनिक अटैक और डिप्रेशन साथ-साथ भी आ सकते हैं। कई बार एंग्जाइटी अटैक, सिर्फ एंग्जाइटी अटैक बन कर ही रह जाता है, डिप्रेशन तक की नौबत नहीं आती है। ऐसी स्थिति में हमेशा नकारत्मकता बीमार लोगों पर हावी रहती है।

डिप्रेशन में होने और उदास होना दोनों अलग बातें हैं
डॉ. प्रज्ञा रश्मि कहती हैं कि हर बच्चा जो चुपचाप है, जरूरी नहीं वह डिप्रेशन का शिकार है। बच्चा उदास भी हो सकता है। बच्चा अगर शांत है, किसी से बात नहीं कर रहा, उसे अंधेरा पसंद है तो ऐसे में बच्चा उदास हो सकता है। लेकिन बच्चा सबकुछ कर रहा है फिर भी काफी स्लो है, वो किसी भी चीज को एंजॉय नहीं कर रहा है, उसे किसी चीज में रुचि नहीं है तो बच्चा डिप्रेशन में हो सकता है। जैसे- किसी बच्चे को स्विमिंग करना पसंद है और वो पहले जब स्विमिंग के लिए जाता था तो खुश रहता था, चहकता था, लेकिन अचानक से उसने स्विमिंग को एंजॉय करना बंद कर दिया तो इसका मतलब वो डिप्रेशन में है।

बच्चों में डिप्रेशन की वजह
डॉ. प्रज्ञा के मुताबिक एक साथ बहुत अटेंशन मिलने के बाद एकाएक अटेंशन नहीं मिलने की वजह से कई बार लोग डिप्रेशन में चले जाते है। इसलिए कम उम्र में शोहरत पाने वाले बच्चों को इसका खतरा ज्यादा रहता है। इसके अलावा घर में तनाव है, कोई पारिवारिक कलह, सेक्शुअल अब्यूज, रिलेशनशिप जैसी चीजें भी बच्चों में डिप्रेशन का कारण बनती हैं।

टीवी और इंटरनेट बता रहा है सुसाइड का ऑप्शन
डॉ. प्रज्ञा कहती हैं एशिया में पिछले 10 सालों में चौथी-पांचवीं के बच्चों में सुसाइड के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इसकी वजह है बदलता लाइफस्टाइल, बायो केमिकल चेंजेस, फास्ट फूड खाना और सबसे बड़ी वजह है मीडिया एनवायरमेंट। जब बच्चे टीवी में किसी को सुसाइड करते देखते हैं तो उनके मन में ये ख्याल आता है कि अगर कोई चीज न मिले तो हम ऐसा भी कर सकते हैं। बच्चों में रिजेक्शन को अपनाने की क्षमता कम होने लगती है।

बच्चों को इन उपायों के जरिए डिप्रेशन से बाहर निकालें-

बच्चों को दुखी रहने दें

  • याद रखें कि बच्चों का दुखी होना सामान्य हैं और बच्चों को उनके एहसासों से बचाना पैरेंट्स की जिम्मेदारी है। डॉ. प्रज्ञा के मुताबिक, आप बच्चों के बुरे एहसासों को मैनेज कर उनकी मदद कर सकते हैं, न कि उन्हें नकारने से।
  • डॉक्टर प्रज्ञा बताती हैं कि माता-पिता खुद को बच्चों का रक्षक समझते हैं, लेकिन यह तरीका बच्चों को और कमजोर बनाता है। हमें बच्चों को अपने एहसासों को मानकर और निराशाओं से जीतकर जीना सिखाना चाहिए।

बच्चों से बातचीत में आशावादी रहें

  • कभी-कभी पैरेंट्स बच्चों को बचाने के चक्कर में उन्हें जानकारी से दूर रखते हैं। हम अनुमान लगाते हैं कि बच्चों को यह जानने की जरूरत नहीं है कि इस वक्त क्या चल रहा है। डॉ. प्रज्ञा के मुताबिक यह बहुत बड़ी गलती है, क्योंकि यह क्या हो सकता है को लेकर बच्चों की घबराहट बढ़ सकती है।

रोज की आदतों में फिजिकल एक्टिविटी को शामिल करें

  • रुटीन बेहद जरूरी है, क्योंकि इससे बच्चों को अच्छा महसूस होता है। डॉक्टर प्रज्ञा के अनुसार, रुटीन बनाने से जीवन में निश्चितता आएगी। इससे आगे के बारे में सोचने में भी मदद मिलेगी। इसलिए रोज की आदतों में फिजिकल एक्टिविटी को जरूर शामिल करें।
  • बच्चों को चलाते रहें। फिजिकल एक्टिविटी डिप्रेशन को खत्म करने और इससे बचने में मदद करती है। बच्चों के साथ थोड़ा घूमने बाहर जाएं।

डिप्रेशन के लक्षण देखें तो एक्सपर्ट्स की मदद लें

  • डॉक्टर प्रज्ञा के अनुसार जब बच्चे क्लीनिकली डिप्रेस्ड होते हैं, तो वे चीजों में दिलचस्पी खोने लगते हैं। किसी भी एक्टिविटी का मजा नहीं ले पाने पर आप यह भरोसे के साथ कह सकते हैं कि यह बच्चे के लिए अबनॉर्मल है। यह सबसे आम लक्षण होता है।
  • इसके अलावा दूसरे भी लक्षण होते हैं, जैसे बच्चा पहले से ज्यादा या कम खाने और सोने लगे। इसके साथ ही वे थोड़े शांत और चिड़चिड़े हो जाते हैं। अगर ऐसा कुछ दो हफ्तों से ज्यादा रहता है या रोज हो रहा है, तो यह चिंता की बात है। आप पीडियाट्रीशियन की सलाह ले सकते हैं। नजदीक के लोकल मेंटल हेल्थ क्लीनिक, हॉस्पिटल की मदद भी ले सकते हैं। साथ ही चाइल्ड लाइन 1022 में भी कॉल कर सकते हैं।

डिप्रेशन का इलाज

  • डॉ प्रज्ञा कहतीं है, "बच्चों में डिप्रेशन का इलाज बड़ों की तरह ही होता है, बस जरूरत होती है बच्चों की मानसिकता को ज्यादा बेहतर समझने की।"
  • जब पैरेंट्स को बच्चे के डिप्रेशन के बारे में पता चलता है, तो वे डर जाते हैं। इस सोच में पड़ जाते हैं कि अब क्या होगा, लेकिन डरने की जरूरत नहीं है। क्योंकि बच्चे के साथ सबसे क्लोज रिलेशन पैरेंट्स का होता है। बच्चे से बात करें, उसे समझें। बच्चे की जिंदगी में क्या चल रहा है, उसके दोस्त कैसे हैं, वो अगर आपसे पैसे ले रहा है तो उन पैसों को कैसे खर्च करता है जैसी सभी बातों पर ध्यान दें।
  • डिप्रेशन के प्रकार पर उसका इलाज निर्भर करता है। अगर बच्चा 'माइल्ड चाइल्डहुड डिप्रेशन' का शिकार है तो बातचीत और थेरेपी से इलाज संभव होता है।
  • 'माइल्ड चाइल्डहुड डिप्रेशन' में दवाइयों और काउंसलिंग दोनों की जरूरत पड़ती है।
खबरें और भी हैं...