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जरूरत की खबर:बच्चों को लग रही कोवैक्सिन की एक्सपायरी डेट 12 महीने तक बढ़ी, जानिए इससे नुकसान तो नहीं होगा?

5 महीने पहलेलेखक: अलिशा सिन्हा
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देशभर में सोमवार से शुरू हुआ बच्चों का कोरोना वैक्सीनेशन अभियान एक दिन बाद, यानी मंगलवार को विवादों में घिर गया। सोशल मीडिया पर आरोप लगे कि कई शहरों में बच्चों को एक्सपायर्ड कोरोना वैक्सीन लगाई जा रही हैं।

इसकी शुरुआत गल्फ न्यूज की पत्रकार नवनीता के एक ट्वीट से हुई। उन्होंने इसमें आरोप लगाया कि उनके बेटे को एक्सपायर हो चुकी कोरोना वैक्सीन लगाई गई। उन्होंने ट्वीट के साथ एक चिट्ठी भी शेयर की, जिसमें कोवैक्सिन के मौजूदा स्टॉक की एक्सपायरी डेट को 3 महीने से लेकर 9 महीने के लिए बढ़ाने की जानकारी थी।

सोशल मीडिया पर हंगामे के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक स्पष्टीकरण जारी करके बताया कि बच्चों को लगाई जा रही कोवैक्सिन की शेल्फ लाइफ कंपनी की जांच-पड़ताल के बाद नवंबर में ही 3 से 12 महीने तक बढ़ाई गई थी। इससे वैक्सीन की क्वालिटी पर कोई असर नहीं पड़ा है।

तो आइए इस विवाद से जुड़े सभी जरूरी सवालों के जवाब जानते हैं और यह पता करते हैं कि हमारे बच्चों को लगाई जा रही कोरोना वैक्सीन क्या वाकई असर करेगी? एक्सपायरी डेट बढ़ाने से बच्चों को कोई खतरा तो नहीं है?

बच्चों को कौन सी कोरोना वैक्सीन दी जा रही है?
अपने देश में बच्चों को अभी भारत बायोटेक की कोवैक्सिन ही दी जा रही है, जिसका दूसरा डोज 28 दिन बाद दिया जाएगा। कोवैक्सिन के अलावा जायडस कैडिला की Zycov-D को भी केंद्र सरकार की तरफ से मंजूरी दी गई है, लेकिन इसे 15-18 साल के बच्चों के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है।

कोवैक्सिन की एक्सपायरी डेट कितनी बढ़ाई गई?
लोगों ने वैक्सीन की एक्सपायरी डेट को लेकर चिंता जाहिर की, जिसके बाद केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि नवंबर में पूरी जांच-पड़ताल के बाद कोवैक्सिन के सभी टीकों की शेल्फ लाइफ 9 महीने से बढ़ाकर 12 महीने कर दी गई थी। ऐसे में वैक्सीन की गुणवत्ता पर कोई असर नहीं पड़ा है।

शेल्फ लाइफ और एक्सपायरी डेट में क्या अंतर है?
आप सोच रहें होंगे कि वैक्सीन की एक्सपायरी डेट पर विवाद उठा और सरकार ने शेल्फ लाइफ पर सफाई क्यों दी? हम आपको बताते है ऐसा क्यों हुआ।

आमतौर पर लोग शेल्फ लाइफ और एक्सपायरी डेट को एक ही बात समझते हैं, लेकिन दोनों में एक खास अंतर होता है। शेल्फ लाइफ केवल यह तय करती है कि कितने समय बाद दवा की गुणवत्ता यानी उसका असर होना खत्म हो जाएगा। वहीं एक्सपायरी डेट उस समय को कहते हैं जिसके बाद दवा बेअसर होने के साथ ही उससे नुकसान होने का खतरा भी होता है।

शेल्फ लाइफ कैसे तय होती है?
वैक्सीन या दवा बनाने वाली कंपनी साइंटिफिक स्टडी के आधार पर दावा करती है कि उसकी दवा की गुणवत्ता कितने समय तक बनी रहेगी। उसके इस दावे के डेटा के आधार पर रेगुलेटरी अथॉरिटी शेल्फ लाइफ को अप्रूवल देती है।

शेल्फ लाइफ बढ़ाने के बाद क्या ये वैक्सीन काम करेगी?
जी हां, ये वैक्सीन काम करेगी और माता-पिता को घबराने की जरूरत नहीं है। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार 15-18 साल के बच्चों को सिर्फ कोवैक्सिन के टीके दिए जा रहे है, जिसकी सभी खुराकें एकदम सुरक्षित हैं और ये उतनी ही असरदार हैं, जितनी पहले थीं।

शेल्फ लाइफ बढ़ाने के बाद वैक्सीन का कोई साइड इफेक्ट तो नहीं होगा?
अब तक जितने बच्चों ने वैक्सीन लगवाई है, उनमें कोई गंभीर साइड इफेक्ट वाले मामले देखने को नहीं मिले हैं। हालांकि टीकाकरण के बाद बुखार, सिरदर्द, बदन दर्द, हाथ दर्द जैसी थोड़ी-बहुत समस्या आ सकती है।

किसी दवा या वैक्सीन की शेल्फ लाइफ कैसे कैलकुलेट होती है?
वायरोलॉजिस्ट डॉ. शाहिद जमील का कहना है कि शेल्फ लाइफ को कैलकुलेट करने के लिए किसी भी दवा या वैक्सीन को अलग-अलग तापमान पर अलग-अलग समय के लिए रखा जाता है। फिर उसकी इफेक्ट की जांच की जाती है और यह देखा जाता है कि उसकी क्वालिटी में कोई गिरावट आई है या नहीं? जिस परिस्थिति और शर्तों में दवा या वैक्सीन स्थिर और प्रभावी होती है, उसे उसकी शेल्फ लाइफ मान ली जाती है।

क्या इससे पहले भी किसी वैक्सीन की शेल्फ लाइफ बढ़ाई गई है?

जी हां, कोवैक्सिन के पहले फरवरी 2021 में कोवीशील्ड की भी शेल्फ लाइफ बढ़ाई जा चुकी है। कोवीशील्ड की शेल्फ लाइफ 9 महीने से बढ़ाकर 12 महीने की गई थी।

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