पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

जरूरी दवाइयों की लिस्ट में 384 नाम:सस्ती मिलेंगी एंटीबायोटिक्स, वैक्सीन और कैंसर की दवाइयां, सरकारी हॉस्पिटल में तो फ्री मिलेंगी

21 दिन पहले
  • कॉपी लिंक

कोरोना महामारी के बाद बहुत से लोग बिना डॉक्टर की सलाह लिए दवाएं खरीदकर खाने लगे हैं। इनमें से कई दवाइयां ऐसी हैं, जिससे कैंसर जैसी बीमारियां हो सकती हैं। इसे देखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने मंगलवार को नेशनल लिस्ट ऑफ एसेंशियल मेडिसिन (NLEM) की अपडेटेड लिस्ट जारी की है।

खबर में आगे बढ़ने से पहले हम इस पोल में आपकी राय जानना चाहते हैं

7 साल बाद आई है अपडेटेड लिस्ट

  • इससे पहले साल 2015 में नेशनल लिस्ट ऑफ एसेंशियल मेडिसिन जारी की गई थी।
  • लिस्ट में 384 दवाओं को शामिल किया गया है। कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली 4 दवाओं समेत 34 नई मेडिसिन को भी जोड़ा गया है।
  • इसका मतलब है कि इन दवाओं को सरकार ने बेचने और खरीदने की मंजूरी दी है। साथ ही 26 दवाओं को लिस्ट से बाहर भी किया गया है।

आज के हमारे एक्सपर्ट हैं- डॉ. बालकृष्ण श्रीवास्तव और डॉ. एस. सी. राय

चलिए अब करते हैं आपके काम की बात...

एसेंशियल मेडिसिन की लिस्ट में शामिल दवाइयों की कुछ प्रमुख कैटेगरी

1 एनेस्थेटिक्स, प्रीऑपरेटिव दवाएं और मेडिकल गैस

2 दर्द और पेलिएटिव केयर की दवाइयां

3 एंटी एलर्जिक और एनाफिलेक्सिस में यूज होने वाली दवाई

4 एंटीडोट्स और जहर का असर कम करने वाली दवाइयां

5 एंटीकॉन्वलेंट्स/ एंटीपीलेप्टिक्स

6 इंफेक्शन कम करने वाली दवाइयां

7 एंटीमाइग्रेन दवाएं

सोर्स- WHO

सवाल– क्या होती हैं एसेंशियल मेडिसिन यानी जरूरी दवाइयां?
जवाब-
ये वो दवाइयां हैं, जो पब्लिक हेल्थ केयर की जरूरतों को पूरा करती हैं। इनका सिलेक्शन पब्लिक हेल्थ रेलिवेंस, कितनी सुरक्षित हैं और कॉस्ट इफेक्टिवनेस की तुलना के आधार पर किया जाता है। जरूरी दवाइयों की कीमत केंद्र सरकार की अनुमति के बगैर नहीं बढ़ाया जा सकता है।

सवाल- इस लिस्ट में दवाइयों को शामिल करने से क्या फायदा होता है?
जवाब-
आपके शहर में सरकारी अस्पताल तो जरूर होंगे, जहां पर कुछ दवाएं ऐसी होंगी, जो मुफ्त में मिल जाती हैं। इन दवाइयों की लिस्ट प्राइमरी हेल्थ केयर और डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल की तरफ से अलग-अलग सरकार के पास जाती हैं। NLEM में शामिल जरूरी दवाइयां गवर्नमेंट अस्पताल में मौजूद होनी ही चाहिए। जिससे ये पेशेंट यानी आपको मुफ्त में मिल सके और आपके पैसे खर्च न हों।

सवाल- अगर ये दवाएं अस्पताल में न मिलें, तो शिकायत भी कर सकते हैं?
जवाब- अगर डॉक्टर ने पर्ची पर कोई दवा लिखी, आप उसे लेने गए और सरकारी अस्पताल में वो दवा खत्म हो गई है, लेकिन NLEM की लिस्ट में वो दवा शामिल है। ऐसी सिचुएशन में आप CMHO को कम्प्लेन कर सकते हैं। इसके बाद अधिकारियों को आपके लिए वो दवा उपलब्ध कराना होगा।

इन 26 दवाओं को अपडेटेड लिस्ट से हटाया गया है
अल्टेप्लेस, एटेनोलोल, ब्लीचिंग पाउडर, कैप्रियोमाइसिन, सेट्रिमाइड, क्लोरफेनिरामाइन, डिलॉक्सनाइड फ्यूरोएट, डिमरकैप्रोल, एरिथ्रोमाइसिन, एथिनिलोएस्ट्राडियोल, एथिनिलोएस्ट्राडियोल (ए) नोरेथिस्टेरोन (बी), गैन्सिक्लोविर, कनामाइसिन, लैमिवुडीन (ए) + नेविरापाइन (बी) + स्टावुडीन (सी), लेफ्लुनोमाइड, मिथाइलडोपा, निकोटिनामाइड, पेगीलेटेड इंटरफेरॉन अल्फा 2 ए, पेगीलेटेड इंटरफेरॉन अल्फा 2 बी, पेंटामिडीन, प्रिलोकेन (ए) + लिग्नोकेन (बी), प्रोकारबाजिन, रेनिटिडीन, रिफाबुटिन, स्टावुडीन (ए) + लैमिवुडिन (बी), सुक्रालफेट और वाइट पेट्रोलैटम शामिल हैं।

NLEM की लिस्ट से किसी भी दवा को क्यों बाहर कर दिया जाता है, ये जानने के लिए नीचे दिए ग्राफिक्स को पढ़ें-

सवाल- लिस्ट से हटाई गई दवाओं में रेनिटिडिन भी है, जिसे एसीलॉक, जिनटैक, और रेंटेक नाम के ब्रांड के साथ बेचा जाता है, क्या ये अब सरकारी अस्पताल में नहीं मिलेंगी?
जवाब-
CMHO डॉक्टर एससी राय के के मुताबिक एसेंशियल मेडिसिन की लिस्ट में शामिल दवाएं सरकारी अस्पतालों में रहनी ही चाहिए। हाल ही में रेनिटिडिन सॉल्ट की दवा को इस लिस्ट से निकाला गया है, लेकिन हमारे पास ऐसी कोई जानकारी नहीं है कि ये सरकारी अस्पतालों में नहीं होंगी।

इसलिए रेनिटिडिन सॉल्ट की दवा एसीलॉक और जिनटैक जैसी दवाइयां सरकारी अस्पतालों में अब भी मिलेंगी।

सवाल- क्या कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज की दवाइयों का फायदा पेशेंट को एसेंशियल मेडिसिन के माध्यम से मिल सकता है?
जवाब-
देखिए, छोटे हेल्थ केयर सेंटर में टीबी, लेप्रोसी और ब्लाइंडनेस कंट्रोल की दवाइयां मिल जाती हैं। कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के लिए सरकार ने कैंसर इंस्टीट्यूट खोले हैं। अगर पेशेंट का इलाज वहां हो रहा है, तो एसेंशियल मेडिसिन वहां फ्री में मिल जाएंगी।

सवाल- एसेंशियल मेडिसिन की प्राइस कैसे तय होती है?
जवाब-
NLEM लिस्ट में शामिल दवाइयों की कीमतों को होलसेल प्राइस इंडेक्स इंफ्लेशन के आधार पर तय किया जाता है। बाकी सभी दवाइयों की प्राइस कंपनियां सालाना 10% तक बढ़ा सकती हैं।

सवाल- NLEM की लिस्ट में दवाओं को शामिल करने का क्राइटेरिया क्या है?
जवाब-
लिस्ट में किसी दवा को शामिल करने से पहले रेगुलेटरी अथॉरिटी कई बातों पर डिस्कशन करती है। मसलन-

  • ऐसी दवाएं, जो ज्यादा से ज्यादा लोगों के काम में आती हैं।
  • अभी जो देश-दुनिया में बीमारियां चल रही हैं, उसके आधार पर दवाइयों को इस लिस्ट में डाला जाता है। जैसे– अभी मंकीवायरस चल रहा है। देश में H1N1 के मामले आ रहे हैं। ऐसे में लिस्ट तैयार करते वक्त उन बीमारियों की गंभीरता को देखते हुए जरूरी दवाइयों में शामिल किया जाता है।
  • समय और जरूरत के आधार पर भी दवाइयां जुड़ती और हटती हैं। कभी टीबी से निपटना जरूरी हो जाता है, तो कभी कोरोना से। जैसे पिछली लिस्ट में कोरोना की दवाइयां थीं। इस बार हटा दी गई हैं।
  • लिस्ट में शामिल होने वाली दवा इफेक्टिव होनी चाहिए और सुरक्षित भी।
  • NLEM के दिशा-निर्देश के अनुसार, दवा को लिस्ट में शामिल करते वक्त इलाज की कुल कीमत पर सोच-विचार किया जाता है।
  • फिक्स डोज वाली दवाओं को शामिल करने पर सोच-विचार किया जाता है।
  • ज्यादा बिकने वाली दवा को NLEM में शामिल करने का बेंचमार्क नहीं माना जाता है। इसके लिए दूसरे फैक्टर्स पर भी विचार किया जाता है।

चलते-चलते

लिस्ट में फिजियोथेरेपी से रिलेटेड दवाएं शामिल
इस लिस्ट में फिजियोथेरेपी से रिलेटेड दवाएं निकोटीन रिप्लेसमेंट थेरेपी और बुप्रेनोरफिन को भी जोड़ा गया है। इसके अलावा एंटी ट्यूबरक्लोसिस मेडिसिन, बेडक्विलाइ, रोटावायरस वैक्सीन जैसी दवाइयों को भी शामिल किया गया है। अब इस लिस्ट में ऐसी दवाओं की संख्या 384 हो गई है।

जिन 384 दवाइयों को लिस्ट में शामिल किया गया है, वो कौन सी बीमारी की हैं और उनका क्या नाम है, ये जानने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें।

जरूरत की खबर के कुछ और ऐसे ही आर्टिकल हम नीचे पेश कर रहे हैं...

1. आपको है बीपी, शुगर और अस्थमा जैसी बीमारियां? 11% महंगी हुईं इनकी दवाइयां, जानिए कहां मिलेंगी सस्ती

पिछले कुछ महीने से बुखार, खांसी-जुकाम, शुगर, बीपी, अस्थमा,इन्फेक्शन, हाई ब्लड प्रेशर और एनीमिया के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाइयां महंगी हो गई। पैरासिटामॉल, फेनोबार्बिटोन, फिनाइटोइन सोडियम, एजिथ्रोमाइसिन, सिप्रोफ्लोक्सासिन हाइड्रोक्लोराइड और मेट्रोनिडाजोल जैसी दवाओं की कीमतें भी बढ़ गईं। इस तरह से 800 दवाइयों के दाम 11% तक बढ़ गए। (पूरी खबर पढ़ें)

2. डायबिटीज कंट्रोल के लिए ICMR का 50:20 का मंत्र:2030 तक 10 करोड़ लोग आ सकते हैं चपेट में, आइडियल फूड प्लेट से मिलेगी राहत

डायबिटीज, मधुमेह और शुगर। यह वो बीमारी है जो एक बार किसी को हुई, तो जिंदगी भर उसके साथ रहती है। यह मेटाबॉलिक डिसऑर्डर है। इसमें पेशेंट का पैंक्रियाज इंसुलिन प्रोडक्शन बंद कर देता है या बहुत कम मात्रा में प्रोड्यूस करता है। जिससे ब्लड में ग्लूकोज का लेवल बढ़ जाता है। जिससे हमारा मेटाबॉलिज्म प्रभावित होता है। (पूरी खबर पढ़ें)