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पर्सनल फाइनेंस:बाजार से कम रेट पर सोना खरीदने का मौका, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड की 10वीं सीरीज 15 जनवरी तक

नई दिल्ली9 दिन पहले
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  • इस सीरीज के लिए 1 ग्राम सोने की कीमत 5,104 रुपए तय की गई है
  • ऑनलाइन आवेदन करने और डिजिटल पेमेंट के जरिए भुगतान करने पर प्रति ग्राम 50 रु. का डिस्काउंट मिलेगा

सरकारी सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड 2020-21 स्कीम की 10वीं सीरीज 11 जनवरी से खरीदारी के लिए खुल गई है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम की इस सीरीज के लिए 1 ग्राम सोने की कीमत 5,104 रुपए तय की है। जो लोग इनके लिए ऑनलाइन आवेदन करेंगे और डिजिटल पेमेंट के जरिए भुगतान करेंगे, उन्हें प्रति ग्राम 50 रुपए का डिस्काउंट मिलेगा। ये स्कीम 15 जनवरी तक खुली रहेगी।

बाजार में 52,870 रुपए प्रति 10 ग्राम पर पहुंचा सोना

सोमवार को सुबह दिल्ली में 24 कैरेट सोने का भाव 52,870 रुपए प्रति 10 ग्राम था। यानी 5,287 रुपए का 1 ग्राम। ऐसे में सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम के तहत आपको प्रति ग्राम 183 रुपए कम कीमत में सोने में निवेश करने का मौका मिल रहा है।

1 ग्राम सोना से कर सकते हैं खरीदी की शुरुआत
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम के जरिए सोना यूनिट्स में खरीदते हैं, जहां एक यूनिट एक ग्राम की होती है। कोई शख्स एक वित्त वर्ष में मिनिमम 1 ग्राम और मैक्सिमम 4 किलोग्राम तक वैल्यू का बॉन्ड खरीद सकता है। ट्रस्ट के लिए खरीद की अधिकतम सीमा 20 किलोग्राम है।

इश्यू प्राइस पर मिलता है 2.50% ब्याज
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड में इश्यू प्राइस पर हर साल 2.50% का निश्चित ब्याज मिलता है। यह पैसा हर 6 महीने में आपके खाते में पहुंच जाता है। फिजिकल गोल्ड और गोल्ड ईटीएफ पर इस तरह का फायदा नहीं मिलता।

8 साल का रहता है मेच्योरिटी पीरियड
बॉन्ड का मेच्योरिटी पीरियड 8 साल का है। लेकिन निवेशकों को 5 साल के बाद बाहर निकलने का मौका मिलता है। यानी जरूरत पड़ने पर आप 5 साल बाद इसे कैश कर सकते हैं। एनएसई के मुताबिक लोन लेने के दौरान कोलैटरल (गिरवी) के रूप में भी सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड का उपयोग किया जा सकता है। इसके अलावा ये बांड एनएसई पर ट्रेड भी करते हैं। अगर गोल्ड बॉन्ड के मैच्योरिटी पर कोई कैपिटल गेन्स बनता है तो इसपर छूट मिलेगी है।

गोल्ड बॉन्ड या ETF में मिलता है 99.9% शुद्ध सोना
गोल्ड ईटीएफ की कीमत पारदर्शी और एक समान होती है। इसके दाम लंदन बुलियन मार्केट एसोसिएशन के मुताबिक चलते हैं, जिसे कीमती धातुओं की ग्लोबल अथॉरिटी माना जाता है। गोल्ड ईटीएफ से खरीदे गए सोने की 99.9% शुद्धता की गारंटी होती है, जो सबसे उच्च स्तर की शुद्धता है।

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड का क्या है फायदा?
इस बॉन्ड को लोन लेने के लिए जमानत के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है। इसमें समय के साथ सोने के भाव में होने वाली बढ़ोतरी का फायदा मिलेगा। उसके ऊपर 2.5% सालाना ब्याज भी मिलेगा। बॉन्ड से मिलने वाले ब्याज पर टैक्स देना होगा, लेकिन उसकी बिक्री से होनेवाले कैपिटल गेंस पर टैक्स नहीं लगेगा।

9 महीने में इसकी कीमत में आया 10% का उछाल
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड 2020-21 स्कीम की शुरुआत 20 अप्रैल 2020 से हुई थी। इसकी पहली सारीज 20 से 24 अप्रैल तक चली थी। इस दौरान 1 ग्राम सोने की कीमत 4,639 रुपए तय की गई थी। अब 10वीं सीरीज के लिए इसकी कीमत 5,014 रुपए प्रति ग्राम तय की गई है। यानी 20 अप्रैल 2020 से लेकर अब तक इसकी कीमत में 10% से ज्यादा का उछाल आ चुका है। इस हिसाब से जिन लोगों ने अप्रैल में इसमें निवेश किया था उन्हें 1 साल से कम समय में ही फिक्स्ड डिपॉजिट से ज्यादा रिटर्न मिल चुका है।

कहां से खरीदा जा सकता है गोल्ड बॉन्ड?
SGB स्कीम वाले बॉन्ड कमर्शियल बैंकों, पोस्ट ऑफिस, स्टॉक एक्सचेंजों- बीएसई और एनएसई और स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन से खरीदे जा सकते हैं। इसे भारतीय नागरिक, अविभाजित हिंदू परिवार (HUF), ट्रस्ट, यूनिवर्सिटी और चैरिटेबल इंस्टीट्यूशन खरीद सकते हैं। इस स्कीम में कम से कम एक ग्राम सोने के दाम के बराबर का एक बॉन्ड खरीदा जा सकता है।

क्या हैं सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड?
सरकार ने देश में फिजिकल फॉर्म में सोने की खरीदारी की मांग घटाने के मकसद से नवंबर 2015 में यह स्कीम शुरू की थी। सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड एक सरकारी बांड होता है। इसे डीमैट रूप में परिवर्तित कराया जा सकता है। इसका मूल्य रुपए या डॉलर में नहीं होता है, बल्कि सोने के वजन में होता है। यदि बॉन्ड पांच ग्राम सोने का है, तो पांच ग्राम सोने की जितनी कीमत होगी, उतनी ही बॉन्ड की कीमत होगी। इसे खरीदने के लिए सेबी के अधिकृत ब्रोकर को इश्यू प्राइस का भुगतान करना होता है। बॉन्ड को भुनाते वक्त पैसा निवेशक के खाते में जमा हो जाता है। यह बॉन्ड भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) सरकार की ओर से जारी करता है।

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