• Home
  • Personal finance
  • Banking ; SBI ; State Bank Of India ; Income Tax ; TDS ; Tax ; Submit the 15G or 15H form by 31 July, otherwise the bank will pay 10% tax on the interest received on the FD

पर्सनल फाइनेंस /31 जुलाई तक जमा कर दें 15G या 15H फॉर्म, नहीं तो बैंक एफडी पर मिलने वाले ब्याज पर देना होगा 10% टैक्स

जो इस फॉर्म को भरता है उसे टैक्स की सीमा से बाहर रखा जाएगा

  • फॉर्म 15G या फॉर्म 15H खुद से की गई घोषणा वाला फॉर्म हैं
  • बैंक ने इसे ऑनलाइन जमा करने की सुविधा भी दी है

मनी भास्कर

Jul 20,2020 05:27:42 PM IST

नई दिल्‍ली. अगर आपने स्‍टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) में फिक्‍स्‍ड डिपॉजिट (FD) में निवेश किया है तो उस पर मिलने वाले ब्‍याज पर TDS काटा जाता है। SBI आपके ब्याज पर 10 फीसदी टैक्‍स वसूलता है। ऐसे में अगर आपकी आपकी सालाना इनकम टैक्स के दायरे में नहीं आती है तो इसके लिए फॉर्म-15G और फॉर्म-15H भरना होगा। इस फॉर्म भरने की आखिरी तारीख 31 जुलाई 2020 तक के लिए बढ़ा दी है। ऐसे में अगर आपने अभी तक ये फॉर्म जमा नहीं किया है तो जमा कर दें। बैंक ने इसे ऑनलाइन जमा करने की सुविधा भी दी है।


क्यों जरूरी है फॉर्म 15G या फॉर्म 15H फार्म?
फॉर्म 15G या फॉर्म 15H (वरिष्‍ठ नागरिकों के लिए) खुद से की गई घोषणा वाला फॉर्म हैं। इसमें आप यह बताते हैं कि आपकी आय टैक्स की सीमा से बाहर है। जो इस फॉर्म को भरता है उसे टैक्स की सीमा से बाहर रखा जाएगा। इसे नहीं भरने पर मान लिया जाता है कि आप टैक्स के दायरे में हैं और फिर ब्याज से होने वाली आय पर जरूरी टीडीएस काट लिया जाएगा।

10 हजार से ज्यादा ब्याज पर कटता है टीडीएस

फॉर्म 15G या फॉर्म 15H एक साल के लिए होता है। हालांकि फॉर्म नहीं भरने पर जो टीडीएस काटा जाएगा उसे वापस भी पाया जा सकता है। एसबीआई एफडी और आरडी पर तभी टीडीएस काटता है, जब निवेश पर सालाना ब्‍याज 10 हजार रुपए से ज्‍यादा हो जाता है। वहीं, वरिष्‍ठ नागरिकों के लिए ये सीमा 50 हजार रुपए तक की है।


ऐसे भर सकते हैं ऑनलाइन फॉर्म

  • सबसे पहले एसबीआई खाताधारकों को ऑनलाइन अपने खातों में लॉग इन करना होगा।
  • इसके बाद ई-सेवाओं के तहत फॉर्म जमा किया जा सकता है।
  • लॉग इन करने के बाद ‘E-services’ के ’15G / H’ ऑप्शन को चुनना होगा।
  • इसके बाद फॉर्म 15G या फॉर्म 15H को चुनना होगा।
  • Customer Information File (CIF) Number पर क्लिक कर ‘Submit’ पर क्लिक कर दें।
  • इतना करते ही आपके सामने एक नया इंटरफेस खुलकर आएगा जहां अन्य जानकारियां मांगी जाएंगी।
  • इन जानकारियों को भरने के बाद इसे सबमिट कर दें।
  • इसके बाद एक नया टैब खुल जाएगा जहां आपको एक बार फिर से जानकारियां भरकर 'कन्फर्म' पर क्लिक करें।
  • आपके पंजीकृत मोबाइल नंबर पर ओटीपी भेजा जाएगा। ओटीपी दर्ज करें और 'कन्फर्म' पर क्लिक करें।
  • एक बार फॉर्म सफलतापूर्वक जमा हो जाने के बाद, UIN नंबर जेनरेट होगा। हाइपरलिंक कंप्यूटर स्क्रीन पर फॉर्म की एक प्रति डाउनलोड करने के लिए दिखाई देगी।


क्या होता है टीडीएस?
अगर किसी की कोई आय होती है तो उस आय से टैक्स काटकर अगर व्यक्ति को बाकी रकम दी जाए तो टैक्स के रूप में काटी गई रकम को टीडीएस कहते हैं। सरकार टीडीएस के जरिए टैक्स जुटाती है। यह अलग-अलग तरह के आय स्रोतों पर काटा जाता है जैसे सैलरी, किसी निवेश पर मिले ब्याज या कमीशन आदि पर। कोई भी संस्थान (जो टीडीएस के दायरे में आता है) जो भुगतान कर रहा है, वह एक निश्चित रकम टीडीएस के रूप में काटता है।

X

Money Bhaskar में आपका स्वागत है |

दिनभर की बड़ी खबरें जानने के लिए Allow करे..

Disclaimer:- Money Bhaskar has taken full care in researching and producing content for the portal. However, views expressed here are that of individual analysts. Money Bhaskar does not take responsibility for any gain or loss made on recommendations of analysts. Please consult your financial advisers before investing.