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  • 76 Percent Of Indians Are Wearing Masks, Yet Growing Corona Cases; Keep 10 Things In Mind While Preparing For Security

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कोरोना से बचने के लिए 10 सावधानियां:सिर्फ मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग ही काफी नहीं, आदतों में बदलाव लाकर सुरक्षित रह सकेंगे

एक वर्ष पहलेलेखक: निसर्ग दीक्षित
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  • रिसर्च के मुताबिक 76 फीसदी भारतीय मास्क पहन रहे, फिर भी बढ़ रहे कोरोना के मामले
  • सब्जी और दूधवाले को ऑनलाइन पेमेंट करें, ग्राॅसरी और अन्य खरीददारी भी ऑनलाइन करें

भारत में कोरोनावायरस मरीजों का आंकड़ा 10 लाख पार कर गया है। अब तक खबरें आ रहीं थीं कि दिल्ली-मुंबई जैसे देश के बड़े शहरों की हालात बिगड़ी है, लेकिन अब छोटे शहरों और कस्बों में भी संक्रमितों की संख्या में इजाफा जारी है।

स्वास्थ्य मंत्रालय के अलावा डब्ल्यूएचओ, सीडीसी जैसी स्वास्थ्य संस्थाएं मास्क, सोशल डिस्टेंसिंग और बार-बार हाथ धोने की सलाह दे रहीं हैं। भारत के लिहाज से देखा जाए तो यहां जनता ज्यादा सजग है। अप्रैल में प्रकाशित Ipsos की 15 नेशन्स की सर्वे रिपोर्ट बताती है कि शहरी क्षेत्रों में रहने वाले 4 में 3 भारतीय यानी (76%) मास्क पहन रहे हैं। लेकिन, क्या मास्क पहन लेने भर से आप सुरक्षित हो जाते हैं। ऐसा बिल्कुल नहीं है। हां, संक्रमित होने का खतरा कुछ कम होता है। 

यही हाल, सोशल डिस्टेंसिंग का भी है। इस मामले में हम लगातार जोखिम उठा रहे हैं। ज्यादातर लोग सोशल डिस्टेंसिंग भूल चुके हैं। इसके पीछे आर्थिक जरूरतें, मानसिकता, रोजमर्रा की आदतें जैसे इसके कई कारण हैं।

राजधानी दिल्ली स्थित लेडी श्रीराम कॉलेज फॉर वुमन के साइकोलॉजी विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर डॉक्टर कनिका के आहूजा के मुताबिक, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन मध्यम या उच्च वर्ग कर पा रहा है, क्योंकि इसे अपनाना कई लोगों की हैसियत से परे है। कई बार घर में 6 फीट की दूरी बनाना मुमकिन नहीं है, क्योंकि कई घरों में जगह कम और लोग ज्यादा होते हैं। लॉकडाउन में घर बैठने का मतलब है, आपके पास घर या संसाधन मौजूद होना।

हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, भारत जैसी घनी आबादी वाले देश में मास्क, सोशल डिस्टेंसिंग जैसे उपाय मददगार हैं, लेकिन काफी नहीं हैं। ऐसे में हमें अपने जीवन की कुछ आदतों में बदलाव लाने होंगे, जिससे हम कोरोनावायरस से खुद सुरक्षित रह सकें और दूसरों को भी रख सकें। ये आदतें हमें भविष्य की प्लानिंग करने में भी मदद करेंगी।

मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग के अलावा कोरोना से बचने के लिए 10 बातों को ध्यान रखना बेहद जरूरी-

1- बहुत जरूरी हो तो ही आयोजन करें, कम लोगों को बुलाएं

  • लॉकडाउन के दौरान भी देश में शादी-ब्याह, जन्मदिन और दूसरे समारोहों के आयोजन की खबरें और तस्वीरें सामने आती रही हैं। हालांकि, सोशल डिस्टेंसिंग के लिहाज से यह ठीक नहीं है। भोपाल की क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉक्टर पूनम सिंह इसका कारण समाज के दबाव और रूढ़ीवादी सोच को बताती हैं।
  • वक्त को देखते हुए समारोह के आकार को छोटा कर दें। केवल जरूरी और बहुत कम मेहमानों को बुलाएं, ताकि आयोजन वाली जगह पर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन हो सके।
  • इसका एक उपाय यह भी हो सकता है कि आयोजन वाली जगह पर्याप्त बड़ी हो। मेहमानों को अलग-अलग वक्त पर बुलाएं। इससे भीड़ भी इकट्ठी नहीं होगी और लोग एक-दूसरे से बिना परेशानी के ज्यादा दूरी बनाकर रख पाएंगे।

2- बाहर खाना मजबूरी में ही खाएं

  • गुजरात के वडोदरा में सीनियर कंसल्टेंट सर्जन और सीएमओ डॉक्टर हिमांशु पांडेय के मुताबिक, इस दौरान बाहर खाना पूरी तरह से बंद कर देना चाहिए। हालांकि, कई लोग हैं जो घर से दूर रहकर काम करते हैं और उन्हें बाहर खाना मजबूरी है, ऐसे में लंच सर्विस का टिफिन न लें। अगर आपको बाहर खाना जरूरी है तो अपने टिफिन का उपयोग करें। खाना लेने जाने से पहले ही फोन पर खाने की तैयारी के लिए कह दें।
  • हालांकि, कई लोग बाहर खाने के शौकीन होते हैं। ऐसे में वे खाने से पहले जगह की साफ-सफाई पर ध्यान दें और सर्व करने वाले से मास्क लगाने के लिए कहें। एक्सपर्ट्स के अनुसार, अगर आप बाहर खाने जा रहे हैं तो कुर्सियों के बीच दूरी बनाकर रखें और केवल खाने के लिए ही मास्क हटाएं।

3- पढ़ाई और फिटनेस के लिए वर्चुअल तैयारी

  • महामारी शुरू होने के बाद से ही छात्रों के स्कूल की छुट्टी कर दी गई थी। हालांकि, बाद में जूम जैसी ग्रुप वीडियो कॉलिंग सर्विसेज की मदद से ऑनलाइन क्लासेज की शुरुआत की गई थी। सोशल मीडिया पर ऐसी कई तस्वीरें और खबरें आईं थीं कि बच्चे ऑनलाइन क्लासेज को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। अब जब हालात लगातार बद से बदतर हो रहे हैं तो हमें डिजिटल एजुकेशन की तरफ जाना होगा। क्योंकि, स्कूल और छोटी क्लासेज में बच्चों के बीच 6 फीट की दूरी रखना नामुमकिन सा है।
  • फिटनेस ट्रेनर अमरीक सिंह बताते हैं कि जो लोग पहले लगातार एक शेड्यूल के तहत वर्कआउट करते थे, वे सभी जिम से दूर हैं। ऐसे में उनके शरीर और स्वास्थ्य में होने वाले दुष्परिणाम तब सामने आएंगे, जब वे जिम जाना शुरू करेंगे। क्योंकि लंबे समय तक जिम से दूरी होने के कारण एनर्जी और स्टेमिना कम हो गई है। ऐसे में स्टेमिना दोबारा रिस्टोर करने में वक्त लगेगा। ऐसे में आप ऑनलाइन क्लासेज का सहारा ले सकते हैं, लेकिन इससे पहले ट्रेनर की योग्यता, एक्सरसाइज लिमिट जैसी सावधानियां बरतें।
  • योग एक्सपर्ट ऑनलाइन योग को फायदेमंद नहीं मानते हैं, लेकिन अगर आप अलग-अलग आसन करने का तरीका जानते हैं तो आप वर्चुअल क्लासेज ले सकते हैं। योग एक्सपर्ट और डाइटीशियन डॉक्टर शैलजा त्रिवेदी कहती हैं कि योग करने से जितने फायदे होते हैं, गलत करने से उतने ही नुकसान हो सकते हैं। गुजरात के अहमदाबाद में ज्ञानीश फिटनेस के फाउंडर और योग एक्सपर्ट ज्ञान आचार्य बताते हैं कि आप वर्चुअली कहीं दूर बैठे किसी योग्य शिक्षक के संपर्क में भी आ सकते हैं। इससे आप पार्क में मौजूद भीड़ से भी बच सकेंगे।

4- आर्थिक संकट आने से पहले खर्चों पर नजर रखें

  • महामारी के दौर में कई लोग आर्थिक संकट का शिकार हो रहे हैं। ऐसे में फाइनेंशियल प्लानिंग बेहद जरूरी है। सेविंग्स को संभालकर खर्च करें और बजट तैयार करें। भोपाल की चार्टर्ड एकाउंटेंट प्रीति पटेल सिंह के मुताबिक, सबसे पहले खाने जैसी बुनियादी चीजों पर ही खर्च करें। महामारी के दौर में मेडिक्लेम पॉलिसी या इमरजेंसी फंड के बारे में भी सोचें। यह फंड आपको मेडिकल इमरजेंसी के दौरान काम आएगा।

5- जितना हो सकें लोगों से कम मुलाकात करें

  • सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखना बेहद जरूरी है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, लोगों से मुलाकात में कमी करना चाहिए। अगर आप बीमार महसूस कर रहे हैं तो घर से बाहर निकलने से बचें। इसी तरह अगर कोई आपके नजदीक आकर या बिना मास्क के बात कर रहा है तो स्पष्ट तौर पर मास्क लगाने को कहें। इससे आप बदतमीज नहीं जागरूक कहलाएंगे। क्योंकि, ऐसा करने से आप दोनों को सुरक्षित कर रहे हैं।

6-  वर्क फ्रॉम होम की आदत डालें

  • अब जब संक्रमण के मामले लगातार बढ़ रहे हैं तो दफ्तर के कर्मचारी और शिक्षक घर से ही अपना काम कर रहे हैं। यह भी साफ नहीं है कि वर्क फ्रॉम होम कब तक चलेगा। कई कंपनियां लॉन्ग टर्म के लिए वर्क फ्रॉम होम मॉडल पर काम कर रही हैं। ऐसे में खुद को लंबे वक्त तक घर से काम करने के लिए मानसिक रूप से तैयार करना बहुत जरूरी है।
  • कंसल्टेंट साइकोलॉजिस्ट डॉक्टर रीना राजपूत कहती हैं कि अगर आप घर से काम कर रहे हैं तो भी आलस को न पनपने दें। कहीं भी काम करने के बजाए एक जगह निर्धारित करें और नॉर्मल रूटीन खराब न करें।

7- गैजेट्स की देखभाल करें

  • वायरस ट्रांसमिशन को रोकने के लिए कंपनियां भी रिमोट वर्किंग की सहारा ले रही हैं। इसका मतलब है घर में मौजूद स्मार्टफोन, टैबलेट, लैपटॉप का पहले से ज्यादा उपयोग होना। ऐसे में नए गैजेट्स खरीदने के साथ ही इनका मेंटनेंस, रिपेयरिंग को लेकर भी अलर्ट रहना जरूरी हो गया है।
  • एक्सपर्ट्स के मुताबिक, बिगड़ने पर नया गैजेट लेने की आदत को बदलकर उसे सुधारने के बारे में सोचें। अगर आप डिवाइस का ध्यान रखेंगे तो यह लंबे वक्त तक आपका साथ देंगी।

8- परिवार के साथ ज्यादा वक्त बिताएं

  • रिमोट वर्किंग या ऑनलाइन क्लासेज के कारण आप पहले से ज्यादा वक्त अपने परिवार के साथ गुजार रहे हैं। ऐसे में पार्टनर या सदस्य के साथ विवाद से बचें। इसके अलावा अगर आप किसी भी तरह वायरस के संपर्क में आए हैं तो घर के सभी लोगों से इस बारे में खुलकर बात करें। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सभी के साथ रहने के बाद अपने लिए वक्त निकालना बेहद जरूरी है।

9- डिजिटल समझ बढ़ाएं, शॉपिंग ऑनलाइन करें

  • सेंटर्स फॉर डिसीज प्रिवेंशन कंट्रोल के मुताबिक, वायरस फैलने का मुख्य जरिया इंसान से इंसान का संपर्क है, लेकिन किसी वायरस युक्त सतह को छूकर भी आप संक्रमित हो सकते हैं। ऐसे में कैश पेमेंट या प्रिंटेड रसीद पर भरोसा करने के बजाए डिजिटिल पेमेंट की मदद लें।
  • एयरपोर्ट पर चैकइन करने के लिए मोबाइल एप्स का सहारा लें। बैंक जाने के बजाए इंटरनेट बैंकिंग को तरजीह दें। सब्जी और दूधवाले को ऑनलाइन पेमेंट करें। ग्राॅसरी और अन्य शॉपिंग ऑनलाइन करें। इससे आप सोशल डिस्टेंसिंग के साथ खुद को अधिक सुरक्षित रख पाएंगे।

10- कोशिश करें कि मदद न लेनी पड़े

  • घर के छोटे-मोटे काम जैसे लॉन्ड्री, सफाई खुद करने की आदत डालें। इससे आपके घर में कर्मचारी का दखल कम होगा। ट्रैवल हिस्ट्री रखने वाले सदस्य की मदद भी कम लें, क्योंकि कोरोनावायरस के कई मरीजों में लक्षण नजर नहीं आए हैं। कोशिश करें कि घर में वेंटिलेशन पर्याप्त हो।
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