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वाहन स्क्रैपिंग पॉलिसी:अगले पांच साल में भारत बनेगा दुनिया का सबसे बड़े ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरिंग हब, हम पूरी दुनिया से स्क्रैप लेकर रिसाइकल करेंगे- नितिन गडकरी

नई दिल्ली4 महीने पहले
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आम बजट में घोषित वॉलेंटरी वाहन स्क्रैपिंग पॉलिसी के बारे में सरकार रोज नए नए फायदे गिना रही है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि पुराने और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को हटाने के बाद नए वाहन के खरीदारों को पॉलिसी के तहत कई तरह के लाभ मिलेंगे, अगले 8 से 10 दिनों में सरकार इसकी डिटेल्स जारी करेगी। सरकार का मानना है कि स्क्रैपिंग पॉलिसी से भारत अगले पांच सालों में दुनिया का सबसे बड़ा ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरिंग हब बन जाएगा और इससे बड़ी संख्या में रोजगार मिलेगा।

ऑटो उद्योग के कारोबार में 30% की बढ़ोतरी होगी
गडकरी ने नई पॉलिसी को वरदान बताते हुए कहा कि इससे भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग के कारोबार में 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी और इससे भारत के ऑटोमोबाइल सेक्टर को बढ़ावा मिलेगा। अपने वाहनों के स्क्रैपिंग के लिए जाने वालों को निर्माताओं से कुछ लाभ मिलेंगे। वास्तव में, स्क्रैपिंग पॉलिसी एक वरदान साबित होगी। इससे न केवल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा, ऑटोमोबाइल क्षेत्र को लाभ होगा, बल्कि वाहन प्रदूषण की भी जांच होगी। बहुत जल्द पॉलिसी की डिटेल्स बताई जाएंगी। उन्होंने यह विश्वास दिलाया कि ऑटोमोबाइल उद्योग एक ऐसे क्षेत्र में बदल जाएगा जो आने वाले दिनों में अधिकतम संख्या में रोजगार प्रदान करेगा।

ऑटोमैटिक होगा वाहनों का फिटनेस टेस्ट
वॉलेंटरी स्क्रैपिंग व्हीकल पॉलिसी 20 साल से ज्यादा पुराने पर्सनल और 15 साल से ज्यादा पुराने कमर्शियल वाहनों पर लागू होगी। पॉलिसी के तहत वाहनों को ऑटोमैटिक फिटनेस टेस्ट कराना होगा। यह पूरी प्रक्रिया ऑटोमैटिक होगी। किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को रोकने के लिए इस प्रक्रिया में मानव हस्तक्षेप नहीं होगा।

पॉलिसी के अंदर आएंगे लगभग 1 करोड़ वाहन
पॉलिसी में लगभग 51 लाख लाइट मोटर वाहन (LMV) शामिल हैं जो 20 वर्ष से अधिक पुराने हैं, जबकि अन्य 34 लाख LMV 15 वर्ष से ऊपर के हैं। गडकरी ने कहा कि यह 17 लाख मध्यम और भारी मोटर वाहनों को भी कवर करेगा, जो 15 साल से ऊपर के हैं और वर्तमान में वैलिड फिटनेस सर्टिफिकेट के बिना हैं। उन्होंने कहा कि इन वाहनों से नए वाहनों की तुलना में 10-12 गुना अधिक प्रदूषण होने का अनुमान है।

10 हजार करोड़ का निवेश होगा, 25 लाख नौकरियां पैदा होंगी
आम बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि योजना का विवरण मंत्रालय द्वारा अलग से साझा किया जाएगा। गडकरी ने कहा था कि पॉलिसी से लगभग 10,000 करोड़ रुपए के नए निवेश होंगे और 25 लाख नौकरियां पैदा होंगी।

आने वाले सालों में 10 लाख करोड़ का हो जाएगा ऑटो उद्योग
पॉलिसी के बारे में बात करते हुए, गडकरी ने कहा कि यह भारी संख्या में रोजगार पैदा करने के अलावा नए वाहनों की खरीद को बढ़ावा देगी। ऑटोमोबाइल उद्योग का कारोबार वर्तमान में 4.5 लाख करोड़ है, जो आने वाले वर्षों में 10 लाख करोड़ रुपए होने की संभावना है। इसका एक्सपोर्ट कंपोनेंट जो वर्तमान में 1.45 लाख करोड़ रुपए है वो 3 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच जाएगा।
एक बार पॉलिसी लागू हो जाने पर स्टील, प्लास्टिक, रबर, एल्यूमीनियम जैसे स्क्रैप मटेरियल को ऑटोमोबाइल पार्ट्स बनाने में यूज किया जा सकेगा। हम पूरी दुनिया से स्क्रैप लेकर उसे रिसाइकल करेंगे। इससे ऑटोमोबाइल कंपोनेंट की लागत 40% तक कम हो जाएगी। इससे भारत के 10 लाख करोड़ रुपए के कच्चे तेल के आयात बिल में भी कटौती होगी।

फिलहाल इंसेंटिव स्ट्रक्चर बनाने की प्रक्रिया जारी
सड़क परिवहन और राजमार्ग सचिव, गिरिधर अरमाने ने कहा कि इंसेंटिव का स्ट्रक्चर बनाने की प्रक्रिया जारी है। हम सभी स्टेकहोल्डर्स के साथ बातचीत कर रहे हैं। केंद्रीय मंत्री जल्द ही इसकी घोषणा करेंगे। राज्य सरकारों ने पुराने वाहनों के मालिकों को हतोत्साहित करने वाले उपायों की घोषणा की है। इसको ग्रीन टैक्स नाम दिया गया है। कई राज्यों ने पहले ही टैक्स लगा दिया है। लेकिन इसे अप्रभावी तरीके से लागू किया गया है। यह कहते हुए कि स्क्रैपिंग के बहुत बड़े फायदे हैं, उन्होंने कहा कि शोध में कहा गया है कि एक पुराने चार सीटों वाले सेडान को पांच साल में 1.8 लाख रुपए का नुकसान होगा, जबकि एक भारी वाहन के लिए यह तीन साल की अवधि के लिए 8 लाख रुपए है।

प्राइवेट सेक्टर के साथ मिलकर स्क्रैपिंग सेंटर बनाए जाएंगे
अरमाने ने कहा कि पॉलिसी अनिवार्य है, सभी वाहनों को बिना किसी मानव हस्तक्षेप, भ्रष्टाचार या डेटा की धोखाधड़ी के बिना किए गए ऑटोमैटिक फिटनेस टेस्ट से गुजरना होगा। इसके लिए पीपीपी मोड के तहत ऑटोमैटिक फिटनेस टेस्ट स्थापित किए जाएंगे, जिसके लिए प्राइवेट पार्टनर्स और राज्य सरकारों मदद और सुविधाएं उपलब्ध कराएंगी। सरकार की भूमिका केवल सुविधाएं उपलब्ध कराने में रहेगी। स्क्रैपिंग सेंटर की रेग्युलेटिंग, कंट्रोलिंग में सरकार की कोई भूमिका नहीं होगी। शिपिंग सेक्टर में पहले से ही काफी डेवलप स्क्रैपिंग सेंटर हैं। हमारी योजना ऑटोमोबाइल स्क्रैपिंग को शिपिंग और अन्य सेक्टर्स के साथ जोड़ने की है। ऑटोमैटिक टेस्ट में फेल वाहन को चलाने पर उन पर जुर्माना लगाया जाएगा और जब्त भी किया जाएगा।

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